शिवपुरी। मप्र के तत्कालिन सीएम शिवराज सिंह चौहान की सन 2023 की घोषणा को सरकर अब अमलीजामा पहनाने की तैयार करने मे जुटी है। शिवपुरी जिले के करैरा विधानसभा की दिनारा पंचायत अब पंचायत ना होकर नगर पंचायत की श्रेणी मे आने वाली है। दिनारा को नगर पंचायत की सीमाए प्रदान करने के लिए एक दर्जन के गांव इसमे समाहित किए जाऐगें। अब इन गांवो मे निवास करने वाले लोग पंच सरपंच नही पार्षद और अध्यक्ष का चुनाव करेगें।
राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय निकायों के कार्यकाल से जुड़ी जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपडेट कर दी है। इसके साथ ही वर्ष 2027 में होने वाले चुनावों की तस्वीर भी धीरे-धीरे साफ होने लगी है। खास बात यह है कि दिनारा को नगर पंचायत बनाए जाने के बाद शिवपुरी जिले में नगरीय निकायों की संख्या 11 से बढ़कर 12 हो जाएगी।
दिनारा नगर पंचायत में दिनारा के साथ आसपास के 12 राजस्व गांवों को शामिल किया गया है। यानी इन गांवों की पंचायत व्यवस्था खत्म होकर अब शहरी निकाय व्यवस्था लागू होगी। हालांकि चुनाव की तारीख, आरक्षण और मतदाता सूची को लेकर अभी औपचारिक प्रक्रिया बाकी है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कार्यकाल की जानकारी अपडेट किए जाने के बाद चुनावी तैयारियों का रास्ता साफ हो गया है।
2027 में 12 नगरीय निकायों में चुनाव
वर्तमान में शिवपुरी जिले में 11 नगरीय निकाय हैं। वर्ष 2027 में दिनारा नगर पंचायत के रूप में नया नगरीय निकाय जुड़ने के बाद यह संख्या 12 हो जाएगी। इसके साथ ही जिले में होने वाले आगामी नगरीय निकाय चुनावों का दायरा भी बढ़ जाएगा। दिनारा में पहली बार नगर पंचायत का चुनाव होगा। यहां अब मतदाता पंच-सरपंच नहीं, बल्कि अपने-अपने वार्ड से पार्षद चुनेंगे और नगर पंचायत के लिए अध्यक्ष का चुनाव होगा। यह बदलाव केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दिनारा और इससे जुड़े गांवों की प्रशासनिक व्यवस्था में भी बड़ा परिवर्तन होगा।
शिवराज की घोषणा के बाद शुरू हुई थी प्रक्रिया
दिनारा को नगर पंचायत बनाने की घोषणा वर्ष 2023 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी। घोषणा के बाद प्रशासनिक स्तर पर नगर पंचायत गठन की प्रक्रिया शुरू हुई।इसके बाद दिसंबर 2025 में प्रशासन ने दिनारा सहित आसपास के 12 राजस्व गांवों को शामिल करते हुए नगर पंचायत गठन की अधिसूचना जारी की। इसके साथ ही दिनारा को ग्रामीण पंचायत व्यवस्था से निकालकर नगरीय निकाय के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
नगर पंचायत में शामिल किए गए गांवों में दिनारा, गौरा, बदस्खा, दबरा दिनारा, जरगंवा अव्वल, चंदावरा, दाबरदेही, अम्बारी, अलगी, आवास, सेवढ़ीकला और सेवढ़ीखुर्द शामिल हैं। अब इन गांवों के लोगों के लिए खास होगा क्यो कि वह अब पंच और सरपंच का नही चुनेगें क्योंकि वे पहली बार नगर पंचायत की चुनावी व्यवस्था में हिस्सा लेंगे।
अभी आरक्षण और मतदाता सूची का इंतजार
हालांकि चुनाव की तस्वीर सामने आने लगी है, लेकिन दिनारा में चुनाव के लिए अभी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं। अभी तक वार्डों का आरक्षण नहीं हुआ है और मतदाता सूची भी तैयार नहीं हुई है। वार्ड गठन, मतदाता सूची का पुनरीक्षण और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन सा वार्ड किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा और अध्यक्ष पद का आरक्षण किस श्रेणी में आएगा। यही प्रक्रिया स्थानीय राजनीति में भी हलचल पैदा करेगी। नगर पंचायत बनने के बाद अब दिनारा क्षेत्र में ऐसे चेहरे भी सक्रिय हो सकते हैं जो पारंपरिक पंचायत चुनाव के बजाय नगरीय राजनीति में अपनी जमीन तलाशेंगे।
नरवर सबसे अहम, मार्च 2027 में खत्म होगा कार्यकाल
जिले में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा दिलचस्प स्थिति नरवर नगर पंचायत की है। नरवर का कार्यकाल जिले के बाकी नगरीय निकायों की तुलना में करीब पांच महीने पहले समाप्त हो जाएगा। नरवर में चुनाव प्रक्रिया 6 मार्च 2022 को पूरी हुई थी और 17 मार्च को नगर पंचायत की पहली बैठक हुई थी। इसके अनुसार नगर पंचायत का कार्यकाल 16 मार्च 2027 को समाप्त होने की स्थिति में है।वहीं शिवपुरी नगर पालिका सहित जिले की अन्य नगर पंचायतों का कार्यकाल अगस्त 2027 में समाप्त होगा। ऐसे में यदि प्रदेश में सभी नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की स्थिति बनती है और नरवर में मार्च से पहले चुनाव नहीं होते हैं तो वहां **प्रशासक नियुक्त करने की स्थिति बन सकती है। सरकार के सामने कार्यकाल से जुड़े वैधानिक विकल्प भी रहेंगे।
दिसंबर से नरवर में मतदाता सूची की कवायद संभव
नरवर का कार्यकाल मार्च 2027 में खत्म होने के कारण यहां चुनावी तैयारियां पहले शुरू होने की संभावना है। चुनाव से पहले मतदाता सूची को अपडेट करना जरूरी होगा। ऐसे में दिसंबर 2026 से मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
1 अप्रैल 2027 से जनगणना, चुनाव कार्यक्रम पर भी असर
नगरीय निकाय चुनाव की राह में सबसे बड़ी चुनौती आगामी जनगणना भी बन सकती है। 1 अप्रैल 2027 से घर-घर जनगणना शुरू होने वाली है। जनगणना पूरी होने के बाद आबादी के आंकड़ों में बदलाव आएगा और इसके आधार पर आगे वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि चुनाव आयोग के सामने एक साथ कई प्रक्रियाओं को समन्वित करने की चुनौती होगी।
चुनाव से पहले तीन बड़ी चुनौतियां
1. मतदाता सूची का पुनरीक्षण
यदि चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समय से करीब तीन महीने पहले शुरू होती है तो आयोग को 1 जनवरी 2027 की स्थिति में मतदाता सूची को अपडेट करना होगा।
2. जनगणना का असर
1 अप्रैल 2027 से शुरू होने वाली जनगणना के बाद आबादी के नए आंकड़े सामने आएंगे। इन आंकड़ों का असर नगरीय निकायों की चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।
वार्ड परिसीमन
जनगणना के बाद वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया होगी। आबादी के आंकड़ों में बदलाव के कारण वार्डों की सीमाएं और संरचना भी बदल सकती है। ऐसे में परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया चुनाव कार्यक्रम को प्रभावित कर सकती है।
अब गांव नहीं, वार्डों की राजनीति होगी
दिनारा के लिए यह बदलाव सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं है। नगर पंचायत बनने के बाद यहां विकास की प्राथमिकताएं, प्रशासनिक ढांचा और राजनीतिक समीकरण भी बदलेंगे। अब गांवों की राजनीति में पंच-सरपंच की भूमिका के बजाय वार्डों में पार्षद और नगर पंचायत अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यानी जिन गांवों में अब तक पंचायत चुनाव के जरिए स्थानीय नेतृत्व तय होता था, वहां आने वाले समय में नगर पंचायत की राजनीति का नया अध्याय शुरू होगा।
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर कार्यकाल संबंधी जानकारी अपडेट होने के बाद अब जिले में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। हालांकि चुनाव का अंतिम कार्यक्रम, आरक्षण और मतदाता सूची आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी, लेकिन इतना तय है कि 2027 का नगरीय निकाय चुनाव शिवपुरी जिले में पहले से बड़ा और अधिक व्यापक होगा—क्योंकि इस बार 11 नहीं, 12 नगरीय निकाय चुनाव मैदान में होंगे।
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