एक्सरे @ ललित मुदगल शिवपुरी शहर का हृदय स्थल माधव चौक चौराहे से जन्म लेने वाली कोर्ट पर बढते वाहनो की संख्या को चलने के लिए उचित जगह प्रदान के लिए चलो, कुछ काम करते हैं की तर्ज पर सड़क पर उतरी नगर पालिका और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम की यह कवायद पिछले सालों की तरह इस बार भी डबल जीरो साबित हो रही है।
बिना किसी ठोस ब्लूप्रिंट और बिना होमवर्क के शुरू की गई यह अतिक्रमण हटाओ मुहिम अब दो व्यापारी वर्गों के बीच के तीखे टकराव में तब्दील हो गई है,कुल मिलाकर प्रशासन शिफ्टिंग का फ्लॉप शो जारी है,यह शो मीडिया की रैटिंग में बना हुआ है लेकिन नजीजा डबल जीरो ही बना हुआ हैं।
आमने-सामने आए दो वर्ग, प्रशासन का दांव उल्टा पड़ा
बीते सोमवार से शुरू हुए इस रस्म-अदायगी अभियान का पहला टारगेट कोर्ट रोड के फल-सब्जी विक्रेता और गांधी चौक पर वर्षों से काबिज मनिहारी (पटवा) दुकानदार थे। प्रशासन ने एक ऐसा शिगूफा छोड़ा जिसने आग में घी का काम किया। ठेले वालों को कोर्ट रोड से खदेड़कर ठंडी सड़क पर शिफ्ट करने का प्लान बना और उनकी खाली की गई जगह पटवाओं को आबंटित करने की सुगबुगाहट शुरू हो गई।
इस पर ठेले वालों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उनका सीधा सवाल था—जब हमें यहाँ से हटाया गया है, तो हमारी जगह पर किसी और की दुकान कैसे लग सकती है? इस अप्रत्याशित विरोध के आगे प्रशासन को पीछे हटना पड़ा और मामले को ठंडा करने के लिए 48 घंटे का समय मांगा गया।
ठंडी सड़क' की सड़ांध और गंदगी के घाट पर जगह देने का प्रयास
नगर पालिका की प्रशासनिक नाकामी की सबसे बड़ी त्रासदी ठंडी सड़क का चयन था। फल विक्रेताओं को गर्ल्स स्कूल के पास से हटाकर जिस जगह भेजा गया, वह कूड़े के अंबार और भीषण सड़ांध से पटी पड़ी है। वहां हालात ऐसे हैं कि न तो ग्राहक फटक सकते हैं और न ही दुकानदार खड़े होकर सांस ले सकते हैं। बिना जमीनी हकीकत जाने व्यापारियों को कचराघर में धकेलने से गुस्सा और भड़क गया।
गांधी चौक पर संग्राम, सड़क पर लेटीं महिलाएं, बेबस दिखा अमला
शनिवार शाम गांधी चौक पर हालात तब बेकाबू हो गए जब अमला जोगी पटवाओं की दुकानें हटाने पहुंचा। महिलाओं और छोटे दुकानदारों का गुस्सा फूट पड़ा। कई महिलाएं पुलिस के सामने सड़क पर लेट गईं। उनका दर्द वाजिब था-दीपावली की ग्राहकी के लिए 10 फीसदी के भारी ब्याज पर कर्ज लेकर माल भरा है, अब दुकान हटी तो रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। उनका कहना था कि भले ही उन्हें पार्क के अंदर बैठा दिया जाए, लेकिन दिवाली तक न उजाड़ा जाए।
कोर्ट रोड पर हर 6 घंटे की शिफ्ट में 2 टीआई और 15 पुलिसकर्मियों का भारी-भरकम बल तैनात है। इसके बावजूद तनाव इतना बढ़ा कि यातायात प्रभारी रणवीर यादव को हार मानकर 24 घंटे की मोहलत मांगनी पड़ी। उन्होंने सफाई दी कि दुर्गा टॉकीज और संजय लॉज के पास जगह तय की गई थी, लेकिन पटवा सड़क पर बैठ गए, अब शांतिपूर्ण हल निकाला जाएगा।
नियम सिर्फ गरीबों के लिए, अफसर झाड़ रहे पल्ला
कोर्ट रोड पर अब चार-पहिया वाहनों (कारों) की 'नो-एंट्री' कर दी गई है। ग्राहकों को अपनी गाड़ियां राज पैलेस और पुराने बस स्टैंड पर पार्क करनी होंगी। सुबह 9 से रात 9 बजे तक पुलिस बल मुस्तैद रहेगा। लेकिन इस पूरी अव्यवस्था और त्योहार पर सजने वाली अस्थायी दुकानों की परमिशन के 'खेल' पर जब नपा सीएमओ यशवंत राठौर से सीधा जवाब मांगा गया, तो वह फोन काटकर अपनी जिम्मेदारी से भागते नजर आए।
वही पुरानी कहानी, वही पुराना अंजाम
यह पहली बार नहीं है। पिछले साल भी अनाज मंडी में चूने की लकीरें खींचकर ऐसा ही 'शिफ्टिंग का फ्लॉप शो' रचा गया था। साफ है कि अफसर एसी कमरों से निकलकर सड़क पर बिना किसी जमीनी रणनीति के उतर आते हैं। जब विवाद होता है, तो मीडिया में खबर बनती है, और ऊपर बैठे आकाओं तक यह संदेश चला जाता है कि प्रशासन ने प्रयास तो किया। लेकिन बिना किसी ठोस विकल्प के व्यापारियों को उजाड़ने की यह नीति शहर के ट्रैफिक और शांति, दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है।

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