शिवपुरी। शिवपुरी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक प्रबंधन को लुकवासा पैक्स के निलंबित सहायक प्रबंधक उग्रसेन सिंह रघुवंशी के मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना महंगा पड़ गया है। हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने कर्मचारी के लंबित प्रतिवेदन पर निर्णय लेने की बजाय रिव्यू पिटीशन दायर करने को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना है। इस मामले में न केवल बैंक की रिव्यू पिटीशन 24 सितंबर को खारिज की गई है, बल्कि बैंक के सीईओ पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
जानकारी के बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति, लुकवासा के सहायक प्रबंधक उग्रसेन सिंह रघुवंशी मुकेश रघुवंशी के निलंबन पर हाईकोर्ट ने बहाली संबंधी निर्णय का आदेश दिया था। 15 दिन के भीतर निर्णय लेना था। लेकिन बैंक ने इस मामले में रिट पिटीशन दायर कर दी। बैंक की ओर से दायर रिव्यू पिटीशन में कहा गया कि प्रतिवेदन बैंक के संबंधित प्राधिकारी को नहीं, बल्कि शिवपुरी कलेक्टर को संबोधित था।
कलेक्टर बैंक के प्रशासक थे। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि यह तर्क रिव्यू पिटीशन में स्पष्ट रूप से उल्लेखित नाहीं था। केवल यह आधार लिया गया था कि पहले आदेश के समय बैंक पक्ष को सुनवाई का अवसर नहीं मिला। हाईकोर्ट ने कहा कि जब आदेश केवल प्रतिवेदन के निराकरण के लिए था, तब नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं थी। मामले को लंबित रखने की भी जरूरत नहीं थी। बैंक कानून के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र था। कोर्ट ने रिव्यू याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया।

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