शिवपुरी। हरियाली अमावस्या केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने और उसे संवारने का अवसर भी है। इसी पर्यावरणीय संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार, 12 अगस्त 2026 को सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय, शिवपुरी में हरियाली अमावस्या उत्साह और पर्यावरण संरक्षण की भावना के साथ मनाई गई।
विद्याभारती मध्यभारत प्रांत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यालय परिसर प्रकृति संरक्षण के संकल्प से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्याभारती मध्यभारत प्रांत के प्रांतीय पर्यावरण संयोजक श्री पवन शर्मा रहे, जबकि मुख्य वक्ता विद्यालय के सह प्रबंधक श्री जितेन्द्र परसाई रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती, ॐ एवं भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसके बाद विद्यालय के प्राचार्य श्री लोकेंद्र सिंह मेवाड़ा ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया। कक्षा 12वीं के भैया हर्षित चौहान एवं प्रविश शर्मा ने अतिथियों का तिलक लगाकर, श्रीफल एवं अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया।
प्रकृति से जुड़ने का पर्व है हरियाली अमावस्या'
मुख्य वक्ता श्री जितेन्द्र परसाई ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए हरियाली अमावस्या के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हरियाली अमावस्या हमें प्रकृति के और करीब आने का अवसर देती है। हमारा जीवन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रकृति पर निर्भर है, इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई को रोकने के साथ ही प्रत्येक शुभ अवसर पर पौधारोपण की परंपरा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे पौधारोपण को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि लगाए गए पौधों को नियमित पानी देकर और उनकी सुरक्षा कर उन्हें वृक्ष बनने तक संभालें।
पौधा लगाना आसान, उसे वृक्ष बनाना असली जिम्मेदारी
श्री परसाई ने विद्यार्थियों को समझाया कि एक पौधा लगाकर फोटो खिंचवा लेना ही पर्यावरण संरक्षण नहीं है। वास्तविक जिम्मेदारी उस समय शुरू होती है, जब पौधे की नियमित देखभाल की जाती है। उन्होंने कहा कि लगाए गए प्रत्येक पौधे को परिवार के सदस्य की तरह संरक्षण देने की आवश्यकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से जल और विद्युत का आवश्यकता के अनुसार उपयोग करने तथा इनके अपव्यय से बचने का भी आह्वान किया। उनका कहना था कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े प्रयासों के साथ-साथ रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव भी बेहद महत्वपूर्ण है।
परिसर में हुआ सामूहिक पौधारोपण
कार्यक्रम के बाद विद्यालय परिसर में पौधारोपण अभियान चलाया गया। इसमें आचार्य परिवार, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने मिलकर विभिन्न स्थानों पर पौधे लगाए और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी लेने का संकल्प किया। पौधारोपण के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर उन्हें यह संदेश भी दिया गया कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करना ही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी।
संस्कृति और पर्यावरण चेतना का संगम
हरियाली अमावस्या के इस आयोजन ने भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को भी सामने रखा। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल किताबों का विषय नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सभी ने प्रकृति संरक्षण, पौधों की देखभाल, जल एवं बिजली की बचत और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आभार प्रदर्शन भैया सिद्धार्थ कौरव ने किया।
इस तरह सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय में मनाई गई हरियाली अमावस्या धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण की एक जीवंत पाठशाला बन गई, जहां विद्यार्थियों ने पौधे लगाने के साथ उन्हें बचाने और बड़ा करने की जिम्मेदारी भी समझी।

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