पोहरी। प्रदेश में विकास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरकार की ओर से लगातार दावे किए जाते हैं, लेकिन शिवपुरी के पोहरी क्षेत्र के कुड़ी गांव में एक नवविवाहिता के अंतिम संस्कार की तस्वीर व्यवस्था के उन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आई। जिस समय परिवार अपनी बहू को अंतिम विदाई दे रहा था, उसी समय आसमान से बारिश हो रही थी और मुक्तिधाम में न टीनशेड था, न शव रखने के लिए पक्का चबूतरा। लिहाजा परिजनों और ग्रामीणों को बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ा।
यह सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की तस्वीर है, जहां जीवन की सुविधाओं के बाद अब अंतिम विदाई के लिए भी आम लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है। जिम्मेदारों की निगरानी और पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
सर्पदंश ने छीनी जिंदगी, व्यवस्था ने अंतिम विदाई भी कर दी मुश्किल
कुड़ी गांव निवासी नवविवाहिता प्रवेश गुर्जर सावन के अवसर पर अपने मायके श्योपुर जिले के विजयपुर अनुविभाग के ग्राम ढोढरी गई थी। इसी दौरान उसे जहरीले सर्प ने डस लिया। परिजन उसे तत्काल विजयपुर स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने गंभीर हालत को देखते हुए ग्वालियर रेफर कर दिया।
परिजन उसे ग्वालियर लेकर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद जब शव को अंतिम संस्कार के लिए नवविवाहिता की ससुराल पोहरी तहसील के कुड़ी गांव लाया गया तो परिवार के सामने एक और मुश्किल खड़ी थी।
बारिश होती रही और खुले में होता रहा अंतिम संस्कार
गांव के मुक्तिधाम में बारिश से बचने के लिए टीनशेड तक नहीं है। शव रखने के लिए पक्का चबूतरा भी नहीं बनाया गया है। ऐसे में बारिश के दौरान परिजनों को खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार की तैयारी करनी पड़ी। बारिश के बीच अंतिम संस्कार करते परिजनों की यह तस्वीर गांव की बदहाल व्यवस्था को सामने लाती है। एक तरफ परिवार अपने सदस्य को खोने के गम में था, वहीं दूसरी ओर उसे अंतिम संस्कार की बुनियादी व्यवस्था के लिए भी जूझना पड़ा।
मुक्तिधाम में चबूतरा नहीं, टीनशेड नहीं, सफाई भी सवालों में
ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम में लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। परिसर में गंदगी के साथ मृत पशुओं की हड्डियां और अन्य अवशेष पड़े होने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों के लिए राशि खर्च होने के बावजूद मौके पर ऐसी सुविधाएं दिखाई नहीं दे रही हैं, जो किसी भी गांव के मुक्तिधाम में होना जरूरी हैं। उनका कहना है कि कम से कम अंतिम संस्कार के लिए पक्का चबूतरा, टीनशेड और साफ-सफाई की व्यवस्था तो होनी ही चाहिए।
टूटी पुलिया ने भी बढ़ाई अंतिम यात्रा की परेशानी
समस्या केवल मुक्तिधाम तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार कुड़ी गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली पुलिया कई वर्षों से क्षतिग्रस्त है। बारिश के मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने वाली अंतिम यात्रा भी प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में गांव से आवागमन पहले ही मुश्किल हो जाता है और क्षतिग्रस्त पुलिया के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
सवाल यह कि जिम्मेदारी किसकी?
कुड़ी की घटना कई सवाल छोड़ जाती है। सरकार और प्रशासन गांवों में विकास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करते हैं, लेकिन क्या किसी गांव के मुक्तिधाम में बारिश से बचने के लिए टीनशेड और शव रखने के लिए पक्का चबूतरा उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती है? जिस परिवार ने अपना सदस्य खोया, उसे कम से कम अंतिम विदाई सम्मानजनक तरीके से देने की सुविधा मिलनी चाहिए। लेकिन कुड़ी में बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे हुआ अंतिम संस्कार स्थानीय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और पंचायत से मुक्तिधाम में टीनशेड, पक्का चबूतरा, नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था कराने के साथ ही क्षतिग्रस्त पुलिया का जल्द निर्माण कराने की मांग की है। कुड़ी की यह तस्वीर किसी राजनीतिक बयान से ज्यादा प्रभावी सवाल पूछती है-जब एक आम परिवार अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देता है, तब क्या उसे इसके लिए भी सरकारी व्यवस्था से संघर्ष करना पड़ेगा ?

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