अनिल कुशवाह @ शिवपुरी। हम उस नए और आधुनिक भारत में जी रहे हैं जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर शान से अपना झंडा गाड़ रहा है। हम गगनयान की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन हकीकत के धरातल पर विकास आज भी किसी गांव के श्मशान घाट की टूटी हुई टीनशेड से टपकते पानी में बह रहा है। विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल शिवपुरी शहर से मात्र 7 किलोमीटर दूर नौहरी गांव में उस वक्त खुल गई, जब भारी बारिश के बीच दो शवों को अंतिम विदाई देने के लिए परिजनों को जद्दोजहद करनी पड़ी।
हिंदू सनातनी संस्कृति में जन्म से लेकर मृत्यु तक के 16वें (अंतिम) संस्कार को सबसे पवित्र माना जाता है, जिसमें घी और कपूर से चिता को अग्नि दी जाती है। लेकिन, सिस्टम की नाकामी देखिए कि यहां परिजनों को घी-कपूर की जगह पेट्रोल, और लकड़ियों की जगह रबर के टायरों का सहारा लेना पड़ा। घंटों तक बारिश का पानी चिता को भिगोता रहा और सिस्टम हमारी संवेदनाओं पर हंसता रहा।
नगर पालिका से सटी पंचायत का ये है हाल
शिवपुरी नगर पालिका की सीमा से लगी हुई ग्राम पंचायत नौहरी कला में आज दो परिवारों में गमी हो गई। सुबह से ही शहर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश हो रही थी, जो दोपहर 2 बजे तक जारी रही। इसी बीच गांव की 70 वर्षीय विधो कुशवाह (पत्नी हरि सिंह कुशवाह) का बीमारी के चलते निधन हो गया। जब परिजन नम आंखों से शव लेकर गांव के श्मशान घाट पहुंचे, तो वहां बदइंतजामी उनका मुंह चिढ़ा रही थी।
तिरपाल, टायर और पेट्रोल से हुआ अंतिम संस्कार
श्मशान घाट की टीनशेड टूटी हुई थी, जिससे बारिश का पानी सीधे चिता पर गिर रहा था। बरसते पानी के बीच परिजनों ने पहले तो चिता के ऊपर तिरपाल तानकर उसे बचाने का प्रयास किया। हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार घी और कपूर डालकर आग लगाने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन लकड़ियां गीली होने के कारण आग नहीं भड़क सकी। जब घंटों की मशक्कत के बाद भी सफलता नहीं मिली, तो मजबूरन परिजनों को रबर के टायर, ट्यूब और पेट्रोल छिड़ककर इस पवित्र 16वें संस्कार को पूरा करना पड़ा।
एक ही दिन में दो परिवारों ने झेली यह जलालत
यह दुर्भाग्य केवल विधो कुशवाह के परिवार का नहीं था। इसी दिन गांव की नीतू कुशवाह (पत्नी शिशुपाल कुशवाह) का भी बीमारी के चलते निधन हो गया था। उनके अंतिम संस्कार के वक्त भी परिजनों और ग्रामीणों को इसी अमानवीय परेशानी का सामना करना पड़ा। टूटी टीनशेड से टपकते पानी के बीच नीतू कुशवाह की चिता को भी पेट्रोल छिड़ककर ही अग्नि के हवाले किया गया।
सरपंच के झूठे आश्वासन, 15 दिन से नहीं ली सुध
यह हालात अचानक पैदा नहीं हुए हैं। गांव के रहने वाले अरविंद कुशवाह ने बताया कि आज से लगभग 15 दिन पूर्व भी एक अन्य अंतिम संस्कार में ग्रामीणों को ठीक इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा था। उस वक्त ग्राम पंचायत के सरपंच को इस गंभीर समस्या की सूचना दी गई थी। सरपंच ने तब आश्वासन दिया था कि टीनशेड को तत्काल दुरुस्त करवा दिया जाएगा, लेकिन वह वादा हवा-हवाई साबित हुआ। नतीजा यह है कि शोक में डूबे परिवारों को अपनों की अंतिम विदाई में भी इस तरह की जलालत झेलनी पड़ रही है।
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