शिवपुरी। जिले के करीब 2500 सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की अकादमिक मॉनिटरिंग व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। जनपद शिक्षा केंद्रों में विषयवार बीएसी (विकासखंड अकादमिक समन्वयक) और जनशिक्षा केंद्रों में सीएसी (संकुल अकादमिक समन्वयक) के कई पद लंबे समय से खाली हैं। इन रिक्त पदों को भरने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने बाकायदा पूरी टाइमलाइन जारी की थी, लेकिन शिवपुरी जिले में तय कार्यक्रम के अनुसार प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
हालात यह हैं कि 15 जुलाई से शुरू होने वाली प्रक्रिया में न तो समय पर वरिष्ठता सूची जारी हुई और न 5 अगस्त को प्रस्तावित काउंसलिंग हो सकी। अब तय समयसीमा निकल जाने के बाद विभागीय स्तर पर प्रक्रिया जल्द पूरी करने की बात कही जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब राज्य स्तर से नियुक्ति की पूरी समय-सारिणी पहले ही जारी कर दी गई थी, तो जिले में उस पर समय रहते अमल क्यों नहीं हुआ?
15 जुलाई से शुरू होनी थी प्रक्रिया
राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा बीएसी और सीएसी के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत 15 जुलाई तक जिला शिक्षा अधिकारी को शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जारी करनी थी। इसके बाद 25 जुलाई तक वरिष्ठता के आधार पर विषयवार मेरिट सूची तैयार की जानी थी। इसके बाद 5 अगस्त को जिला स्तर पर काउंसलिंग प्रस्तावित थी। काउंसलिंग में वरिष्ठता और निर्धारित पात्रता के आधार पर शिक्षक बीएसी के रिक्त पदों के लिए विकासखंड का चयन कर सकते थे। इसके बाद अगस्त में अंतिम चयन सूची जारी करने और 20 अगस्त तक कलेक्टर के अनुमोदन के बाद जिला पंचायत के सीईओ स्तर से नियुक्ति आदेश जारी करने का कार्यक्रम निर्धारित बताया गया था। लेकिन निर्धारित तारीखें गुजरती चली गईं और जिले में प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी।
हर विकासखंड में पांच बीएसी पद
शिवपुरी जिले में कुल आठ विकासखंड हैं। प्रत्येक विकासखंड में विषयवार बीएसी के पांच पद निर्धारित हैं। इनमें विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषा विषय से जुड़े पद शामिल हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र शिक्षकों को वरिष्ठता एवं निर्धारित नियमों के आधार पर इन पदों पर नियुक्त किया जाना है। बीएसी का काम केवल कार्यालय तक सीमित नहीं है। उन्हें संबंधित विकासखंड के स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी, शिक्षकों को अकादमिक सहयोग और विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है। ऐसे में इन पदों का खाली रहना सीधे तौर पर स्कूलों की अकादमिक मॉनिटरिंग व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
सीएसी के पद भी खाली
बीएसी के साथ-साथ जनशिक्षा केंद्रों पर सीएसी के पद भी खाली हैं। योजना के अनुसार करीब 21 स्कूलों पर एक जनशिक्षक की नियुक्ति की जानी है और प्रत्येक जनशिक्षा केंद्र में दो जनशिक्षकों के पद निर्धारित हैं। जिले में बड़ी संख्या में सीएसी के पद भी रिक्त बताए जा रहे हैं। हाल ही में करीब दो दर्जन सीएसी की प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने के बाद भी कई पद खाली रह गए हैं। इन पदों पर उच्च श्रेणी शिक्षक अथवा माध्यमिक शिक्षक स्तर के पात्र शिक्षकों से नियुक्ति की जानी है।
पुराने बीएसी-सीएसी का कार्यकाल पूरा
जिले के कई जनपद शिक्षा केंद्रों में पहले से कार्यरत बीएसी का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें पद से हटाया गया है। इसके चलते कई विकासखंडों में पद रिक्त हो गए हैं। इसी तरह सीएसी के पदों पर भी प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी होने के कारण रिक्तियां बनी हुई हैं। ऐसे में नई नियुक्तियां समय पर नहीं होने से अकादमिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रभावित होने की आशंका है।
मॉनिटरिंग प्रभावित हुई तो स्कूलों पर पड़ेगा असर
बीएसी और सीएसी स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि लंबे समय तक ये पद खाली रहे तो स्कूलों में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी, योजनाओं का क्रियान्वयन और शिक्षकों को मिलने वाला अकादमिक सहयोग प्रभावित हो सकता है। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में इन अकादमिक समन्वयकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अधिकारी बोले- 12 अगस्त तक प्रक्रिया पूरी करेंगे
इस मामले में डीएस सिकरवार, डीपीसी, शिवपुरी का कहना है कि बीएसी और सीएसी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि 12 अगस्त तक प्रक्रिया पूरी कर काउंसलिंग कराने का प्रयास किया जाएगा। उनके अनुसार विभागीय स्तर पर इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। हालांकि सवाल यह है कि जब राज्य शिक्षा केंद्र ने पहले ही पूरी टाइमलाइन निर्धारित कर दी थी, तो जिले में प्रक्रिया तय तारीखों के मुताबिक क्यों नहीं हो सकी।
अब देखना होगा नियुक्तियां कब तक होती हैं
राज्य स्तर की तय समय-सारिणी के मुताबिक नियुक्ति प्रक्रिया को अब तक काफी आगे बढ़ जाना चाहिए था। लेकिन शिवपुरी में वरिष्ठता सूची और काउंसलिंग समय पर नहीं होने के कारण पूरी प्रक्रिया पिछड़ गई है। अब विभाग 12 अगस्त तक प्रक्रिया पूरी करने का दावा कर रहा है। ऐसे में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रिक्त बीएसी और सीएसी पदों पर नियुक्ति कब तक हो पाती है और क्या विभाग संशोधित समयसीमा के भीतर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दे पाता है। क्योंकि मामला केवल पद भरने का नहीं है—इन पदों पर तैनात होने वाले अकादमिक समन्वयकों के कंधों पर जिले के हजारों सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी भी है।

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