शिवपुरी, नरवर के किले से बनेगा रणथंभौर-कूनो-ओरछा-खजुराहो के लिए पर्यटन का सर्किट, सिंधिया ने लिखा पत्र

Lalit Mudgal
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नरवर। नरवर का किला देश के संभत:सबसे प्राचीन किलो मे एक हो सकता है। यह किला सनातन संस्कृति की पहचान रामायणकालीन,महाभारत के समय का इतिहार और राजा नल की कुल देवी पसरा देवी और लोढी माता की आध्यत्मिक गाधा के साथ साथ देश का सबसे प्राचीन प्रेम कहानी ढोला मारू की प्रेम कहानी का साक्षी है।
इसके संरक्षण और पर्यटन विकास की दिशा में पहल शुरू हुई है,और इस दिशा मे शिवपुरी-गुना के क्षेत्रीय सांसद और भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी और मध्य प्रदेश की पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर को पत्र लिखे है। 

पहले पढे नरवर किले के बारे में 
पौराणिक एवं प्राचीन काल: महाभारत कालीन कथाओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में यह प्रसिद्ध राजा नल और रानी दमयंती की राजधानी हुआ करता था। उस समय इस क्षेत्र को 'नलपुर' या 'नालापूर' के नाम से जाना जाता था। पुरातत्व साक्ष्यों के अनुसार, आरंभिक शताब्दियों (0-225 ईस्वी) में यहाँ प्रसिद्ध 'नाग राजाओं' का भी शासन रहा, जिन्हें बाद में समुद्रगुप्त ने पराजित किया था।

राजपूत राजवंशों का काल: 10वीं से 12वीं शताब्दी के दौरान कछवाह राजपूत राजवंश के राजाओं ने इस किले का भव्य पुनर्निर्माण करवाया। कछवाह शासकों का यह मूल निकास स्थल माना जाता है, जहाँ से वे बाद में राजस्थान (आमेर और जयपुर) की ओर विस्थापित हुए। कछवाहों के बाद इस पर परिहार और तोमर राजपूतों का अधिकार रहा।

मुगल और सल्तनत काल: 16वीं शताब्दी की शुरुआत में सिकंदर लोदी ने इस अजेय किले पर आक्रमण कर इस पर अधिकार किया। बाद में मुग़ल सम्राट अकबर ने इसे मालवा सूबे के अंतर्गत एक प्रमुख सरकार (प्रशासनिक केंद्र) बनाया।

सिंधिया (मराठा) शासन: 19वीं शताब्दी की शुरुआत में ग्वालियर के मराठा सिंधिया राजवंश ने इस किले पर विजय प्राप्त की और यह स्वतंत्रता तक उन्हीं के अधीन रहा। वर्ष 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया के आदेश पर इसके ऐतिहासिक कचहरी महल का जीर्णोद्धार भी कराया गया था,और सबसे खास बात यह है कि शिवपुरी जिले का जिला मुख्यालय पूर्व मे नरवर ही था। 


भूतल (जमीन) से ऊंचाई: यह किला विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की एक खड़ी पहाड़ी पर स्थित है। इसकी धरातल या कस्बे से खड़ी ऊंचाई लगभग 500 फीट (लगभग 150 मीटर) है। (कुछ भू-भागों पर इसकी ऊंचाई 400 से 474 फीट भी दर्ज की गई है)।

समुद्र तल से ऊंचाई (MSL): नरवर किला समुद्र तल से लगभग 1,600 फीट (लगभग 488 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। (वहीं, इसके तल में बसे मुख्य टाउन की औसत ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 322 मीटर है)।

बनावट और विभाजन: किले की बाहरी प्राचीर का आकार 'बत्तख' (Duck) जैसा दिखाई देता है। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए किले के आंतरिक क्षेत्र को चार प्रमुख अहातों (भागों) में विभाजित किया गया है।

अब चलते है वर्तमान के पत्र वाली खबर की ओर 
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संदीप माहेश्वरी और नगर परिषद अध्यक्ष पद्मा संदीप माहेश्वरी द्वारा उठाई गई मांगों पर सिंधिया ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी और मध्य प्रदेश की पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर को अर्धशासकीय पत्र भेजे हैं। इनमें नरवर किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन करने, किले तक पहुंचने के लिए अप्रोच रोड बनाने और इसे प्रमुख पर्यटन सर्किट से जोड़ने के प्रस्तावों पर नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

500 फीट ऊंचाई पर इतिहास से रूबरू होने के लिए बेहतर सड़क, नियमित रखरखाव और पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। स्थानीय स्तर पर मांग उठती रही है कि वन विभाग और पीडब्ल्यूडी के समन्वय से करीब 500 फीट ऊंचाई पर स्थित किले तक पहुंच मार्ग बनाया जाए। अब यह मांग केंद्रीय और प्रदेश सरकार के स्तर तक पहुंचने से संरक्षण की दिशा में आगे की कार्रवाई की उम्मीद जगी है।

 ASI के हवाले हुआ तो बदल सकती है तस्वीर
किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन करने की मांग भी प्रस्ताव का अहम हिस्सा है। इसके पीछे उद्देश्य ऐतिहासिक संरचनाओं को सुरक्षित रखना, व्यवस्थित रखरखाव करना और पुरातात्विक महत्व के अनुरूप संरक्षण सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही रणथंभौर-कूनो-शिवपुरी-नरवर-ओरछा-खजुराहो को जोड़कर पर्यटन सर्किट विकसित करने का सुझाव दिया गया है। यदि यह प्रस्ताव आकार लेता है तो नरवर केवल स्थानीय पर्यटन स्थल बनकर नहीं रहेगा, बल्कि मध्य भारत के बड़े पर्यटन मार्ग का हिस्सा बन सकता है।

पर्यटक आएंगे तो स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते
नरवर किले के संरक्षण और पर्यटन विकास का फायदा केवल ऐतिहासिक धरोहर तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, होटल, होम-स्टे, परिवहन, खानपान और अन्य पर्यटन सेवाओं में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

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