शिवपुरी। शिवपुरी जिले की आंगनबाडियो पर बंटने वाला पोषण आहार अब शिवपुरी के टीएचआर प्लांट मे नही बनेगा। पोषण आहार के लिए अब राज्य शासन के आदेश के तहत कलेक्टर शिवपुरी ने नई व्यवस्था को जन्म दिया है। इस व्यवस्था मे जिले के कई सो स्व सहायता समूह की हजारो महिलाओ का रोजगार का जन्म हो गया है। कलेक्टर शिवपुरी अर्पित वर्मा ने इस पोषण आहार के बनने वाली प्रक्रिया,गुणवत्ता और बटाकंन के लिए पूरी एक गाइड लाइन जारी की है। इससे पूर्व आगनबाडियो पर वितरित होने वाला पोषण आहार शिवपुरी के विवादित टीएचआर में निर्माण होता था।
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने 31 जुलाई 2026 को आदेश क्रमांक पोषण आहार/2025/3905 जारी कर जिले की टेक होम राशन (टीएचआर) पोषण आहार की व्यवस्था में यह बदलाव किया है। आदेश के तहत फिलहाल इसे अंतरिम वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लागू किया गया है। इसका मकसद स्थानीय स्तर पर पोषण आहार तैयार कराकर आंगनबाड़ी केंद्रों तक उसकी आपूर्ति सुनिश्चित करना और पूरी प्रक्रिया में स्थानीय स्व-सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाना है।
हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि यह व्यवस्था स्थायी अधिकार नहीं मानी जाएगी। किसी समूह को भविष्य में काम जारी रखने, नवीनीकरण अथवा किसी टेंडर में पात्रता का स्वत: अधिकार नहीं मिलेगा। शासन की नई व्यवस्था आने पर इस अंतरिम व्यवस्था को समाप्त किया जा सकता है।
दो हजार से अधिक आंगनबाड़ियों तक पहुंचेगा यह आहार
शिवपुरी जिले में दो हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं सहित पात्र हितग्राहियों को पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है। नई व्यवस्था में इसके निर्माण से लेकर गुणवत्ता जांच, पैकिंग, भंडारण और वितरण तक की जिम्मेदारियों की पूरी श्रृंखला निर्धारित की गई है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पोषण आहार के निर्माण में स्थानीय स्व-सहायता समूहों को जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले समूहों की महिलाओं को रोजगार और आर्थिक गतिविधि से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
बच्चे को रोज 527 कैलोरी,और 24 ग्राम
नई व्यवस्था में 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रतिदिन 145 ग्राम टीएचआर निर्धारित किया गया है।
गेहूं आधारित दलिया में निर्धारित मात्रा के अनुसार—
गेहूं — 82 ग्राम
चना दाल — 42 ग्राम
सोया बड़ी चूरा — 10 ग्राम
तिल — 11 ग्राम रहेगा। इस आहार से करीब 527 कैलोरी और 24 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। एक बच्चे के लिए प्रतिदिन इस भोजन पर करीब 8 रुपये खर्च निर्धारित किया गया है।
गर्भवती और धात्री महिलाओं को 170 ग्राम
गर्भवती, धात्री महिलाओं और आकांक्षी जिलों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों के लिए प्रतिदिन 170 ग्राम टीएचआर देने का प्रावधान है। इस श्रेणी के लिए गेहूं-दलिया मिश्रण से करीब 623 कैलोरी और 28 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रति हितग्राही प्रतिदिन करीब 9.50 रुपये का खर्च निर्धारित किया गया है।
महीने के 20 दिन ही मिलेगा टीएचआर
नई व्यवस्था में बच्चों को पूरे महीने हर दिन पोषण आहार देने की बजाय 20 दिन ही आहार उपलब्ध कराया जाएगा। इसका कारण यह है कि प्रत्येक मंगलवार आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को गर्म पका भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। मंगलवार को खीर-पूड़ी तथा आलू-चना की सब्जी जैसे गर्म भोजन की व्यवस्था रहेगी। इसी तरह गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए भी मंगलवार को गर्म भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसी व्यवस्था के चलते टीएचआर का वितरण दो चरणों में किया जाएगा। हितग्राहियों को एक साथ पूरे महीने का राशन देने की बजाय 10-10 दिन के दो पैकेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था रहेगी।
अब पैकेट बांटना भी आसान नहीं, होगी डिजिटल निगरानी
नई व्यवस्था में आहार के वितरण को भी डिजिटल निगरानी से जोड़ा गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को वितरण के दौरान फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) का उपयोग करना होगा।हर महीने निर्धारित अवधि में टीएचआर वितरण किया जाएगा। वितरण की एंट्री पोषण ट्रैकर में करना अनिवार्य होगा और यही एंट्री भुगतान का आधार बनेगी। इसके अलावा वितरण के समय फोटो लेकर उसे संबंधित एप पर अपलोड करना भी जरूरी होगा। वितरण के दौरान सहयोगिनी या मातृ समिति के एक सदस्य की मौजूदगी और पावती पर हस्ताक्षर की व्यवस्था भी रखी गई है।
आंगनबाड़ी सहायिका से लेकर डीपीओ तक जिम्मेदारी
पूरी व्यवस्था में निगरानी के लिए जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। आंगनबाड़ी सहायिका भंडारण में सहयोग करेगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता टीएचआर के पैकेट का वजन और गुणवत्ता जांचने के साथ डिजिटल माध्यम से वितरण करेगी। पर्यवेक्षक हर महीने निर्धारित आंगनबाड़ी केंद्रों और स्व-सहायता समूहों के निर्माण स्थल का निरीक्षण करेंगी और इसकी रिपोर्ट सीडीपीओ को देंगी।
सीडीपीओ को निर्धारित अवधि में समीक्षा कर भुगतान का सत्यापन करना होगा, जबकि जिला कार्यक्रम अधिकारी जिला पोषण समिति को मासिक रिपोर्ट भेजेंगे। साथ ही संचालनालय स्तर पर भी डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी की जाएगी।
हर बैच का 500 ग्राम कंट्रोल सैंपल सुरक्षित रखना होगा
पोषण आहार की गुणवत्ता को लेकर भी सख्त व्यवस्था की गई है। प्रत्येक स्व-सहायता समूह को तैयार किए गए हर बैच का 500 ग्राम सीलबंद कंट्रोल सैंपल 30 दिन तक सुरक्षित रखना होगा। सीडीपीओ हर दो महीने में किसी एक समूह का सैंपल रैंडम तरीके से उठा सकेंगे। इसके बाद डीपीओ के माध्यम से सैंपल को FSSAI/NABL मान्यता प्राप्त लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा।
यदि किसी हितग्राही या अन्य स्तर से गुणवत्ता संबंधी शिकायत आती है, तो उसी दिन सैंपल लेकर जांच कराने का प्रावधान है। यदि टीएचआर अमानक पाया जाता है तो जरूरत पड़ने पर संबंधित स्टॉक को वापस लेने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
देरी हुई तो समूह पर आर्थिक चोट
नई व्यवस्था में स्व-सहायता समूहों के लिए समय पर आपूर्ति करना बेहद जरूरी होगा। निर्धारित तारीख से दो दिन से अधिक देरी होने पर तीसरे दिन से प्रतिदिन 2 प्रतिशत की कटौती का प्रावधान है। यह कटौती अधिकतम 10 प्रतिशत तक हो सकती है। यदि आपूर्ति में 10 दिन से ज्यादा की देरी होती है और इसके कारण बच्चों को पोषण आहार नहीं मिल पाता है, तो कलेक्टर वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में निर्धारित अवधि के बाद की गई आपूर्ति का भुगतान नहीं किया जाएगा।
इसी तरह पैकेट में मात्रा कम मिलने पर उसी अनुपात में भुगतान काटा जाएगा। यदि पोषण आहार दूषित या खाने योग्य नहीं पाया गया तो उस पूरी मात्रा का भुगतान नहीं होगा और समूह को अपने खर्च पर खराब माल बदलना पड़ेगा।
तीन बड़ी गलतियां और व्यवस्था से बाहर हो सकता है समूह
अगर किसी समूह की ओर से बार-बार लापरवाही होती है तो कार्रवाई और भी सख्त होगी। तीन बार से अधिक देरी, कम मात्रा या अमानक गुणवत्ता पाए जाने पर संबंधित समूह को इस व्यवस्था से स्थायी रूप से बाहर किया जा सकता है।
इस तरह नई व्यवस्था में केवल पोषण आहार बनाना ही जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि उसकी गुणवत्ता, वजन, समय पर आपूर्ति और वितरण की डिजिटल निगरानी भी समूह और संबंधित विभागीय अधिकारियों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।
अब गांव की रसोई से आंगनबाड़ी तक पहुंचेगा पोषण
कुल मिलाकर शिवपुरी में टीएचआर व्यवस्था ने एक नया मोड़ लिया है। केंद्रीकृत प्लांट से तैयार होकर आंगनबाड़ी तक पहुंचने वाले पोषण आहार की जगह अब स्थानीय स्व-सहायता समूहों को निर्माण व्यवस्था में जोड़ा गया है। इस बदलाव से एक तरफ स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ प्रशासन के सामने चुनौती भी कम नहीं है। हजारों बच्चों और महिलाओं तक पहुंचने वाले पोषण आहार में गुणवत्ता, मात्रा और समय की जरा सी चूक भी सीधे हितग्राहियों को प्रभावित कर सकती है। इसीलिए प्रशासन ने इस नई व्यवस्था में डिजिटल वितरण, फेस रिकग्निशन, फोटो अपलोड, कंट्रोल सैंपल, लैब जांच, नियमित निरीक्षण और आर्थिक दंड जैसी व्यवस्थाओं को जोड़ा है।
.webp)
प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।