शिवपुरी,जाति प्रमाण पत्र की जानकारी का दबाव के बीच हेड कांस्टेबल की मौत,प्रताडना के आरोप

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। सर्किल जेल शिवपुरी में पदस्थ हेड कांस्टेबल मोहन सिंह बाथम की मौत के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि मोहन सिंह पिछले कुछ समय से जाति प्रमाण-पत्र से जुड़ी आरटीआई, कथित ब्लैकमेलिंग और जेल के कुछ कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर मानसिक दबाव में थे।
परिवार का यह भी आरोप है कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते उन्होंने छुट्टी मांगी थी, लेकिन उनका आवेदन स्वीकृत नहीं हुआ। घटना के बाद परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।

सुबह घर से ड्यूटी के लिए निकले, दोपहर तक नहीं पहुंचे
जानकारी के अनुसार ग्वालियर निवासी मोहन सिंह बाथम सर्किल जेल शिवपुरी में हेड कांस्टेबल के पद पर पदस्थ थे। 6 जुलाई की सुबह करीब 9 बजे वह स्कूटी से घर से ड्यूटी के लिए निकले थे। निर्धारित समय तक जब वे जेल नहीं पहुंचे तो दोपहर करीब 12 बजे जेल से उनके घर फोन किया गया।

मोहन सिंह का मोबाइल घर पर ही छूट गया था। इसके बाद उनकी पत्नी को चिंता हुई। उनके आरक्षक बेटे ने जेल स्टाफ की मदद से पिता की तलाश शुरू कराई।उतलाश के दौरान मोहन सिंह इंडस्ट्रीयल एरिया में स्कूटी के साथ मिले। उनकी तबीयत खराब थी और उन्होंने बताया कि उन्होंने कोई विषाक्त पदार्थ सेवन कर लिया है। जेल स्टाफ की मदद से उन्हें तत्काल मेडिकल कॉलेज शिवपुरी ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें ग्वालियर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान रात करीब 11 बजे उनकी मौत हो गई।

जाति प्रमाण-पत्र को लेकर चल रही थी आरटीआई
परिजनों के मुताबिक मोहन सिंह अपने जाति प्रमाण-पत्र से जुड़े मामले को लेकर काफी समय से परेशान थे। परिवार का कहना है कि राजस्थान में मांझी समाज को अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल किए जाने के आधार पर संबंधित जाति प्रमाण-पत्र से मोहन सिंह ने नौकरी की थी।  परिजनों के अनुसार किसी व्यक्ति ने आरटीआई के माध्यम से प्रदेशभर में इस तरह की जानकारी मांगी थी। परिवार का आरोप है कि इसी मामले को लेकर मोहन सिंह पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि, आरटीआई किसने लगाई थी और उसके पीछे वास्तव में क्या उद्देश्य था, यह जांच का विषय है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

परिवार ने ब्लैकमेलिंग का लगाया आरोप
मोहन सिंह के परिजनों का आरोप है कि आरटीआई लगाने वाला एक व्यक्ति उन्हें ब्लैकमेल कर रहा था। परिवार का कहना है कि जाति प्रमाण-पत्र से संबंधित जानकारी को लेकर मोहन सिंह लगातार तनाव में रहते थे। परिजनों ने सर्किल जेल के कुछ कर्मचारियों पर भी कथित तौर पर ताने मारने और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण मोहन सिंह मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे।

इलाज के लिए छुट्टी मांगने की बात भी सामने आई
मोहन सिंह के आरक्षक बेटे का कहना है कि उनके पिता काफी समय से तनाव में थे और इलाज की जरूरत थी। परिवार के अनुसार उन्होंने इलाज के लिए छुट्टी का आवेदन भी दिया था, लेकिन उसे स्वीकृति नहीं मिली। मोहन सिंह की पत्नी ममता ने भी अधिकारियों से उनके इलाज के लिए छुट्टी देने का आग्रह किया था। परिवार का दावा है कि यदि उन्हें समय पर उपचार और आराम के लिए छुट्टी मिल जाती तो शायद परिस्थितियां अलग होतीं।


मौत के बाद कई सवाल, जांच से सामने आएगा सच
मोहन सिंह की मौत के बाद अब कई सवाल जांच के केंद्र में हैं। जाति प्रमाण-पत्र को लेकर आरटीआई में वास्तव में क्या जानकारी मांगी गई थी? क्या किसी व्यक्ति ने उन्हें धमकाया या ब्लैकमेल किया था? जेल के किसी कर्मचारी ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया था या नहीं? और इलाज के लिए दिए गए छुट्टी के आवेदन पर क्या कार्रवाई हुई?

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