शिवपुरी। आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुरुवार सुबह उस समय यात्रियों की सांसें अटक गईं, जब गुना से ग्वालियर जा रही गौरव टूर एंड ट्रेवल्स की यात्री बस के पीछे के दोनों पहिए अचानक निकल गए। पहिए निकलते ही बस का पिछला हिस्सा सड़क पर घिसटने लगा और घर्षण से चिंगारियां निकलने लगीं।
बस के अंदर बैठे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और कुछ ही पल में सभी को अपनी जान खतरे में नजर आने लगी। गनीमत रही कि घटना के समय बस की रफ्तार कम थी, वरना यह घटना बड़े हादसे में बदल सकती थी।
सेसई के पास हुई इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर दौड़ रहे यात्री वाहनों की फिटनेस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जिस बस में दर्जनों यात्री सफर कर रहे थे, उसके पहियों के नट-बोल्ट और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच आखिर कितनी गंभीरता से की गई थी? यदि फिटनेस जांच के बाद भी चलते वाहन के दोनों पिछले पहिए निकल जाएं तो जांच व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पहिए निकलते ही सड़क पर घिसटी बस, उठने लगीं चिंगारियां
गुरुवार सुबह गौरव टूर एंड ट्रेवल्स की बस यात्रियों को लेकर गुना से ग्वालियर की ओर जा रही थी। बस जैसे ही सेसई के पास हाईवे से गुजर रही थी, तभी पीछे के दोनों पहिए निकल गए। पहिए निकलने के बाद बस का पिछला हिस्सा सड़क से रगड़ खाने लगा। सड़क और बस की बॉडी के बीच घर्षण से चिंगारियां निकलने लगीं।
अचानक हुई इस घटना से बस में बैठे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। किसी को समझ नहीं आया कि आखिर बस के साथ हुआ क्या है। चालक ने स्थिति को संभालते हुए बस को नियंत्रित किया। राहत की बात यह रही कि बस पलटी नहीं और बड़ा जनहानि वाला हादसा टल गया।
कम रफ्तार बनी यात्रियों के लिए राहत
घटना के दौरान बस की गति कम बताई जा रही है। यही वजह रही कि पहिए निकलने के बाद भी चालक बस को संभालने में सफल रहा। यदि यही घटना तेज रफ्तार के दौरान होती तो परिणाम कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते थे।
तेज गति में अचानक पिछले दोनों पहिए निकलने की स्थिति में बस का संतुलन बिगड़ सकता था। बस के अनियंत्रित होकर पलटने की आशंका रहती और उसमें सवार यात्रियों को गंभीर चोटें आ सकती थीं। इस लिहाज से सेसई के पास हुई घटना को महज तकनीकी खराबी मानकर नजरअंदाज करना यात्री सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है।
फिटनेस व्यवस्था पर भी उठे सवाल
यात्री बसों की फिटनेस को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। लंबी दूरी की बसों के साथ-साथ ग्रामीण मार्गों पर चलने वाले यात्री वाहनों में भी तकनीकी खामियों की शिकायतें सामने आती रहती हैं। सेसई की घटना ने इसी व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर फिर सवाल खड़ा कर दिया है।
आरोप लगाए जा रहे हैं कि निजी फिटनेस व्यवस्था में वाहन की वास्तविक तकनीकी स्थिति की जांच के बजाय औपचारिकता पूरी होने का खतरा रहता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है, लेकिन सड़क पर चलते यात्री वाहन के दोनों पहिए निकल जाना अपने आप में फिटनेस जांच की गंभीरता पर सवाल खड़ा करने वाली घटना है।
आरटीओ की निगरानी पर भी नजर
यात्री वाहनों की फिटनेस और सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था से जुड़ी है। ऐसे में इस घटना के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित बस की फिटनेस कब हुई थी, फिटनेस के दौरान किन बिंदुओं की जांच की गई थी और बस को सड़क पर चलने के लिए प्रमाणित किस प्रक्रिया के तहत किया गया था।
एक हादसा टला, लेकिन सवाल बाकी
सेसई के पास बस के पहिए निकलने की घटना में फिलहाल बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इसने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है-क्या यात्री बसों की फिटनेस कागजों तक सीमित है या वास्तव में सड़क पर उतरने से पहले उनकी तकनीकी जांच होती है?
गनीमत रही कि बस की रफ्तार कम थी और चालक ने समय रहते स्थिति संभाल ली। यदि यही घटना हाईवे पर तेज रफ्तार के दौरान होती तो बस के पलटने और यात्रियों के गंभीर रूप से घायल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। घटना के बाद अब परिवहन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ इस बस की जांच नहीं, बल्कि जिले में संचालित यात्री बसों की फिटनेस व्यवस्था की वास्तविकता सामने लाना है।

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