10 तेंदुओं की खाल के मामले में जांच का केंद्र बना शिवपुरी, सुप्रीम कोर्ट ने दिए CEO को पेश होने के निर्देश

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) द्वारा की जा रही तेंदुआ शिकार मामले की जांच का प्रमुख केंद्र अब शिवपुरी बन गया है। इस बहुचर्चित मामले में वाइल्ड लाइफ एसओएस (Wildlife SOS) के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अंतरिम सुरक्षा बहाल कर दी है, लेकिन उन्हें 28 सितंबर को सुबह 11 बजे शिवपुरी में वन अधिकारियों के समक्ष पेश होकर जांच में पूरा सहयोग करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कार्तिक सत्यनारायण की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। साथ ही, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के 2 सितंबर के उस आदेश को संबंधित याचिकाओं का अंतिम निपटारा होने तक जारी रखने को कहा है, जिसमें सत्यनारायण की अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली गई थी। हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

आगरा में मिली 10 खालों से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरा प्रकरण उत्तर प्रदेश के आगरा में 10 तेंदुओं की खाल बरामद होने के बाद शुरू हुई सघन जांच से जुड़ा है। प्रारंभिक जांच में जब इन खालों के तार मध्य प्रदेश से जुड़े होने का शक हुआ, तो एमपी एसटीएसएफ (MP STSF) ने अपनी तफ्तीश शुरू की। इस जांच के दायरे में वन्यजीवों का कथित शिकार, उनके अंगों की अवैध खरीद-बिक्री और परिवहन जैसे गंभीर पहलू शामिल हैं। इसी सिलसिले में एसटीएसएफ ने कार्तिक सत्यनारायण को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए थे।

28 सितंबर को शिवपुरी में होगी अहम पूछताछ
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब 28 सितंबर को सुबह 11 बजे शिवपुरी में होने वाली पेशी बेहद अहम हो गई है। वाइल्डलाइफ एसओएस की ओर से भी आधिकारिक तौर पर जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही गई है। शिवपुरी में एसटीएसएफ के अधिकारियों के सामने कार्तिक सत्यनारायण की इस पेशी और पूछताछ से तेंदुआ शिकार से जुड़े इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।

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