काजल सिकरवार @ शिवपुरी। सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और भक्ति का महीना माना जाता है। शिवालयों में सुबह से ही हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं और श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाएं मांग रहे हैं। इसी आस्था के बीच शिवपुरी जिले की धरती पर एक ऐसा प्राचीन शिवधाम है, जिसकी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान इसे दूसरे शिव मंदिरों से अलग बनाती है।
राजा नल की नगरी नरवर में स्थित चौदह महादेव मंदिर को स्थानीय स्तर पर नरवर का 'शिवलोक' कहा जाता है। खास बात यह है कि यहां एक ही प्रांगण में भगवान शिव के 14 अलग-अलग शिवालय स्थापित हैं। इससे भी ज्यादा अद्भुत यहां का मुख्य शिवलिंग श्री सहशेश्वर महादेव है, जिसकी सतह पर बड़ी संख्या में छोटे-छोटे शिवलिंगों की आकृतियां उकेरी गई हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मुख्य शिवलिंग पर 1008 शिवलिंगों की आकृतियां हैं।
एक शिवलिंग में 1008 शिवलिंगों का दर्शन
चौदह महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका मुख्य शिवलिंग श्री सहशेश्वर महादेव है। काले पत्थर से निर्मित इस शिवलिंग पर बारीकी से अनेक छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं। दूर से देखने पर यह एक सामान्य शिवलिंग नजर आता है, लेकिन पास जाकर देखने पर इसकी पूरी सतह पर बने असंख्य छोटे शिवलिंग श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। मान्यता है कि सहशेश्वर महादेव पर एक लोटा जल चढ़ाने से हजारों शिवलिंगों के जलाभिषेक का पुण्य प्राप्त होता है। यही मान्यता इस मंदिर को श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बनाती है। इस अद्भुत शिवलिंग को प्राचीन शिव तंत्र साधना और धार्मिक परंपरा का प्रतीक भी माना जाता है। हालांकि इन मान्यताओं का धार्मिक महत्व श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है।
13वीं शताब्दी से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
चौदह महादेव मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि नरवर के गौरवशाली इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर भी है। उपलब्ध स्थानीय ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में प्रारंभ हुआ था। बताया जाता है कि नरवर के राजा चाहड़ देव, गणपति देव और गोपाल देव के कालखंड से इस मंदिर का संबंध रहा है। मंदिर में शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा 2 अक्टूबर 1298 ईस्वी को पाल्हदवे कायस्थ के पौत्र द्वारा कराए जाने का उल्लेख मिलता है। करीब सात शताब्दियों से अधिक समय का इतिहास समेटे यह मंदिर आज भी नरवर की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
एक आंगन में 14 शिवालय
मंदिर परिसर की सबसे खास बात यह है कि यहां भगवान शिव के 14 अलग-अलग शिवालय एक ही प्रांगण में स्थित हैं। श्रद्धालु एक-एक करके सभी शिवालयों के दर्शन करते हुए परिक्रमा करते हैं।
श्री सहशेश्वर जी,श्री नागेश्वर जी,श्री अखिलेश्वर जी,श्री भूतेश्वर जी,श्री भुवनेश्वर जी,श्री पंचमुखेश्वर जी एवं पशुपतिनाथ जी,श्री नलेश्वर जी,श्री सिद्धेश्वर जी,श्री जलेश्वर जी,श्री गंगेश्वर जी,श्री महेश्वर जी,श्री मणिकेश्वर जी,श्री विश्वेश्वर जी और श्री इंद्रेश्वर जी महादेव। हर शिवालय की अपनी धार्मिक पहचान है और श्रद्धालु सावन में इन सभी शिवस्वरूपों के दर्शन कर पुण्य लाभ की कामना करते हैं।
प्रवेश द्वार पर गणेश, बाहर हनुमान और बीच में विशाल नंदी
चौदह महादेव मंदिर का धार्मिक स्वरूप केवल शिवालयों तक ही सीमित नहीं है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमा श्रद्धालुओं का स्वागत करती है। परिसर में भगवान हनुमान जी का मंदिर भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर परिसर के मध्य में विशाल नंदी महाराज विराजमान हैं। शिवालय में प्रवेश करने से पहले नंदी के दर्शन करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मंदिर के दूसरे प्रवेश द्वार पर काल भैरव की प्रतिमा भी स्थापित है। मान्यता में उन्हें शिवधाम का रक्षक माना जाता है। काल भैरव के दर्शन के बाद श्रद्धालु मंदिर के भीतर प्रवेश कर चौदह शिवालयों की परिक्रमा शुरू करते हैं।
विशाल सरोवर और प्राचीन स्थापत्य बढ़ाते हैं सुंदरता
यह प्राचीन मंदिर एक विशाल सरोवर के समीप स्थित है। मंदिर की स्थापत्य शैली और पत्थरों पर की गई नक्काशी इसके प्राचीन वैभव की झलक दिखाती है। परिसर में 16 खंभों वाली छतरी भी बताई जाती है, जिसमें भगवान इंद्रेश्वर की प्रतिमा स्थापित है। विशाल नंदी की छतरी, प्राचीन पत्थर की संरचनाएं, मंदिर के आसपास का सरोवर और चौदह शिवालय मिलकर इस पूरे परिसर को धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से खास बना देते हैं।
सावन में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़
सावन शुरू होते ही नरवर के चौदह महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। सुबह से ही मंदिर परिसर में भगवान शिव के जयकारे सुनाई देते हैं। श्रद्धालु अलग-अलग शिवालयों में जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेते हैं।
खासकर सहशेश्वर महादेव के अद्भुत शिवलिंग को देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। एक ही शिवलिंग पर उकेरी गई सैकड़ों शिवलिंगों की आकृतियां इस मंदिर को अनूठा धार्मिक आकर्षण प्रदान करती हैं।
नगर गौरव दिवस पर भी सजा नरवर
चौदह महादेव मंदिर नरवर की धार्मिक पहचान के साथ-साथ नगर के गौरव से भी जुड़ा है। इसी मंदिर परिसर में नगर परिषद नरवर द्वारा भव्य आयोजन और नगर गौरव दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में करैरा के पूर्व विधायक जसवंत जाटव, करेरा जनपद पंचायत अध्यक्ष पुष्पेंद्र जाटव, इंजीनियर गोपाल पाल, नरवर तहसीलदार अमित दुबे, शन सिंह रावत सहित भाजपा कार्यकर्ता और अन्य लोग मौजूद रहे।
आस्था, इतिहास और स्थापत्य का संगम
नरवर का चौदह महादेव मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और स्थापत्य कला का संगम है। एक ही परिसर में 14 शिवालय, मुख्य सहशेश्वर महादेव पर उकेरी गई 1008 शिवलिंगों की आकृतियां, विशाल नंदी, गणेश और हनुमान मंदिर, काल भैरव की प्रतिमा और प्राचीन स्थापत्य—ये सभी मिलकर इस धाम को अलग पहचान देते हैं।
सावन के महीने में जब देशभर के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, तब नरवर का यह प्राचीन शिवलोक भी श्रद्धा से भर उठता है। जहां एक शिवलिंग में हजारों शिवलिंगों का स्वरूप दिखाई देता है, वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव की आराधना का अनुभव निश्चित रूप से अनूठा बन जाता है।


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