शिवपुरी। ग्वालियर-चंबल संभाग के नगरीय प्रशासन विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर शिकायत ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। 21 सितंबर 2026 को माखन सिंह धाकड जिला अध्यक्ष राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्नमूलन शिवपुरी ने लोकायुक्त भोपाल, वल्लभ भवन में अपर मुख्य सचिव और नगरीय प्रशासन आयुक्त के समक्ष 54 पन्नों का शिकायती शपथपत्र प्रस्तुत किया गया है। शिकायत में संभाग के 57 नगरीय निकायों में अरबों रुपए के भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में दावा किया गया है कि जिन अधिकारी पर गंभीर लापरवाही के आरोपों के चलते नगरीय प्रशासन विभाग ने 7 सितंबर 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की, उनके कार्यकाल से जुड़े कथित वित्तीय मामलों की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि निलंबन के बाद भी कुछ वित्तीय गतिविधियां और कथित बैकडेट भुगतान जारी रहे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
शिवपुरी नगर पालिका का मामला भी शिकायत में शामिल
54 पन्नों की शिकायत में शिवपुरी नगर पालिका परिषद से जुड़ा एक मामला भी प्रमुखता से उठाया गया है। शिकायत के अनुसार 29 दिसंबर 1991 को शिवपुरी विकास प्राधिकरण के आदेश से एक कर्मचारी को निम्न श्रेणी लिपिक के पद पर महज 89 दिनों के लिए तदर्थ नियुक्ति दी गई थी। आरोप है कि बाद में इसी कर्मचारी को नियमित लेखापाल बनाने के लिए नियमों को दरकिनार करते हुए विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) आयोजित कराई गई और उसे नियमित लेखापाल बनाने की अनुशंसा का प्रस्ताव शासन को भेजा गया।
शिकायतकर्ता ने इस पूरी प्रक्रिया में प्रभारी संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता और लिपिक सौरभ सिंह कौरव की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में इसे नियम विरुद्ध प्रक्रिया बताते हुए जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
57 निकायों के भुगतान की जांच की मांग
शिकायत का दायरा केवल शिवपुरी नगर पालिका तक सीमित नहीं है। इसमें ग्वालियर-चंबल संभाग के 57 नगरीय निकायों में हुए विभिन्न भुगतानों और वित्तीय प्रक्रियाओं की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई मामलों में नियमों और वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया तथा भुगतान से संबंधित दस्तावेजों में भी गंभीर गड़बड़ियां हुईं।
अब लोकायुक्त और नगरीय प्रशासन विभाग के स्तर पर शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच होती है या नहीं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर नजर है। यदि आरोपों की जांच में पुष्टि होती है तो मामला केवल एक निकाय या अधिकारी तक सीमित न रहकर संभाग के कई नगरीय निकायों की वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच सकता है।

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