शिवपुरी। केंद्र सरकार की ड्रीम योजना के तहत संचालित पीएमश्री नवोदय विद्यालय नरवर का चमचमाता बोर्ड भले ही बेहतर शिक्षा और सुविधाओं की तस्वीर दिखाता हो, लेकिन अभिभावकों ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विद्यालय के अंदर की ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। पालकों का आरोप है कि विद्यालय में दूषित पानी पीने से 20 से ज्यादा बच्चे बीमार हुए हैं। वहीं हॉस्टल में सीनियर छात्रों द्वारा जूनियरों को बेल्ट से पीटे जाने का गंभीर मामला भी सामने आया है।
अभिभावकों ने कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर विद्यालय का तत्काल निरीक्षण कराने, बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कराने और कथित मारपीट की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ज्ञापन की प्रतिलिपि नवोदय विद्यालय समिति के मुख्यालय नोएडा और भोपाल संभाग के आयुक्त को भी भेजी गई है। पालकों ने सात दिन में कार्रवाई नहीं होने पर आगे आंदोलन की चेतावनी दी है।
15 सितंबर की रात हॉस्टल में बेल्ट से पिटाई का आरोप
अभिभावकों के मुताबिक 15 सितंबर की रात सीनियर छात्रों ने जूनियर विद्यार्थियों को हॉस्टल में बुलाकर बेल्ट से पीटा। बच्चों ने इसकी जानकारी तत्काल पालकों को नहीं दी। 20 सितंबर को जब अभिभावकों को घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा।
पालकों का कहना है कि मामले में नियमानुसार कठोर कार्रवाई किए जाने के बजाय संबंधित विद्यार्थियों को कथित तौर पर 15 दिन के लिए घर भेजने की बात कही गई। अभिभावकों का सवाल है कि यदि हॉस्टल में बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी इतनी गंभीर घटना हुई तो इसकी लिखित सूचना और विधिवत जांच क्यों नहीं कराई गई? पालकों ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल में पर्याप्त CCTV व्यवस्था नहीं है, जिससे घटनाओं की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दूषित पानी से 20 से ज्यादा बच्चों की तबीयत बिगडी
अभिभावकों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि विद्यालय में आरओ, वाटर कूलर और हैंडपंप तीनों बंद पड़े हैं और बच्चों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनके अनुसार 20 से ज्यादा बच्चों में पेट और लीवर संबंधी संक्रमण की शिकायत सामने आई है। कक्षा 11 के छात्र विकास साहू के पिता संदीप साहू ने बताया कि उनका बेटा करीब 15 से 20 दिन तक बुखार से परेशान रहा, लेकिन विद्यालय में उसका समुचित स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया गया। बाद में झांसी में जांच कराने पर लीवर में संक्रमण की बात सामने आने का दावा किया गया है।
10 मिनट की देरी और बच्चे को दिनभर खाना नहीं?
अभिभावकों ने भोजन व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल की छुट्टी करीब 1:30 बजे होती है। बच्चे ड्रेस बदलकर मेस तक पहुंचते हैं। यदि इसमें करीब 10 मिनट की देरी हो जाए तो कथित तौर पर उन्हें भोजन नहीं दिया जाता और बच्चे दिनभर भूखे रहने को मजबूर होते हैं। पालकों के अनुसार इसके बाद उन्हें अगला भोजन रात में ही मिलता है।
एक साल से प्राचार्य का पद खाली, कई विषयों के शिक्षक भी नहीं
अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय करीब एक साल से नियमित प्राचार्य के बिना चल रहा है। इसके अलावा तेलुगु, कंप्यूटर, गणित और अंग्रेजी सहित कई विषयों के शिक्षकों के पद रिक्त बताए गए हैं। पालकों का कहना है कि जिस संस्थान में दूर-दराज के बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं, वहां प्राचार्य और शिक्षकों के महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली रहना शिक्षा व्यवस्था की गंभीर समस्या है।
कलेक्टर अध्यक्ष, फिर भी निरीक्षण नहीं होने का आरोप
अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन समिति और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कलेक्टर विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष होते हैं, इसके बावजूद अब तक नियमित निरीक्षण और अभिभावक बैठक जैसी व्यवस्था प्रभावी तरीके से नहीं हुई। पालकों का आरोप है कि उन्होंने कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें कीं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने वाले विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट के नंबर काटने तथा टीसी देने की धमकी तक दी जाती है।
सात दिन का अल्टीमेटम, जांच की मांग
मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे अभिभावकों ने ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनकी मांग है कि विद्यालय में स्वास्थ्य, भोजन, पेयजल, शिक्षकों की उपलब्धता और हॉस्टल सुरक्षा की जांच कराई जाए। साथ ही कथित रैगिंग और बेल्ट से पिटाई की घटना की अलग से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। अभिभावकों ने सात दिन में ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आगे कदम उठाने की बात कही है।

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