खनियाधाना। खनियांधाना क्षेत्र में शिक्षा के नाम पर धड़ल्ले से नियमविरुद्ध कोचिंग संस्थानों का संचालन किया जा रहा है। हालात यह हैं कि अधिकांश कोचिंग संचालकों के पास न तो शिक्षा विभाग या स्थानीय प्रशासन का वैध रजिस्ट्रेशन है और न ही शिक्षण कार्य के लिए जरूरी कोई शैक्षणिक योग्यता। इसके बावजूद ये संस्थान बेखौफ होकर संचालित हो रहे हैं, जिससे छात्रों के भविष्य और आम जनता की सुरक्षा दोनों पर संकट मंडरा रहा है।
न पार्किंग की जगह, सड़कों और गलियों में लग रहा जाम
कोचिंग संस्थानों के बाहर वाहन पार्किंग के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। छात्र अपने दोपहिया और चारपहिया वाहन सीधे सड़कों और तंग गलियों में ही खड़े कर देते हैं। इसके चलते मुख्य मार्गों पर आए दिन लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन प्रशासन इस ओर पूरी तरह आंखें मूंदे बैठा है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव, मुश्किलों में छात्र
कोचिंग सेंटर्स के भीतर बैठने की उचित व्यवस्था, कम जगह में क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाया जाता है, जिससे उमस और घुटन भरी स्थिति बनी रहती है। सुविधाओं के अभाव में छात्रों को मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
जिले और स्थानीय स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों की इस घोर लापरवाही और उदासीनता के कारण इन संचालकों के हौसले बुलंद हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी का खामियाजा अंततः अभिभावकों और उनके बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
अब देखना यह होगा कि क्या खबर सामने आने के बाद प्रशासन नींद से जागेगा और इन अवैध एवं नियम विरुद्ध संचालित कोचिंग संस्थानों पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा या फिर स्थिति जस की तस बनी रहेगी?

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