शिवपुरी। जिले की विभिन्न निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (Private ITI) के करीब 2500 विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विद्यार्थियों ने जिला कलेक्टर को आवेदन देकर परीक्षा की व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों, रॉ-मटेरियल के वितरण, मूल्यांकन प्रक्रिया और घोषित परिणामों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रायोगिक परीक्षा के दौरान उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया और कुछ विद्यार्थियों को कथित रूप से प्रैक्टिकल परीक्षा में फेल करने की बात कही गई।
मामले को गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि आवेदन के अनुसार जिले की विभिन्न निजी ITI में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे करीब 2500 विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा के लिए शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, शिवपुरी को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। परीक्षा के दौरान प्रतिदिन लगभग 400 विद्यार्थियों की परीक्षा आयोजित की गई।
अब विद्यार्थियों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परीक्षा केंद्र पर विद्यार्थियों के लिए निर्धारित संसाधन उपलब्ध थे या नहीं और उनका मूल्यांकन निर्धारित नियमों के अनुसार निष्पक्ष तरीके से किया गया या नहीं।
प्रैक्टिकल में फेल कर देंगे’ कहकर दबाव बनाने का आरोप
कलेक्टर को दिए आवेदन में विद्यार्थियों ने सबसे गंभीर आरोप मानसिक दबाव को लेकर लगाया है। आवेदन के मुताबिक प्रायोगिक परीक्षा के दौरान परीक्षा नियंत्रण कक्ष से संबंधित व्यक्तियों द्वारा विद्यार्थियों से कथित रूप से कहा गया कि उन्हें प्रायोगिक परीक्षा में फेल कर दिया जाएगा।
विद्यार्थियों का कहना है कि इस तरह के कथित दबाव के कारण कई विद्यार्थी भय और मानसिक तनाव की स्थिति में परीक्षा देने के लिए मजबूर हुए। आवेदन में मांग की गई है कि संबंधित विद्यार्थियों के स्वतंत्र बयान लिए जाएं और जांच की जाए कि परीक्षा के दौरान किसी विद्यार्थी पर किसी प्रकार का दबाव बनाया गया था या नहीं।
रोज 400 विद्यार्थियों की परीक्षा, पर्याप्त संसाधन थे या नहीं?
आवेदन में परीक्षा की व्यवस्थाओं को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि करीब 2500 विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा आयोजित की गई और प्रतिदिन लगभग 400 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए। ऐसे में विद्यार्थियों ने सवाल उठाया है कि परीक्षा केंद्र पर इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा कराने के लिए पर्याप्त मशीनें, उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध थे या नहीं। उन्होंने जांच की मांग की है कि परीक्षा केंद्र पर उपलब्ध मशीनरी एवं उपकरणों की वास्तविक संख्या कितनी थी और उनकी वास्तविक कार्यशील क्षमता कितने विद्यार्थियों की परीक्षा कराने की थी।
रॉ-मटेरियल की प्राप्ति से लेकर वितरण तक जांच की मांग
मामले में रॉ-मटेरियल भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बनाया गया है। आवेदन में कहा गया है कि निजी ITI द्वारा उपलब्ध कराया गया रॉ-मटेरियल परीक्षा नियंत्रण कक्ष में जमा कराया गया था।
विद्यार्थियों ने मांग की है कि यह जांच हो कि रॉ-मटेरियल किसके निर्देश पर जमा कराया गया, उसे किसके द्वारा प्राप्त किया गया, किस प्रकार सुरक्षित रखा गया और बाद में किसे तथा कितनी मात्रा में वितरित किया गया। इस पूरे रिकॉर्ड की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि विद्यार्थियों को निर्धारित प्रायोगिक कार्य करने के लिए आवश्यक सामग्री वास्तव में उपलब्ध कराई गई थी या नहीं।
दो दशक से फेल नहीं हुए, अब कई विद्यार्थी अनुत्तीर्ण
विद्यार्थियों के आवेदन में घोषित परीक्षा परिणाम को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आवेदन के अनुसार प्रायोगिक परीक्षा का परिणाम घोषित हो चुका है और बड़ी संख्या में निजी ITI के विद्यार्थी प्रायोगिक परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुए हैं। विद्यार्थियों का दावा है कि इनमें ऐसे विद्यार्थी भी हैं, जो पिछले दो दशकों में प्रायोगिक परीक्षा में कभी फेल नहीं हुए थे। इसी आधार पर उन्होंने मांग की है कि ITIवार और ट्रेडवार अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या का परीक्षण कराया जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि किसी विशेष ITI अथवा ट्रेड के विद्यार्थियों का परिणाम असामान्य रूप से अधिक खराब तो नहीं हुआ है।
मूल्यांकन पत्रक और परीक्षकों के दिए अंकों की जांच हो
आवेदन में विद्यार्थियों के प्रायोगिक मूल्यांकन पत्रक, प्राप्त अंक, परीक्षकों द्वारा दिए गए अंक, उपस्थिति पत्रक, प्रायोगिक परीक्षा रिकॉर्ड और अन्य संबंधित परीक्षा अभिलेखों** की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। विद्यार्थियों का कहना है कि यह भी सत्यापित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक विद्यार्थी का मूल्यांकन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार और निष्पक्ष रूप से किया गया अथवा नहीं।
CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग
विद्यार्थियों ने परीक्षा अवधि के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखकर उसकी जांच कराने की मांग भी की है। आवेदन में विशेष रूप से यह पता लगाने की मांग की गई है कि परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को किस प्रकार के निर्देश दिए गए, उन्हें पर्याप्त मशीन और उपकरण उपलब्ध कराए गए या नहीं तथा परीक्षा नियंत्रण कक्ष की भूमिका क्या रही। CCTV फुटेज और परीक्षा रिकॉर्ड का मिलान किए जाने से परीक्षा के दौरान वास्तविक परिस्थितियों की तस्वीर सामने आ सकती है।
जांच में इन बिंदुओं पर हो फोकस
विद्यार्थियों ने स्वतंत्र जांच के दौरान विशेष रूप से यह सत्यापित कराने की मांग की है कि—
परीक्षा केंद्र पर उपलब्ध मशीनरी एवं उपकरणों की वास्तविक संख्या कितनी थी।
उपलब्ध मशीनों की वास्तविक कार्यशील क्षमता कितनी थी।
प्रतिदिन करीब 400 विद्यार्थियों को प्रायोगिक कार्य करने का पर्याप्त अवसर मिला या नहीं।
आवश्यक रॉ-मटेरियल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध था या नहीं।
निजी ITI द्वारा जमा कराए गए रॉ-मटेरियल का वितरण नियमानुसार हुआ या नहीं।
विद्यार्थियों पर प्रैक्टिकल में फेल करने का दबाव बनाया गया या नहीं।अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों का मूल्यांकन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ या नहीं।
परीक्षा नियंत्रण कक्ष की भूमिका और संबंधित रिकॉर्ड की स्थिति क्या रही।
परीक्षा अवधि के CCTV फुटेज में क्या परिस्थितियां सामने आती हैं।
प्रभावित विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल
विद्यार्थियों ने अपने आवेदन में कहा है कि परीक्षा परिणाम सीधे उनके भविष्य और रोजगार की संभावनाओं से जुड़ा है। इसलिए यदि जांच में यह सामने आता है कि विद्यार्थियों को पर्याप्त प्रायोगिक संसाधन नहीं मिले, उन्हें निर्धारित कार्य करने का अवसर नहीं मिला अथवा मूल्यांकन प्रक्रिया में अनियमितता हुई, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।साथ ही प्रभावित विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सक्षम विभाग के माध्यम से पुनः प्रायोगिक परीक्षा, पुनर्मूल्यांकन अथवा नियमानुसार अन्य राहत दिए जाने की मांग भी की गई है।
कलेक्टर से स्वतंत्र जांच समिति बनाने की मांग
करीब 2500 विद्यार्थियों से जुड़े इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर है। विद्यार्थियों ने जिला कलेक्टर से पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच समिति के माध्यम से जांच कराने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि विद्यार्थियों के स्वतंत्र बयान, CCTV फुटेज, मूल्यांकन अभिलेख, परीक्षा केंद्र पर उपलब्ध मशीनरी एवं उपकरणों का भौतिक सत्यापन तथा रॉ-मटेरियल की प्राप्ति और वितरण के रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।

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