शिवपुरी। शिवपुरी जिले मे करोडो के विकास करने वाली मध्यप्रदेश सरकार के पास बच्चो के भविष्य के लिए बजट का टोटा है,शिक्षा विभाग ने 2 साल पूर्व मे सर्वे कराकर शासन का रिर्पोट भेजी थी जिले में चार सैकड़ा से अधिक जर्जर प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए बजट मांग पत्र भेजा था,लेकिन बजट मिला केवल 96 स्कूलो के लिए।
इस मामले मे सबसे हैरानी वाली बात यह है कि जिले के पांचो विधानसभा मे स्कूल के भवन जर्जर है,किसी भी विधायक ने इस मामले को गंभीरता से नही लिया और सरकार से स्कूलो के लिए बजट लाने के लिए प्रयास नही किए,वर्तमान समय की बात करे तो सिंधिया के सिपाही कोलारस विधायक महेन्द सिंह यादव की विधानसभा क्षेत्र के स्कूल सबसे जर्जर है।
2 साल पूर्व भेजा गया था डीपीसी कार्यालय शिवपुरी से प्रस्ताव
शिवपुरी डीपीसी कार्यालय से भेजे गए प्रस्ताव के बाद शासन स्तर से इनमें से महज 96 स्कूलों की मरम्मत के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इसके विरुद्ध शुरुआती तौर पर करीब 75 लाख रुपये की राशि ही जारी हो सकी। सीमित बजट के कारण इन स्कूलों में भी मरम्मत का काम पूरी तरह नहीं हो सका। अब अगस्त में पुराने स्वीकृत बजट में से करीब 50 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की गई है। इसके बावजूद करीब 25 लाख रुपये की राशि अभी भी शेष बताई जा रही है।
313 स्कूल 2 साल से अपनी सर्विस के लिए इतंजार कर रहे हैं
स्थिति यह है कि 313 स्कूल ऐसे हैं, जो दो साल से अधिक समय से मरम्मत के लिए बजट का इंतजार कर रहे हैं। इन स्कूलों में कहीं छत जर्जर है तो कहीं दीवारों और फर्श की हालत खराब है। बारिश के मौसम में समस्या और बढ़ जाती है। पानी टपकने के कारण बच्चों को कक्षाओं के अंदर बैठाना मुश्किल हो जाता है और कई जगह उन्हें वैकल्पिक स्थानों या खुले में पढ़ाना पड़ता है।
छह महीने पहले भेजे 280 स्कूलों के प्रस्ताव में भी सिर्फ 49 को मंजूरी
जर्जर भवनों की स्थिति को देखते हुए डीपीसी कार्यालय ने करीब छह महीने पहले शासन को 280 स्कूलों की मरम्मत का प्रस्ताव भेजा था। उम्मीद थी कि इस बार बड़ी संख्या में स्कूलों को बजट मिल जाएगा, लेकिन शासन स्तर से इनमें से भी महज 49 स्कूलों की मरम्मत की स्वीकृति मिली है। इन स्कूलों के लिए राशि कब जारी होगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों पर पड़ रहा है। बारिश के दौरान जर्जर भवनों में कक्षाएं लगाना जोखिम भरा हो जाता है। कई स्कूलों में भवन की हालत इतनी खराब है कि शिक्षक बच्चों को सुरक्षित स्थान पर बैठाकर पढ़ाने को मजबूर हैं।
बदरवास, कोलारस और खनियाधाना में हालत ज्यादा खराब
डीपीसी कार्यालय द्वारा जिले के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल भवनों का सर्वे कराया गया था। सर्वे में कोलार विधानसभा के बदरवास, कोलारस और पिछोर विधानसभा के खनियाधाना और करैरा विधानसभा के नरवर ब्लॉक में कई स्कूलों की स्थिति बेहद खराब सामने आई है। बदरवास क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सीहोरा, खैराई, गीतखेड़ा और ढेकुआ जैसे स्कूलों में भवनों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। कुछ स्थानों पर तो स्कूल भवन की छत तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसके बावजूद इन भवनों की मरम्मत का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
इसी तरह पिछोर के बरवटपुरा, प्रेमनगर, पाली, उदयपुरा, हरिनगर और बरखेड़ा सहित नरवर के कैखोदा, भटपरा और आदिवासी का टपरा जैसे स्कूल भवन भी जर्जर स्थिति में बताए गए हैं। करैरा क्षेत्र के पीएस कन्या दिनारा और जीपीएस सहरया सहित कई स्कूलों में भी भवनों की स्थिति सुधार की मांग कर रही है।
कहीं छत नहीं, कहीं खुले में पढ़ाई
जिले के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जर्जर स्कूल भवनों की समस्या का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। कई जगह भवन की हालत ऐसी है कि बच्चों को क्षतिग्रस्त कमरों में बैठाने के बजाय खुले या वैकल्पिक स्थान पर कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। बारिश के दिनों में यह परेशानी और गंभीर हो जाती है। स्कूल परिसर में पानी भरने, छत से पानी टपकने और दीवारों के कमजोर होने से शिक्षक और अभिभावक दोनों चिंतित हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ स्कूल भवनों की मरम्मत का नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने का भी है।
1.80 करोड़ रुपये से बनेंगे चार नए स्कूल भवन
पुराने जर्जर भवनों की मरम्मत के बीच इस बार जिले को चार नए स्कूल भवनों की सौगात भी मिली है। भोपाल स्तर से शिवपुरी जिले में चार स्थानों पर नए प्राथमिक स्कूल भवनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इनमें कमालपुर शासकीय प्राथमिक विद्यालय, पिछोर के लिए 43.26 लाख रुपये, शासकीय प्राथमिक विद्यालय सुनारी के लिए 43.26 लाख रुपये, शासकीय प्राथमिक विद्यालय सीहोर के लिए 43.26 लाख रुपये और सिंहनिवास प्राथमिक स्कूल के लिए 51 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन चारों भवनों के निर्माण पर करीब 1.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बताया जा रहा है कि इन भवनों के लिए राशि अगस्त के अंतिम दिनों में जारी हो सकती है। खास बात यह है कि इन नए भवनों का निर्माण इस बार स्कूल प्रबंधन समिति या डीपीसी कार्यालय के माध्यम से नहीं, बल्कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा कराया जाएगा।
बजट आते ही शेष स्कूलों की मरम्मत का दावा
डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार का कहना है कि पुराने प्रस्ताव के तहत काफी प्रयासों के बाद करीब 50 लाख रुपये की राशि और प्राप्त हुई है। इससे पहले स्वीकृत स्कूलों में मरम्मत का काम कराया जा रहा है। इसके अलावा जिले में चार नए स्कूल भवनों की स्वीकृति मिली है। राशि उपलब्ध होते ही इनका निर्माण शुरू कराया जाएगा।

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