शिवपुरी,अचानक 200 परिवारो के निजी मकान हो गए सरकारी घोषित,गंभीर लापरवाही उजागर

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। जिस मकान को आपने एक एक रूपए जोडकर बनाया हो,आपकी आधी से अधिक उम्र इस मकान मे निकल गई हो और आपने इस मकान को बनाने के लिए पीएम आवास योजना के तहत आपने सरकारी मदद ली हो और एक दम से यह आपकी निजी संपत्ति सरकारी हो जाए तो आपके पैरा तले जमीन खिसक जाऐगी।
ऐसा की कुछ हुआ है शिवपुरी जिले में निवास रकने वाले 200 परिवारो के साथ इन 200 परिवारो को अचानक से पता चला कि हम जिस जमीन पर अपना मकान बनाकर वर्षो से निवास कर रहे है  वह जमीन तो भारत सरकार के रेलवे मंत्रालय की है। 

मामला शिवपुरी जिले के बदरवास नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 14 मे निवास करने वाले परिवारा से जुडा हुआ है। बीते रोज रेलवे और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम इन परिवारो के पास पहुंची और कहा कि यह भूमि हमारी है,यह भूमि सन 1985 मे रेलवे ने अधिग्रहण कर ली थी।  टीम ने लोगों को समझाइश देते हुए मकान खाली करने के निर्देश दिए। मकान खाली करने के है कि उन्हें पहली बार पता चला कि जिस भूमि पर उन्होंने अपने मकान बनाए है, वह रेलवे विभाग की है। जानकारी मिलते ही करीब 150 परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया। लोगों का कहना है कि पिछले 24 घंटे से कई घरों में भोजन तक नहीं बना और पूरे क्षेत्र के लोग परेशानी में है।

स्थानीय लोगों की माने तो वे वर्ष 1965 से इस क्षेत्र में निवास कर रहे है। समय के साथ लोगों ने अपने मकान बनाए, बच्चों का पालन. पोषण किया और कई परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिला। किसी ने रजिस्ट्री के आधार पर तो अधिकांश लोगों ने नोटरी के आधार पर मकान बना लिए और वर्षों से में निवास कर रहे है। नगर परिषद के सर्वे नंबर 15, 16, 17, 18, 19 और 20 लगभग 20 बीघा भूमि पर लभग 200 मकान बने हुए है। 

इधर रेलवे विभाग का कहना है कि यह भूमि वर्ष 1985 में अधिग्रहित की जा चुकी थी। अब विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार इस भूमि पर निर्माण कार्य प्रारंभ करने जा रहा है। इसी कारण क्षेत्र को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र के लोग सकते में हैं। उनका कहना है कि यदि मकान हटाए गए कहना यदि मकान गए तो तो नहीं बचेगा। प्रभावित परिवार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से राहत तथा पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

पीएम आवास भी स्वीकृत
वार्ड 14 बारई मार्ग पर रेलवे स्टेशन के समीप करीब 200 मकान है। कुछ परिवारों के पास रजिस्ट्री है, जबकि अधिकांश लोगों ने नोटरी के आधार अधिकांश लोगों ने नोटरी के आधार परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिला और उन्होंने पक्के मकानों का निर्माण कराया।

10 रुपए की नोटरी पर सौदा
रेलवे भूमि विवाद में सामने आए दस्तावेज के अनुसार करीब 10 रुपए के नोटरी स्टाम्प पर पांच लोगों के हस्ताक्षर कर भूमि का विक्रय दर्शाया गया था। इसी नोटरी के आधार पर गिरधारीलाल कुशवाहा द्वारा भूरेलाल चंदेल के नाम जमीन बेचे जाने का चंदेल के नाम जमीन से जाने का आधार बनाकर भूरेलाल ने मकान का निर्माण कराया और वर्षों से परिवार सहित निवास करते रहे। अब रेलवे द्वारा भूमि पर स्वामित्व का दावा करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू किए जाने से नोटरी के आधार पर हुए ऐसे सौदों की वैधता और भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। लगभग 150-200 परिवार बेघर होने की आशंका से चिंतित हैं।

रेलवे व सीआरपीएफ की टीम ने दी समझाइश
रेलवे विभाग व सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षेत्रवासियों से संवाद किया। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि वर्ष 1985 में रेलवे के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है। अब विभाग इस भूमि पर आवश्यक निर्माण कार्य कराएगा, इसलिए सभी लोगों से स्वेच्छा से मकान खाली करने को कहा गया है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में मकान खाली नहीं किए गए तो प्रशासन की सहायता से नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में उपाध्यक्ष नप बदरवास भूपेन्द्र यादव ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है। यदि लगभग 200 मकान मालिक बेघर होते हैं तो यह एक बड़ी सामाजिक और मानवीय समस्या होगी। मामले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समक्ष रखेंगे और प्रभावित परिवारों राहत के लिए आवश्यक पहल करने का आग्रह करेंगे, ताकि सभी प्रभावित परिवारों के हित में समाधान करें।

रेलवे रेलवे लाइन बिछाने के दौरान वर्ष 1985 में संबंधित भूमि का विधिवत अधिग्रहण किया गया था। उस समय प्रचलित दरों के अनुसार प्रभावित भूमि स्वामियों को मुआवजा भी प्रदान किया गया था। वर्तमान में रेलवे को इस भूमि की आवश्यकता है। इसलिए रेलवे एवं सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर वहां बने मकानों में रहने वाले लोगों को समझाइश दी है। उन्हें शीघ्र ही मकान खाली करने की हिदायत दी गई है, ताकि रेलवे विभाग अपनी कार्रवाई कर सके। 
विनोद शर्मा, अधीक्षक रेलवे स्टेशन

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