शिवपुरी। सुभाषपुरा थाना पुलिस पर एक युवक ने चोरी का जुर्म कबूल करवाने के लिए बेरहमी से मारपीट और प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। युवक ने वरिष्ठ अधिकारियों को दिए आवेदन में दावा किया है कि उसे फोन कर थाने बुलाया गया और वहां से पुलिसकर्मी तथा अन्य लोग उसे स्कॉर्पियो में डालकर सुभाषपुरा थाने ले गए।
आरोप है कि थाने के परिसर में एक पुराने खंडहरनुमा स्थान पर ले जाकर उसके साथ डंडों और पट्टों से मारपीट की गई। युवक का कहना है कि लगातार मारपीट के चलते उसकी हालत बिगड़ गई और वह बेहोशी की स्थिति तक पहुंच गया।
शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए थाना परिसर और आसपास लगे सभी CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग, पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल तथा संबंधित लोगों के बीच हुई बातचीत की जांच कराने की मांग की है। उसने आरोप लगाया है कि उसे मातादीन अग्रवाल के यहां हुई चोरी कबूलने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
बेकरी से फोन कर थाने बुलाने का आरोप
आवेदन के अनुसार घटना 2 अक्टूबर 2026 की बताई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह गोयल बेकरी पर गया था। इसी दौरान एसआई राघवेन्द्र चौहान ने मोबाइल फोन से उसे करीब 12:30 बजे कॉल किया और थाने आने के लिए कहा। युवक के मुताबिक वह सिद्धार्थ खटीक के साथ थाने पहुंचा। आरोप है कि वहां पहले से कुछ पुलिसकर्मी मौजूद थे और उसे गाड़ी में बैठाकर सुभाषपुरा थाने ले जाया गया।
चोरी कबूल करो, तुम पर बहुत प्रेशर है
शिकायतकर्ता ने आवेदन में आरोप लगाया है कि सुभाषपुरा थाना पहुंचने के बाद उसे पुराने खंडहरनुमा स्थान पर ले जाया गया। वहां उससे कहा गया कि मातादीन अग्रवाल के यहां चोरी हुई है और उसे यह चोरी कबूल करनी होगी।
आवेदन में पुलिसकर्मी राघवेन्द्र चौहान के अलावा अनजीत तिवारी, उदल गुर्जर, हरिओम और दो अन्य लोगों के नाम का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने उसके साथ मारपीट की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि डंडों और पट्टों से उसे लगातार पीटा गया।
पूरे दिन और रात मारपीट का आरोप
युवक का दावा है कि उसके साथ केवल कुछ देर नहीं, बल्कि पूरे दिन और रात तक मारपीट की गई। उसने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उसकी हालत इतनी खराब हो गई कि रात में उसे उल्टी तक हुई। इसके बावजूद उसकी पिटाई नहीं रोकी गई।
शिकायतकर्ता ने आवेदन में आरोप लगाया है कि उसने पुलिसकर्मियों से चोरी नहीं करने की बात कही, लेकिन उस पर चोरी कबूल करने का दबाव बनाया जाता रहा। उसका कहना है कि उसे यह बताया गया कि चोरी कबूलने के अलावा उसके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
मेडिकल के बाद शांतिभंग की कार्रवाई का आरोप
आवेदन में युवक ने दावा किया है कि मारपीट के बाद उसका मेडिकल कराया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे तहसील न्यायालय से शांतिभंग की कार्रवाई में छुड़वा दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके परिवार को भी इस पूरे घटनाक्रम की सूचना नहीं दी गई।
युवक ने दावा किया है कि वह शिक्षित परिवार से है और उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उसका कहना है कि वह फिजिकल कॉलेज में विद्यार्थियों को ट्रेनिंग देकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने का काम करता है।
CCTV और कॉल रिकॉर्ड की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि थाने और संबंधित स्थानों के CCTV फुटेज सुरक्षित कर उनकी जांच की जाए, साथ ही घटना के समय पुलिसकर्मियों और अन्य आरोपियों के बीच हुई मोबाइल बातचीत और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच की जाए।
युवक ने पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों और शिकायत में नामजद अन्य लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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