शिवपुरी की फिजिकल थाना पुलिस पर एक युवक को बंधक बनाकर पीटने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित युवक को चोरी के एक मामले में गोयल बेकरी से उठाया गया और फिजिकल थाने ले जाने के बजाय जिले के सुभाषपुरा थाने ले जाकर उसके साथ मारपीट की गई। युवक को अवैध हिरासत में रखने की शिकायत लेकर उसकी पत्नी ने बीते दिन शिवपुरी एसपी को आवेदन दिया था। महिला का आरोप था कि उसके पति को मातादीन चौधरी के घर हुई 50 लाख रुपये की चोरी के मामले में पुलिस उठाकर ले गई है, जिसके बाद से उसकी कोई जानकारी नहीं मिल रही है और पुलिस उन्हें मिलने भी नहीं दे रही है।
कार में बैठाकर ले गए, फिर किया टॉर्चर
फिजिकल ट्रेनर मोनू रजक का आरोप है कि फिजिकल थाने के एसआई राघवेंद्र सिंह चौहान और एक अन्य पुलिसकर्मी तिवारी ने उसे गोयल बेकरी से उठाया और कार में बैठाकर सुभाषपुरा थाने ले गए। वहां उसके साथ बर्बरता से मारपीट की गई। मोनू के मुताबिक, पिटाई के कारण वह बार-बार बेहोश हो रहा था। उस पर दबाव बनाया जा रहा था कि वह मातादीन चौधरी के घर हुई 50 लाख की चोरी कुबूल कर ले। मोनू का कहना है कि पुलिस उससे चोरी स्वीकार करने को कह रही थी और बाकी का इल्जाम 'पारदी गैंग' पर मढ़ने की बात कर रही थी। मोनू ने कहा कि जब उसने चोरी की ही नहीं है, तो वह इसे कैसे कुबूल कर ले।
मोनू ने मीडिया को बताया कि इससे पहले भी फिजिकल पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए 6 बार बुलाया था। जब भी पुलिस ने बुलाया, वह थाने गया। हर बार उससे चोरी के बारे में पूछताछ की गई और हर बार उसने यही कहा कि उसने कोई चोरी नहीं की है।
पारदी गैंग' की रची जा रही थी स्क्रिप्ट
इस कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट पारदी गैंग का है। मोनू का दावा है कि पुलिस सिर्फ उससे चोरी ही कुबूल नहीं करवाना चाहती थी, बल्कि उस पर इस पूरी वारदात को कुख्यात 'पारदी गैंग' से जोड़ने का दबाव भी बना रही थी। मोनू के साफ इनकार करने पर उसके साथ और मारपीट की गई।
क्या था वारदात की रात का सच?
चोरी वाली रात का अपना पक्ष रखते हुए मोनू ने बताया कि उसकी पत्नी मायके गई हुई थी। वह शाम करीब 7 बजे घर आकर सो गया था। रात 9 बजे एक परिचित के फोन पर वह गुना बायपास की तरफ गया और फिर लौटकर सो गया। उसका कहना है कि इस 50 लाख की चोरी से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
शिकायतकर्ता की धमकी से दबाव में आई पुलिस
इस पूरे मामले में पुलिस की जल्दबाजी के पीछे एक और वजह सामने आ रही है। मोनू का आरोप है कि शिकायतकर्ता मातादीन अग्रवाल और उनकी पत्नी ने पुलिस के सामने जहर खाकर जान देने की धमकी दी थी, जिसके दबाव में आकर पुलिस ने बिना सबूत उसे उठा लिया और उसके साथ बर्बरता की।
कोर्ट जाएगी पत्नी, पुलिस ने आरोपों को नकारा
मोनू की पत्नी रजनी रजक ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष जताते हुए कहा है कि बिना सबूत किसी को इस तरह पीटना गैरकानूनी है और वे अब न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
वहीं दूसरी तरफ, फिजिकल थाना प्रभारी अवनीश सिंह राठौड़ ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता मातादीन अग्रवाल को मोनू पर गहरा शक था। इसके अलावा, वारदात वाली रात मोनू की गतिविधियों और उसके द्वारा दिए गए बयानों में काफी विरोधाभास था, जिसके चलते उससे सख्ती से पूछताछ की गई। थाना प्रभारी ने मारपीट के दावों को पूरी तरह से गलत ठहराया है।
सवालों के घेरे में पुलिस की कार्यप्रणाली
कुल मिलाकर इस मामले में पुलिस की चोरी वाली थ्योरी की कलई खुलती नजर आ रही है। पुलिस लाठी के बल पर इस मामले को सुलझाने का प्रयास कर रही थी। ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस ने मोनू को लेकर पर्याप्त होमवर्क नहीं किया था और केवल फरियादी की पत्नी के शक के आधार पर उसे उठा लिया। मोनू को अवैध हिरासत में रखकर पीटा गया और फिर बिना कोर्ट में पेश किए छोड़ दिया गया।
पुलिस इस मामले में बैकफुट पर इसलिए आ गई क्योंकि मोनू की पत्नी पुलिस अधीक्षक के पास पहुंच गई थी, मीडिया में मामला हाईलाइट हो चुका था, और पत्नी को भनक लग गई थी कि पुलिस उसे वापस फिजिकल थाने ले आई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर मोनू ने चोरी की थी, तो पुलिस ने उसे बिना कार्रवाई के छोड़ा क्यों? और अगर उसने चोरी नहीं की थी, तो उसे अवैध हिरासत में रखकर उसके साथ बर्बरता क्यों की गई?

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