शिवपुरी। माता जानकी के प्राकट्योत्सव को आधिकारिक पहचान दिलाने की मांग को लेकर मंगलवार को शिवपुरी की सड़कों पर आवाज गूंजी। अंतर्राष्ट्रीय जानकी सेना संगठन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने ‘मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस घोषित हो’ राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत मांग पदयात्रा निकाली। पदयात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं ने सीता नवमी को प्रदेश में आधिकारिक रूप से ‘मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस’ घोषित करने की मांग उठाई।
पदयात्रा मां जानकी लवकुश पार्क, पोलो ग्राउंड से शुरू हुई और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस पोलो ग्राउंड पहुंची। इसके बाद संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया।
शहर के प्रमुख मार्गों से निकली पदयात्रा
पदयात्रा पोलो ग्राउंड से शुरू होकर कोर्ट रोड, माधव चौक, गुरुद्वारा, राजेश्वरी रोड और तात्या टोपे मार्ग से गुजरी। इस दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने मां जानकी के प्राकट्योत्सव को प्रदेश स्तर पर मान्यता देने की मांग को प्रमुखता से उठाया। पदयात्रा के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर संगठन ने अपना ज्ञापन सौंपा और सरकार से मांग पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
सीता नवमी को घोषित हो मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस
संगठन की मुख्य मांग है कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी, जिसे धार्मिक परंपरा में सीता नवमी के रूप में मनाया जाता है, को मध्य प्रदेश में आधिकारिक रूप से मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस घोषित किया जाए। संगठन का कहना है कि माता सीता भारतीय नारी शक्ति, त्याग, सम्मान, संस्कार और धैर्य की प्रेरणास्रोत हैं। ऐसे में उनके प्राकट्योत्सव को प्रदेश स्तर पर पहचान देकर इस अवसर पर सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
शिवपुरी से शुरू हुआ राष्ट्रव्यापी अभियान
जानकी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रम सिंह रावत ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत 6 जून 2026 को शिवपुरी से की गई थी। संगठन के अनुसार अभियान के पहले चरण में सरकार के सचिवालय को करीब 10 हजार मांग ज्ञापन भेजे जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि ई-मेल के माध्यम से भी सरकार तक मांग पहुंचाई गई है। अब अभियान के अगले चरण में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ‘मां सीता सम्मान मांग पदयात्रा’ निकाली जा रही है और कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं।
चित्रकूट से जोड़ा अभियान का भावनात्मक संबंध
विक्रम सिंह रावत ने कहा कि अभियान की शुरुआत मध्य प्रदेश से करने के पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक आधार भी है। संगठन के अनुसार भगवान श्रीराम और माता सीता ने वनवास के दौरान चित्रकूट में करीब साढ़े 11 वर्ष बिताए थे। चित्रकूट आज मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों में शामिल है। संगठन का मानना है कि सीता नवमी को प्रदेश स्तर पर आधिकारिक रूप से मनाने की घोषणा से माता जानकी के जीवन और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
महिला इकाई ने कहा—माता जानकी नारी शक्ति की प्रतीक
जानकी सेना की महिला इकाई की अध्यक्ष अनुषा भटनागर ने कहा कि माता जानकी भारतीय नारी के त्याग, सम्मान, शक्ति और संस्कार का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में महिला सशक्तीकरण और नारी सम्मान को लेकर विभिन्न योजनाएं और अभियान चलाए जा रहे हैं, ऐसे समय में सीता नवमी को ‘मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस’ के रूप में घोषित किया जाना महिलाओं के लिए गौरव का विषय होगा।
संगठन ने मांग की कि इस अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिससे नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, परंपरा और संस्कारों से जुड़ सके।
एक महीने का अल्टीमेटम, भोपाल में होगा बड़ा आंदोलन
जानकी सेना ने सरकार को मांग पर निर्णय के लिए एक महीने का समय देने की बात कही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में सरकार की ओर से मांग पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा।
संगठन के अनुसार इसके तहत भोपाल में हजारों जानकी सैनिकों के साथ विशाल मांग पदयात्रा निकाली जाएगी और मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर अपनी मांग रखी जाएगी। संगठन ने मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी भी दी है। फिलहाल शिवपुरी से शुरू हुई यह मांग पदयात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ माता जानकी के आदर्शों, नारी सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को आधिकारिक पहचान दिलाने की मुहिम के रूप में सामने आई है।
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