शिवपुरी। शिवपुरी शहर के जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पर आज एक 12 बच्चों की मां शिकायत लेकर पहुंची, मां का कहना हैं कि वन विभाग के कर्मचारियों की दबंगई दिखाते हुए मुझ गरीब आदिवासी महिला को वन कर्मियों द्वारा पट्टे की जमीन पर खेती करने से जबरन रोका जा रहा है। पीड़ित महिला ने शिवपुरी कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है और वन कर्मियों पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
पट्टे की जमीन पर विवाद
जानकारी के अनुसार निवासी ग्राम कोल्हापुर तहसील पोहरी की रहने वाली धंती आदिवासी पत्नी बावरिया ने बताया कि गांव में उसके नाम पर भूमि स्वामी स्वत्व की कृषि भूमि मौजूद है। इस जमीन का सर्वे नंबर 3 और 83 है, जिसका कुल रकबा 2.16 हेक्टेयर है। पीड़िता का कहना है कि मैं और मेरा परिवार इसी पट्टे की जमीन पर खेती करके भरण-पोषण करती आ रही है। इस जमीन पर वन विभाग का कोई अधिकार नहीं है, फिर भी विभागीय कर्मचारी उसे जबरन रोक रहे हैं।
खेती की तो झूठे केस में फंसा देंगे
पीड़िता का आरोप है कि जब वह अपने खेत पर काम करने जाती है, तो वन विभाग के कर्मचारी उसे डराते-धमकाते हैं। कर्मचारियों ने उसे खुली चेतावनी दी है कि यदि उसने इस जमीन पर हल चलाया या खेती की, तो उसे झूठे आपराधिक मुकदमों में फंसाकर जेल भेज दिया जाएगा। वन कर्मियों के इस रवैये से महिला दहशत में है।
महिला का दर्द,खेती रुकी तो भूखे मर जाएंगे मेरे 12 बच्चे
पीड़िता का कहना हैं कि में बेहद गरीब और बेसहारा आदिवासी महिला है। कृषि और मजदूरी ही उसकी आजीविका का एकमात्र साधन है। मेरे 12 बच्चे हैं, जिनका पेट में इसी जमीन से पालती हूं। महिला ने बताया कि यदि वन विभाग वालों ने उसे खेती करने से रोक दिया, तो उसका पूरा परिवार और उसके 12 बच्चे भूख से तड़प कर मर जाएंगे।
कलेक्टर से की सख्त कार्रवाई की मांग
धंती आदिवासी ने कलेक्टर से अपील की है कि वन विभाग के कर्मचारियों की इस मनमानी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। उसने मांग की है कि उसे अपनी भूमि पर शांतिपूर्वक खेती करने का अधिकार दिलाया जाए और उसे डराने-धमकाने वाले वन विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उसका परिवार सुरक्षित रह सके। प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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