शिवपुरी। शिवपुरी की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा दाग लगाने वाली खबर मिल रही है कि यू-डाइस (U-DISE) पोर्टल पर निजी स्कूलों की लापरवाही और मनमाने आंकड़ों की फीडिंग ने शिवपुरी जिले की शिक्षा रैंकिंग को प्रदेश में धड़ाम कर दिया है। स्थिति यह है कि बेहतर रिजल्ट्स के बावजूद जिला खिसककर 46वें (फिसड्डी) पायदान पर आ गिरा है। राज्य स्तर से लगी फटकार के बाद हरकत में आए शिक्षा विभाग ने सख्त तेवर अपनाए हैं। डीपीसी ने बैठक से नदारद रहे 78 निजी स्कूलों के संचालकों को सीधा और सख्त अल्टीमेटम दिया है कि दो दिन में पोर्टल का डेटा सुधारें, वरना स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
यू डाइस पोर्टल की रैंक जारी हुई। इसमें मध्य प्रदेश में शिवपुरी जिले की शिक्षा व्यवस्था 46 नंबर पर रही। लोक शिक्षण संचालनालय की फटकार के बाद विभाग ने स्थिति सुधारने की कवायद शुरू की। जिला परियोजना समन्वयक दफेदार सिंह सिकरवार ने निजी स्कूल संचालकों की बैठक ली। शिवपुरी ब्लॉक के 143 स्कूलों में से 65 स्कूलों के संचालक ही पहुंचे। 78 निजी स्कूल संचालक बैठक में नहीं आए।
डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार ने निजी स्कूल संचालकों को 2 दिन का अल्टीमेटम दिया। तय समय में यू डाइस पोर्टल पर जानकारी फीड नहीं हुई, तो मान्यता रद्द होगी। जिले में शिक्षा गुणवत्ता सुधारने के लिए पोर्टल पर शैक्षणिक आंकड़ों की सटीक जानकारी मौके पर हासिल की गई। इसमें 60 फीसदी अशासकीय स्कूलों ने भागीदारी की।
कार्यशाला में निजी स्कूल संचालकों, कंप्यूटर ऑपरेटरों को यू डाइस पोर्टल, परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स पीजीआई पर जानकारी दी गई। डीपीसी ने कहा, यू डाइस पोर्टल पर आंकड़े प्रामाणिक हों। आंकड़े त्रुटिरहित हों। गलत या अपूर्ण आंकड़ों से शैक्षिक मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है। संबंधित अधिकारी अभिलेखों के आधार पर ही सत्यापन करें। बैठक में डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार, जिला प्रोग्रामर जुगराज प्रजापति, बीआरसीसी अतर सिंह राजोरिया, बीएसी राजेश खत्री, एमआईएस हेमंत खटीक मौजूद रहे। शिवपुरी के 65 अशासकीय स्कूलों के संचालक और कंप्यूटर ऑपरेटर भी शामिल हुए। ड्रॉप बॉक्स, अपार आईडी, नामांकन में गिरावट पर भी वन टूवन चर्चा की गई।
दरअसल निजी स्कूल संचालकों ने जो
डाटा फीड किया है। उसमें जबरदस्त गड़बड़ियां हैं। यही वजह है कि मध्य प्रदेश में जिले की इंडेक्स रैंक 46 है। यानी हम प्रदेश में सबसे फिसड्डी हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर डाटा फीड करने के दौरान पूछी गई जानकारी में मन से यस और नो के जवाब लिख देते हैं।
बिना तथ्यों की पड़ताल किए कंप्यूटर ऑपरेटर की यह गलती शिक्षा विभाग को महंगी पड़ गई। अब कक्षा 5, कक्षा 8 और कक्षा 10 का बेहतर परिणाम देने के बावजूद जिले में शिक्षा व्यवस्था क्यों बिगड़ रही है। इसकी मॉनिटरिंग हुई, तो यह खुलासा हुआ कि निजी स्कूलों ने जवाब गलत फीड किए हैं। इसी के चलते डीपीसी ने 2 दिन की टाइम लिमिट डाटा सही फीड करने के लिए दी है।
दो दिन में काम पूरा करने को कहा है, नहीं तो मान्यता रद्द करेंगे
शिवपुरी का 46 वें स्थान पर होना जिले की पहचान बिगाड़ रहा है। निजी स्कूल संचालकों की बैठक लेकर हमने 2 दिन में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं। यदि ऐसा नहीं होता, तो हम सीधे मान्यता रद्द करने की कार्रवाई करेंगे। -
दफेदार सिंह सिकरवार, डीपीसी, शिवपुरी
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