शिवपुरी। शिवपुरी पुलिस अधीक्षक शिवपुरी कार्यालय पर एक पिता 1 हजार किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचा। पिता का आरोप है कि मेरी 5 साल की बेटी का नाम और पहचान उसके नाना-नानी ने बदल दिया है,मुझे आशंका है कि मेरी बेटी को बेच दिया जाऐगा। इस मामले को लेकर मैने देहात थाना पुलिस को 2024 मे आवेदन दिया था लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नही हुई है।
1 हजार किलोमीटर का सफर तय कर उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से एक पिता अपनी नाबालिग बेटी की तलाश में एक बार फिर शिवपुरी पहुंचा। उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन देकर आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में दिए गए आवेदन पर आज तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पिता का दावा है कि उसकी पत्नी नाबालिग बेटी को अपने साथ शिवपुरी ले आई थी और अब बेटी का नाम तथा अभिभावकों के नाम तक बदलकर स्कूल में प्रवेश दिला दिया गया है। उसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, बेटी की सकुशल बरामदगी और कथित दस्तावेजी बदलाव की जांच की मांग की है।
शुक्रवार को एक बार फिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और अपनी पत्नी तथा नाबालिग बेटी की बरामदगी की मांग को लेकर आवेदन सौंपा। प्रार्थी का कहना है कि वह वर्तमान में मुंबई में टैक्सी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता है। वर्ष 2024 में उसकी पत्नी अंजली गुहरैया उर्फ आफरीन बेगम दो बेटों को उसके पास छोड़कर नाबालिग बेटी को साथ लेकर शिवपुरी आ गई थी।
नसरत अली ने आवेदन में बताया कि वह बेटी की तलाश में वर्ष 2024 में भी शिवपुरी आया था, लेकिन पत्नी के परिजनों ने उसे बेटी से मिलने नहीं दिया और कथित रूप से धमकाकर वापस भेज दिया। इसके बाद 20 जून 2024 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि उसकी नाबालिग बेटी का शिवपुरी के एक निजी बाल वाटिका प्लेस्कूल में प्रवेश कराते समय उसका नाम बदल दिया गया। साथ ही विद्यालय के रिकॉर्ड में कथित रूप से बच्ची के माता-पिता के स्थान पर उसके नाना-नानी के नाम दर्ज करा दिए गए। प्रार्थी ने इस पूरे मामले की शिक्षा विभाग, जन्म प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है,पिता का कहना है कि उसकी पत्नि अपने परिजनो के साथ शिवपुरी के बजरिया मोहल्ला रेड लाइट ऐरिया में निवास करती है,इस कारण मुझे डर है कि मेरी बेटी के साथ कुछ भी गलत हो सकता है या फिर उसे बेचा जा सकता है। मेरी बेटी से बडा मेरे लिए कुछ नही हैं।
प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि उसे पत्नी के परिजनों से जान का खतरा है तथा पूर्व में भी उसके साथ अभद्र व्यवहार और धमकी दी गई थी। आवेदन में यह भी कहा गया है कि यदि वर्ष 2024 में दिए गए आवेदन पर समय रहते कार्रवाई हो जाती तो मामला इतना गंभीर नहीं बनता।

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