शिवपुरी। शिवपुरी कलेकटर अर्पित वर्मा जिले की सरकारी व्यवस्थाओ ओ सुधारने के लिए लगातार दौरे कर रहे है,लापरवाह कर्मचारियो को दंडित कर रहे है और दिशा निर्देश भी दे रहे है,लेकिन शिवपुरी का स्वास्थय विभाग सुधरने का नाम नही ले रहा है। सतनवाडा के सरकारी अस्पताल से एक वीडियो ऐसा समाने आया है इस वीडियो मे पूरे अस्पताल मे एक भी स्वास्थ्य कर्मी ओर डॉक्टर नजर नही आ रहा है।
सतनवाडा के रहने वाले रामनिवास धाकड़ के अनुसार जब वह आज सुबह अपने बच्चे का इलाज कराने सतनवाडा सामुदायिक अस्पताल पहुंचे तो देखा तो अस्पताल मे एक भी कर्मचारी नही था।
रामनिवास धाकड़ का दावा है कि जानकारी लेने पर उन्हें पता चला कि डॉक्टर मोनिका मंगल की ड्यूटी सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक रहती है, लेकिन वह कथित रूप से प्रतिदिन करीब 11 बजे अस्पताल पहुंचती हैं और दोपहर करीब 1:30 से 2 बजे के बीच अस्पताल से चली जाती हैं। उन्होंने डॉक्टर के मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर भी शिकायत की है।
रामनिवास धाकड़ ने बताया कि उन्होंने सुबह करीब 8:30 बजे अस्पताल का वीडियो बनाया, जिसमें उनके अनुसार उस समय अस्पताल में कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं था। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी बीएमओ डॉ. विनय पिप्पल को फोन पर दी। आरोप है कि बीएमओ ने वीडियो देखने के बाद उसे सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करने के लिए कहा।
सुबह करीब 9:30 बजे के बाद अस्पताल में कर्मचारी पहुंचना शुरू हुए। इसी दौरान स्टाफ के जितेंद्र रघुवंशी पर रामनिवास धाकड़ से कथित तौर पर धमकी भरे लहजे में बात करने का आरोप लगाया गया है। रामनिवास के अनुसार, जितेंद्र रघुवंशी ने उनसे बीएमओ से शिकायत करने को लेकर सवाल किया और अपने राजनीतिक संपर्क होने की बात कही। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है।
पर्चे में इंजेक्शन दर्ज नहीं, फिर भी लगाने का आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप बच्चे के उपचार को लेकर सामने आया। रामनिवास धाकड़ का कहना है कि उनके बच्चे को लगातार दो दिनों से पेट दर्द के लिए इंजेक्शन लगाए जा रहे थे, जबकि उपचार पर्चे पर किसी इंजेक्शन का उल्लेख नहीं था। बच्चे का दर्द नहीं रुकने पर उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद नर्स संध्या सरलाम को पर्चा दिखाया। इसके बाद पर्चे में इंजेक्शन दर्ज नहीं होने की बात सामने आने का दावा किया गया है। रामनिवास धाकड़ ने पूरे मामले की जांच कर अस्पताल में डॉक्टर एवं कर्मचारियों की ड्यूटी की निगरानी सुनिश्चित करने, मरीजों के साथ उचित व्यवहार कराने तथा उपचार में निर्धारित प्रक्रिया का पालन कराने की मांग की है।
कुल मिलाकर कहने का सीधा अर्थ है कि अस्पताल मे ताला नही लगाया जाता है इमरजैंसी जैसा शब्द यहां उपयोग मे आता है। यह वीडियो सुबह 9 बजे का है इस वीडियो मे वीडियो बनाने वाले ने पूरा अस्पताल भ्रमण करते हुए दिखाया है। इस वीडियो मे केवल एक सफाई कर्मचारी सफाई करते दिख रहा है बाकी इस इस पूरे अस्पताल में एक भी कर्मचारी नही दिख रहा है। अब सर्य के उजाले मे अस्पताल की यह स्थिती है तो तो रात मे क्या होगी इसी वीडियो से अनुमान लगाया जा सकता है,रही बात ड्यूटी डॉक्टर की जब कर्मचारी ही समय पर नही आ रहे है तो साहब कैसे समय पर आऐगें यह बडा सवाल है,अब देखना है कि स्वास्थय विभाग इस मामले मे क्या कार्रवाही करता है।

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