शिवपुरी। शिवपुरी का 111 करोड का प्रोजेक्ट अब भोपाल से लेकर शिवपुरी के अफसरो की गले मे हड्डी बनकर फस चुका है,सीवर प्रोजेक्ट को लेकर दायर जनहित याचिका मे ग्वालियर हाईकोर्ट का चाबुक चला तो अफसर दौड रहे है,और मंथन कर इस प्रोजेक्ट के फैल होने और जिम्मेदारो के नामो की खोज कर रहे है। इस प्रोजेक्ट को लेकर 28 सितंबर को पेशी होनी है और 24 सितंबर को भोपाल से शिवपुरी पहुंचे अफसरो ने जांच की रस्म अदायगी कर डाली।
इस प्रोजेक्ट पर शुरूवात से ही सवाल खडे हो रहे थे,लेकिन हाईकोर्ट ने इस सीवर प्रोजेक्ट पर कई सवाल खडे करते हुए इस प्रोजेक्ट को फैल शब्द से निरूपित कर दिया,प्रोजेक्ट के फैल होने की जबाबदेही तय करने को हाईकोर्ट ने कहा इसी क्रम में हाई कोर्ट मे जबाव देने से पूर्व ACS की जगह ENC शिवपुरी पहुंचे और उन्होने कुछ घंटो मे होटल से प्रोजेक्ट को नाप लिया।
झील संरक्षण परियोजना के तहत मंजूर 67 करोड़ के सीवर प्रोजेक्ट पर 13 साल में 111 करोड़ रु. खर्च हो चुके हैं। यानी 44 करोड़ रु. ज्यादा खर्च होने के बाद भी सीवेज लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अभी तक चालू नहीं हो सके हैं। ऐसे में शिवपुरी शहर की सीवर गंदगी नाले के जरिए सीधे सख्य सागर (चांदपाठा) झील में समा रही है।
सुनवाई से पांच दिन पहले बदला दौरा, एसीएस की जगह ईएनसी पहुंचे
हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश होने से ठीक पांच दिन पहले 24 सितंबर को नगरीय विकास एवं आवास विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ प्रदीप एस. मिश्रा शिवपुरी पहुंचे। खास बात यह रही कि शिवपुरी आने वाले अपर मुख्य सचिव संजय दुबे की जगह ईएनसी को मौका निरीक्षण के लिए भेजा गया। मिश्रा ने पूर्वी हिस्से में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवर लाइन की स्थिति देखी। निरीक्षण के बाद वे होटल पहुंचे और वहीं से भोपाल रवाना हो गए। ईएनसी ने साफ किया कि वे अपनी रिपोर्ट एसीएस को सौंपेंगे और इसके बाद हाईकोर्ट के सामने जवाब रखा जाएगा।
13 साल में 44 करोड़ अतिरिक्त खर्च, फिर भी समस्या जस की तस
67 करोड़ रुपए की स्वीकृत लागत वाला यह प्रोजेक्ट अब तक करीब 111 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। यानी मूल स्वीकृति से करीब 44 करोड़ रुपए अधिक खर्च होने के बाद भी शहर को वह सीवर व्यवस्था नहीं मिल पाई, जिसके लिए प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रोजेक्ट पर इतनी बड़ी राशि खर्च हो चुकी है तो फिर सीवर लाइन और एसटीपी पूरी क्षमता से क्यों नहीं चल रहे? इसी सवाल का जवाब अब हाईकोर्ट के सामने रखी जाने वाली रिपोर्ट में तलाशा जा रहा है।
चोक लाइन, अधूरे चैंबर और एसटीपी की अधूरी कहानी
ईएनसी प्रदीप एस. मिश्रा ने निरीक्षण के बाद कहा कि पीएचई का प्रोजेक्ट सीवर लाइन चोक होने के कारण चालू नहीं हो पाया। उन्होंने माना कि लाइन की पूरी सफाई कराने के साथ ही उचित चैंबर बनाना जरूरी है। एसटीपी को पूरी तरह फंक्शनल करना होगा, ताकि सीवेज का उचित डिस्चार्ज हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का काफी पैसा खर्च हो चुका है, इसलिए प्रोजेक्ट को पूरा कर चालू करना ही पड़ेगा। सीवेज के झील में जाने से पर्यावरण पर असर पड़ने की बात भी उन्होंने स्वीकार की।
अब सवाल प्रोजेक्ट कब पूरा होगा से आगे बढ़कर—जिम्मेदार कौन?
इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि सीवर प्रोजेक्ट कब चालू होगा। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद किसकी गलती से प्रोजेक्ट अटका, किस स्तर पर निर्णय हुए और अतिरिक्त राशि खर्च होने के बावजूद काम अधूरा क्यों रहा, यह भी जांच के दायरे में है।
ईएनसी मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट जिस तरह मामले को देख रहा है, उसमें जिम्मेदार व्यक्ति कार्रवाई से बच नहीं सकता। गलती पाए जाने पर रिकवरी और कार्रवाई की बात कही गई है। उन्होंने यहां तक कहा कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है और कई लोगों को जेल भी जाना पड़ सकता है। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी और कार्रवाई का निर्णय संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
जिसकी गलती है, उससे रिकवरी
जिस ढंग से हाईकोर्ट ने रुख किया है, तो कौन बच सकता है? जिसकी गलती है, उस पर रिकवरी निकलेगी। पनिश होंगे। बहुत सारे लोग जेल जाएंगे। हम अपनी ओर से रिपोर्ट सबमिट कर रहे हैं। जिम्मेदारी और निर्णय हाईकोर्ट तय करेगा। 28 सितंबर को सुनवाई है। हाईकोर्ट के मांगने पर हम रिपोर्ट जरूर दे रहे हैं। पीएचई विभाग के अधिकारी हैं, तो कार्रवाई भी पीएचई ही करेगा। एसीएस ने कुछ पॉइंट मांगे थे। मैं आज आकर रिपोर्ट दे रहा हूं। अब एसीएस रिपोर्ट फाइनल करेंगे।
- प्रदीप एस. मिश्रा, ईएनसी, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, भोपाल
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