Shivpuri News: सबूत पकडे जाने के बाद नींद की गोलिया खिला दी अजेय राज ने वीडियो मे बोली पीडिता

Lalit Mudgal
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शिवपुरी।
शिवपुरी के पत्रकार अजेय राज सक्सेना पर बीते रोज एक 25 साल की विवाहिता ने सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक शिवपुरी को शिकायत दर्ज कराई है। पीडिता आरोप था कि अजेय राज ने शादी का वादा कर उससे लगातार 4 साल तक संबंध बनाए और अब शादी करने से मना ​कर दिया। इस मामले को लेकर फिर एक 1 मिनिट का वीडियो वायरल हुआ है इस वीडियो मे पीडिता कह रही है कि अजय राज सक्सेना ने उसे लगातार 9 नीद की गोलिया खिलाई थी। 

शिवपुरी की सोशल मीडिया मे एक पीडिता मीडियाकर्मियो से कह रही है कि मेरे घर पर इसके कुछ सबूत पकडे गए थे इसलिए मुझे नींद की गोलिया दी। मैने इससे कहा था कि मुझे केवल एक नीद की गोली चाहिए लेकिन अजेय राज सक्सैना ने लगातार 9 नीद की गोलिया खिला दी थी,गोलिया खाने के बाद मुझे 4 दिन तक बेहोशी सी छाई रही थी। यह मुझे गुना ले गया था वही इसने मेरा क्या कराया मुझे नही पता। 

पीडिता का कहना है कि यह घटनाक्रम इसी महिने की 16 तारिख का है यह मुझे गुना मे वाटर पार्क वाले होटल मे ले गया था,पीडिता के आरोप कितने सत्य या असत्य है यह तो पुलिस की जांच का विषया है लेकिन यह मामला बीते 24 घंटे मे शिवपुरी जिले से सबसे अधिक सुर्खियो मे है। 
इस मामले मे पीडिता ने दावा किया है कि अजेय राज ने मुझे लगातार शादी का वादा कर शारिरिक संबंध बंनाए है। सिटी कोतवाली मे पीडिता ने आवेदन दिया है। 

पीडिता पुलिस अधीक्षक शिवुपरी के पास भी गई थी एसपी मेडम ने तीन दिन का समय जांच का दिया है,कुल मिलाकर आरोप से भरा 10 मिनिट का वीडियो सोशल पर पिछले 24 घंटे से वायरल हो रहा है लेकिन इसी प्रकारण मे आज एक एक मिनिट के वीडियो मे सबूत पकडे जाने के बाद नींद की गोलिया खिलाने वाले वीडियो के बाद आमजनो ने अपने अपने हिसाब से प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। इस वीडियो मे कितनी सत्यता है यह जांच का विषय हो सकता है कि लेकिन शादी का वादा उसके बाद लगातार शारिरिक संबंध बनाना और फिर नीद की गोलिया खिलाना एक गंभीर अपराध की ओर इशारा करता है अब यह देखना है कि पुलिस इस मालले मे क्या एक्शन लेती है।  ऐसे मामले मे अगर कानून की बात करे तो कानून कहता हैं कि:-

शादी के झूठे वादे पर यौन संबंध (BNS धारा 69): भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 69 के तहत, यदि कोई पुरुष छल-कपट या शादी का झूठा वादा करके (बिना उसे पूरा करने के इरादे के) किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाता है, तो यह एक गंभीर दंडनीय अपराध है। इसके लिए आरोपी को 10 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है। (भारतीय दंड संहिता/IPC में इसे धोखाधड़ी व बलात्कार की धाराओं के तहत विश्लेषित किया जाता था)।

पुलिस जांच प्रक्रिया के अनिवार्य प्रावधान

पीड़िता की डॉक्टरी/मेडिकल परीक्षा (BNSS धारा 184 / CrPC धारा 164A): यौन अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस के लिए यह अनिवार्य है कि वह पीड़िता की सहमति से अपराध की सूचना के 24 घंटे के भीतर सरकारी या पंजीकृत डॉक्टर से मेडिकल जांच करवाए।

मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराना (BNSS धारा 183 / CrPC धारा 164(5A)): लैंगिक अपराधों की सूचना पुलिस थाने में दर्ज होते ही, पुलिस द्वारा पीड़िता का बयान अविलंब न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया जाना अनिवार्य होता है।

लापरवाह पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई

आपराधिक कार्रवाई (BNS धारा 199): यदि कोई पुलिस अधिकारी कानून के स्पष्ट निर्देशों (जैसे एफआईआर दर्ज न करना, मेडिकल न करवाना या मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज न करवाना) की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ BNS की धारा 199 (या IPC की धारा 166A) के तहत आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है। इसमें दोषी पुलिस अधिकारी को कम से कम 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक का कठोर कारावास और जुर्माना हो सकता है। इसके अतिरिक्त, कानून की अवहेलना पर BNS धारा 198 (IPC धारा 166) के तहत 1 वर्ष तक के कारावास का भी प्रावधान है। 

पीड़िता के लिए आगे के कानूनी विकल्प:

पुलिस अधीक्षक (SP/SSP) को शिकायत (BNSS धारा 173(4)): पीड़िता या उसके परिजन लिखित रूप में पुलिस अधीक्षक को शिकायत भेज सकते हैं, जो खुद जांच कर सकते हैं या निष्पक्ष जांच के निर्देश दे सकते हैं।

मजिस्ट्रेट के पास अर्जी (BNSS धारा 175(3) व 223): 

पीड़िता सीधे मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन दायर कर सकती है। मजिस्ट्रेट पुलिस को तुरंत मेडिकल करवाने, धारा 183 के तहत बयान दर्ज करने और जांच में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मी पर कार्रवाई का निर्देश दे सकते हैं।

विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई: उच्च पुलिस अधिकारियों से विभागीय जांच (Departmental Inquiry) और निलंबन के लिए प्रशासनिक शिकायत की जा सकती है।

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