शिवपुरी। अदालत में दलीलें देने वाले वकील साहब को जब अपने ही घर के मीटर का मामला मिला, तो बहस का मोर्चा तारकेश्वरी कॉलोनी में ही खुल गया। बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने बंद मकान से मालिक की गैरमौजूदगी में पुराना मीटर उखाड़कर स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी की, लेकिन मकान मालिक की आपत्ति और मोहल्ले वालों के विरोध के बाद कर्मचारियों को कदम पीछे खींचने पड़े। आखिरकार, जिस पुराने मीटर को हटाकर नया लगाने पहुंचे थे, उसी पुराने मीटर को दोबारा लगाकर लौटना पड़ा।
मामला सोमवार दोपहर का है। बिजली कंपनी के ठेकेदार के कर्मचारी तारकेश्वरी कॉलोनी में पुराने मीटर बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने एडवोकेट कैलाश जैन के ताला लगे मकान का पुराना मीटर निकाल दिया। उस वक्त मकान मालिक मौजूद नहीं थे। कुछ देर बाद जब कैलाश जैन को इसकी जानकारी मिली, तो वे मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों से सवाल-जवाब शुरू कर दिए।
मकान बंद मिला तो मीटर उखाड़ने का अधिकार किसने दिया?
कैलाश जैन ने अपनी गैरमौजूदगी में बिना अनुमति मीटर हटाने पर आपत्ति जताई। देखते ही देखते मामला गरमा गया। कॉलोनी के दूसरे रहवासी भी मौके पर पहुंच गए और बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे। लोगों का कहना था कि स्मार्ट मीटर लगाना है तो उपभोक्ता को भरोसे में लेकर प्रक्रिया पूरी की जाए। मकान पर ताला देखकर मीटर उखाड़ देना कहां तक उचित है?
मौके पर मौजूद लोगों ने ठेकेदार और बिजली कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बंद मकान में मीटर बदलने की कार्रवाई किसके निर्देश पर की गई। काफी देर तक बहस और विरोध चलता रहा, लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
आखिरकार कर्मचारियों ने माहौल भांपते हुए स्मार्ट मीटर लगाने का इरादा टाल दिया। पुराने मीटर को फिर से लगाया और वहां से रवाना हो गए। यानी स्मार्ट मीटर लगाने निकली टीम को विरोध के बाद पुराना मीटर ही बहाल करना पड़ा।
स्मार्ट मीटर पर सवाल, जवाब में नियमों की उलझन
शहर में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विरोध का यह पहला मामला नहीं है। स्थानीय स्तर पर उपभोक्ताओं की ओर से पहले भी मीटर बदलने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि मीटर बदलने से पहले उपभोक्ता को जानकारी देना और उसकी आपत्तियों का समाधान करना जरूरी है। वहीं, बिजली कंपनी की ओर से नियमों और प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से कई जगह असमंजस की स्थिति बनती है।
महाप्रबंधक बोले—सहमति लेना भी जरूरी
बिजली कंपनी के महाप्रबंधक सुमित अग्रवाल का कहना है कि वरिष्ठ कार्यालय से सभी उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाने के निर्देश मिले हैं। हालांकि, मीटर लगाने के दौरान उपभोक्ता की सहमति लेना भी जरूरी है। यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर को लेकर कोई दिक्कत है, तो उसकी संतुष्टि के लिए स्मार्ट मीटर के साथ चेक मीटर भी लगाया जा सकता है। जो उपभोक्ता सहमत नहीं हैं, उनके मामले में आगे मिलने वाले निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि जब कंपनी के महाप्रबंधक खुद सहमति को जरूरी बता रहे हैं, तो तारकेश्वरी कॉलोनी में बंद मकान का मीटर हटाने से पहले उपभोक्ता को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया? फिलहाल, इस मामले में विरोध के बाद पुराना मीटर तो वापस लग गया, लेकिन स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।

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