यशोधरा राजे के प्रयासों से मिले 1 करोड़ 12 लाख, लेकिन नहीं शुरू हुआ काम

shailendra gupta
शिवपुरी। भोपाल में नगरीय प्रशासन विभाग के मुख्य सचिव श्री परिहार की उपस्थिति में आयोजित सिंध पेयजल परियोजना की समीक्षा बैठक में वरिष्ठ भाजपा नेत्री और ग्वालियर सांसद यशोधरा राजे सिंधिया की रूचि और प्रयासों से 1 करोड़ 12 लाख रूपये वन विभाग की जमीन में खुदाई करने के एवज में मंजूर किए गए और इन्हें शिवपुरी में वन विभाग के कार्यालय में 4 अप्रैल को जमा भी कर दिया गया, लेकिन 15 दिन के बाद भी वन विभाग ने खुदाई के लिए अनुमति नहीं दी।

वन अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में वह वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त करके ही अनुमति जारी करेंगे। इससे 9 किमी क्षेत्र में पाइप लाइन डालने का काम रूका हुआ है और सिंध पेयजल परियोजना का धीमा काम चिंता का कारण बन रहा है। सूत्र बताते हैं कि चुनाव से पूर्व सिंध पेयजल परियोजना पूर्ण होने की संभावना काफी क्षीण है। हालांकि नगरपालिका तथा ठेकेदार दोशियान एण्ड कंपनी का दावा है कि जुलाई माह तक शिवपुरी में सिंध का पानी पहुंच जाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दोशियान एण्ड कंपनी को अभी तक लगभग 35 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी काफी काम होना शेष है। इंटेक बैल सहित पाइप लाइन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन का काम काफी शेष है। वन विभाग की जमीन पर लगभग 9 किमी क्षेत्र में खुदाई का काम तो अभी अनुमति मिलने से लटका हुआ है। धीमी काम गति पर असंतोष व्यक्त करते हुए यशोधरा राजे सिंधिया ने पहले कलेक्टर कार्यालय में समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में कलेक्टर आरके जैन सहित नपा पीएचई और ठेकेदार कंपनी के अधिकारी उपस्थित हुए। जहां स्पष्ट हुआ कि वन विभाग की जमीन में 1 करोड़ 12 लाख रूपये जमा न होने के कारण खुदाई कार्य नहीं हो पा रहा जिससे उतने क्षेत्रफल में पाइप लाइन नहीं डाली जा सकती।

इस पर अगले दिन यशोधरा राजे सिंधिया ने भोपाल में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुुख सचिव की उपस्थिति में बैठक बुलाई और उन्हें1 करोड़ 12 लाख रूपये जमा करने के लिए सहमत किया। यह राशि नगरीय प्रशासन विभाग ने तुरंत जारी कर दी और 4 अप्रैल को उक्त राशि वन विभाग के खाते में जमा भी हो गई, लेकिन इसके बाद भी खुदाई की अनुमति नहीं मिली। सूत्र बताते हैं कि स्थानीय वन विभाग ने इस मामले में काफी ढिलाई बरती और आवश्यक दस्तावेज संलग्र कर वरिष्ठ कार्यालय को नहीं भेजे। जिससे अभी भी अनुमति प्रतिक्षित है। वहीं दोशियान कंपनी के मैनेजर मकवाना का कहना है कि अनुमति मिलने के बाद चार माह में ङ्क्षसध का पानी शिवपुरी आ जाएगा। लेकिन नगरपालिका के एक वरिष्ठ पदाधिकारी उनके इस कथन से सहमत नहीं हैं।

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