शिवपुरी। बिजली के बढ़ते बिल, घर-घर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर और मेंटेनेंस के नाम पर होने वाली बिजली कटौती के बीच शिवपुरी में बिजली व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ही तरह की दो घटनाओं ने महज 18 दिनों के अंतर में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। पहले फिजिकल थाना क्षेत्र में करंट दौड़ते बिजली के खंभे की चपेट में आने से 35 वर्षीय मजदूर की मौत हो गई और अब गांधी पार्क में क्रिकेट खेल रहा 13 वर्षीय बालक हाईमास्ट पोल में दौड़ रहे करंट से चिपक गया।
दूसरी घटना में बालक के साथी की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। उसने क्रिकेट के बल्ले की मदद से बालक को पोल से अलग किया। यदि उस समय कोई साथी मौजूद नहीं होता या समय रहते मदद नहीं मिलती, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकता था। इन दोनों घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बिजली विभाग लगातार मेंटेनेंस और तकनीकी व्यवस्था को दुरुस्त रखने की बात करता है, तो सार्वजनिक स्थानों पर बिजली के खंभों में करंट कैसे दौड़ रहा है?
गांधी पार्क में क्रिकेट खेलते समय पोल से चिपका 13 साल का बालक
रविवार सुबह शिवपुरी के गांधी पार्क में बच्चे रोज की तरह क्रिकेट खेल रहे थे। इसी दौरान उनकी गेंद हाईमास्ट पोल के पास चली गई। हनुमान कॉलोनी निवासी 13 वर्षीय आदित्य धाकड़ गेंद उठाने के लिए पोल के पास पहुंचा ही था कि अचानक उसे करंट लग गया। करंट का झटका लगते ही आदित्य पोल से चिपक गया। यह देखकर उसके साथ खेल रहे बच्चे घबरा गए, लेकिन एक साथी ने तत्काल सूझबूझ दिखाई और क्रिकेट के बल्ले की मदद से आदित्य को पोल से अलग कर दिया। इसके बाद वहां मौजूद लोगों की मदद से बालक को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया गया।
लोगों का दावा- तीन-चार दिन से पोल में दौड़ रहा था करंट
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गांधी पार्क के इस हाईमास्ट पोल में पिछले तीन-चार दिनों से करंट दौड़ रहा था। लोगों को इसकी जानकारी होने के बावजूद समय रहते समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने का आरोप लगाया गया। घटना के बाद नगर पालिका का दल मौके पर पहुंचा और हाईमास्ट पोल में दौड़ रहे करंट को ठीक कराया। यहां सवाल यह उठ रहा है कि यदि पोल में कई दिनों से करंट था, तो उसे हादसा होने से पहले दुरुस्त क्यों नहीं किया गया?
18 दिन पहले खंभे ने ली थी मजदूर की जान
गांधी पार्क की घटना से करीब 18 दिन पहले फिजिकल थाना क्षेत्र की झिंगुरा बस्ती में बिजली के खंभे में दौड़ रहे करंट ने 35 वर्षीय मजदूर दिनेश कुशवाह की जान ले ली थी। दिनेश पुट्टी का काम करता था। मंगलवार शाम वह काम से अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान आईपीएस स्कूल के पास लगे बिजली के खंभे के संपर्क में आते ही उसे जोरदार करंट लगा और वह मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा। लोगों ने डंडे की मदद से उसे खंभे से अलग किया। परिजन तत्काल उसे शिवपुरी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप था, पहले भी कई बार दौड़ चुका था करंट
दिनेश की मौत के बाद उसके भाई मुकेश कुशवाह ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि जिस खंभे में दिनेश को करंट लगा, उसमें पहले भी कई बार करंट दौड़ चुका था। परिवार की ओर से विभाग को इसकी शिकायत किए जाने का भी दावा किया गया। परिजनों के मुताबिक, परिवार के अन्य सदस्य और आसपास के लोग भी पहले इस खंभे के करंट की चपेट में आ चुके थे, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
दिनेश अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया। उसकी मौत के बाद परिवार ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की थी। मामले में फिजिकल थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी।
एक हादसे में मौत, दूसरे में बालक की जान पर बनी
दोनों घटनाओं को एक साथ देखें तो तस्वीर चिंताजनक नजर आती है। एक ओर खंभे में करंट आने से एक परिवार का कमाने वाला सदस्य दुनिया से चला गया, वहीं दूसरी ओर उसी तरह की लापरवाही का आरोप लगने के कुछ ही दिनों बाद एक मासूम बालक करंट की चपेट में आ गया।
फर्क सिर्फ इतना रहा कि गांधी पार्क में बच्चे के साथी की सतर्कता ने समय रहते उसे पोल से अलग कर दिया और एक बड़ा हादसा टल गया।
सवाल स्मार्ट मीटर से ज्यादा स्मार्ट सुरक्षा का
बिजली विभाग द्वारा स्मार्ट मीटर और आधुनिक तकनीक पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच शहर के सार्वजनिक स्थानों और रास्तों पर लगे बिजली के खंभों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उपभोक्ताओं के मन में अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बिजली व्यवस्था को स्मार्ट बनाने के साथ क्या सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही स्मार्ट की जा रही है। मेंटेनेंस के नाम पर बिजली बंद करने और उपभोक्ताओं से बढ़े हुए बिल वसूलने के साथ विभाग की सबसे पहली जिम्मेदारी यह होनी चाहिए कि सड़क, कॉलोनी, पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर लगे बिजली के खंभे लोगों के लिए खतरा न बनें।
क्या हादसे के बाद ही जागेगा सिस्टम?
गांधी पार्क की घटना के बाद पोल को दुरुस्त कर दिया गया, लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि तीन-चार दिन से करंट होने की जानकारी थी तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई? और इससे भी बड़ा सवाल यह है कि शिवपुरी में ऐसे कितने बिजली के खंभे हैं, जिनमें करंट रिसाव की समस्या हो सकती है?
18 दिन पहले एक मजदूर की जान जा चुकी है। अब एक 13 वर्षीय बालक करंट की चपेट में आया है। दोनों घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि बिजली विभाग के लिए स्मार्ट मीटर जरूरी हैं, लेकिन उससे कहीं ज्यादा जरूरी लोगों की जिंदगी की सुरक्षा है।

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