करैरा। करैरा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत श्योपुरा में सरकारी जमीन के सर्वे नंबरों में कथित हेरफेर कर खेल परिसर के लिए आरक्षित भूमि पर मुक्तिधाम बनाने की कोशिश का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की सतर्कता और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के चलते निर्माण कार्य बीच में ही रुकवा दिया गया। अब राजस्व और पुलिस प्रशासन पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश शासन ने ग्राम श्योपुरा में मुक्तिधाम निर्माण के लिए सर्वे नंबर 14 और 15 को विधिवत स्वीकृत किया है। शासन स्तर से इसी भूमि के लिए राशि और स्थान भी निर्धारित किए गए हैं। इसके बावजूद कुछ लोगों ने कथित रूप से सर्वे नंबर 11 पर मुक्तिधाम का निर्माण शुरू कर दिया।
सबसे अहम बात यह है कि सर्वे नंबर 11 श्रीमंत माधवराव सिंधिया खेल परिसर के लिए आरक्षित शासकीय भूमि है। इस जमीन का उद्देश्य गांव के युवाओं के लिए खेल सुविधाओं का विकास करना है। ऐसे में यहां मुक्तिधाम का निर्माण शुरू होने से ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई।
ग्रामीणों ने दिखाई सजगता, प्रशासन को दी सूचना
जब गांव के जागरूक नागरिकों ने खेल मैदान की जमीन पर ईंटें लगाकर नींव तैयार होते देखी तो उन्होंने इसकी शिकायत प्रशासन से की। शिकायत मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल ग्राम पटवारी को मौके पर जांच के लिए भेजा। जांच के दौरान पटवारी ने पाया कि शिकायत सही है और सर्वे नंबर 11 पर ही निर्माण कार्य चल रहा था। पटवारी ने मौके पर मौजूद लोगों को समझाया कि शासन ने मुक्तिधाम के लिए सर्वे नंबर 14 और 15 स्वीकृत किए हैं, जबकि सर्वे नंबर 11 खेल परिसर के लिए सुरक्षित भूमि है। इसलिए यहां निर्माण पूरी तरह गलत और नियमों के विपरीत है।
पटवारी से अभद्रता का आरोप
बताया जा रहा है कि समझाइश देने के दौरान मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने पटवारी की बात मानने के बजाय उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि गाली-गलौज कर उन्हें मौके से वापस लौटने पर मजबूर कर दिया गया। इसके बाद पटवारी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी।
राजस्व और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर भेजी। टीम ने पहुंचते ही खेल परिसर की जमीन पर चल रहे निर्माण कार्य को बंद करा दिया। फिलहाल मौके पर निर्माण पूरी तरह रोक दिया गया है और स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
दोषियों पर होगी कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा स्वीकृत स्थल के अलावा किसी अन्य सरकारी भूमि पर मुक्तिधाम का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही खेल परिसर की आरक्षित भूमि पर कब्जे की कोशिश करने और शासकीय कर्मचारी के साथ कथित अभद्रता करने वालों के खिलाफ जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर सरकारी जमीनों के संरक्षण और विकास कार्यों में पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। यदि ग्रामीण समय रहते शिकायत नहीं करते तो युवाओं के खेल परिसर के लिए सुरक्षित भूमि पर स्थायी निर्माण हो सकता था, जिससे भविष्य में खेल सुविधाओं के विकास पर असर पड़ता।
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