शिवपुरी। शिवपुरी जिले की पुलिस अधीक्षक यागचेन डोलकर भूटिया ने खनियाधाना टीआई केदार सिंह यादव और एसआई छाया राव को सस्पैंड कर दिया है,मामला मध्यप्रदेश ग्वालियर हाई कोर्ट मे दायर एक नाबालिग के अपहरण के मामले को लेकर लगाई गई एक याचिका से जुडा है,इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने खनियाधाना थाने मे पदस्थ SI छाया राय के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (2012) और बीएनएस (2023) की धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। बीते रोज यह मामला दिन भर सुर्खियो मे बना रहा है। शिवपुरी समचार डॉट कॉम ने इस मामले को नाबालिग के गायब होने की शिकायत और हाईकोर्ट की डबल बैंच के 10 अगस्त आदेश तक के तथ्यो को प्रकाशित किया है।
शिवपुरी। शिवपुरी जिले की पुलिस अधीक्षक यागचेन डोलकर भूटिया ने खनियाधाना टीआई केदार सिंह यादव और एसआई छाया राव को सस्पैंड कर दिया है,मामला मध्यप्रदेश ग्वालियर हाई कोर्ट मे दायर एक नाबालिग के अपहरण के मामले को लेकर लगाई गई एक याचिका से जुडा है,इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने खनियाधाना थाने मे पदस्थ SI छाया राय के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (2012) और बीएनएस (2023) की धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। बीते रोज यह मामला दिन भर सुर्खियो मे बना रहा है। शिवपुरी समचार डॉट कॉम ने इस मामले को नाबालिग के गायब होने की शिकायत और हाईकोर्ट की डबल बैंच के 10 अगस्त आदेश तक के तथ्यो को प्रकाशित किया है।
यह था पूरा मामला
खनिधाना थाना सीमा के मुहारीकला गावं मे निवास करने वाली एक महिला ने शिवपुरी पुलिस अधीक्षक को एक शिकायती आवेदन सौंपा था। इस शिकायत मे कहा गया था कि उसकी नाबालिग बेटी घ्रर से गायब है और खनियाधाना पुलिस उसकी सुनवाई नही कर रही है। इस शिकायत मे उल्लेख था कि उनकी बेटी को भूरा लोधी भगा कर ले गया है।
बताया जा रहा है कि जब नाबालिग को पुलिस ने बरामद किया था,थाने मे नाबालिग और उनके परिजन आरोपी युवक भूरा लोधी और उसके परिजन मौजूद थे। इस मामले की जांच अधिकारी एसआई छाय राय ने नाबालिग को उसकी मॉ को सुपुर्द नही किया और उसे आरोपी युवक के साथ जाने दिया था। जब मॉ ने पुलिस की इस कार्यवाही का विरोध किया तो उसके साथ अभद्रता की गई थी।
मामला पहुंचा हाईकोर्ट की डबल बैंच मे
इस मामले मे नाबालिग की मॉ ने हाई कोई की डबल बेंच मे एक याचिका लगाई। इस याचिका WP No. 28945/2026 की सुनवाई करते हुए शिवपुरी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त सवाल उठाए और कडी फटकार लगाई। इस मामले मे जबाब देने के लिए पुलिस अधीक्षक शिवपुरी यागचेन डोलकर भूटिया को हाई कोर्ट ने हाजिर होने के ओदश दिए थे।
WP No. 28945/2026 मे आदेश 10 अगस्त 2026 को पारित किया गया। सुनवाई के दौरान नाबालिग की मां ने जांच अधिकारी छाया राय के खिलाफ गंभीर शिकायतें कोर्ट के सामने रखीं। मां का कहना था कि पुलिस थाने बुलाए जाने के बावजूद उसकी मदद नहीं की गई और उसके साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया गया।
शिकायत में नाबालिग के लापता होने की बात, फिर भी FIR क्यों नहीं ?
कोर्ट ने शिकायत के उन हिस्सों का उल्लेख किया जिसमें मां ने बताया था कि उसकी नाबालिग बेटी को एक युवक अपने साथ ले गया है। शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के बाद पुलिस थाने पहुंचकर बेटी की वापसी की मांग की थी। आदेश के मुताबिक, पुलिस थाने में नाबालिग लड़की, युवक और उसके परिवार के लोग मौजूद थे। मां ने लड़की को अपने साथ ले जाने की मांग की, लेकिन उसे यह कहते हुए लड़की की कस्टडी देने से इनकार कर दिया गया कि लड़की युवक के साथ रहने की इच्छा जता रही है।
यहीं से मामला हाई कोर्ट के सामने गंभीर रूप से उभरा
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब लड़की नाबालिग है, तो केवल उसकी इच्छा के आधार पर उसे किसी युवक के साथ रहने देना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच अधिकारी को यह लगता था कि गंभीर आरोपों के कारण लड़की को सीधे उसकी मां को सौंपना उचित नहीं है, तो उसे नियमानुसार बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया जाना चाहिए था। लेकिन अदालत के अनुसार, नाबालिग को कथित तौर पर उसी युवक के साथ रहने देना उचित कार्रवाई नहीं थी। कोर्ट के आदेश में यह भी दर्ज है कि इस गलती को स्वयं शिवपुरी एसपी ने जांच अधिकारी और संबंधित थाना प्रभारी की गलती के रूप में स्वीकार किया।
पुलिस की भूमिका पर कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
अदालत ने टिप्पणी की कि शिवपुरी पुलिस ने मामले को उस गंभीरता से नहीं लिया, जिसकी आवश्यकता थी। कोर्ट ने संबंधित जांच अधिकारी की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और यह तक कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों में नाबालिग को युवक के साथ रहने देना गंभीर कानूनी परिणामों से जुड़ा हो सकता है।
पॉक्सो और बीएनएस की धाराओं में कार्रवाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 19, 20, 21 और बीएनएस 2023 की धारा 198, 199 का उल्लेख करते हुए एसपी से पूछा कि जांच अधिकारी के खिलाफ इन प्रावधानों के तहत आपराधिक मामला क्यों नहीं दर्ज किया जाना चाहिए। कोर्ट के कड़े रुख के बाद एसपी ने जांच अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार आपराधिक कार्रवाई किए जाने की बात स्वीकार की।
याचिका से जुड़ा है। नाबालिग की मां ने पुलिस पर आरोपियों से मिलीभगत और उसे इधर-उधर भटकाने का आरोप लगाया। मां जब अपनी बेटी को लेने खनियांधाना थाने पहुंची तो पुलिस ने उसे सुपुर्द करने से इनकार कर दिया और नाबालिग को आरोपी भूरा के पास ही रहने दिया। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों से सुलह के लिए दबाव भी बनाया।
कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस को बालिका को मां के सुपुर्द करना उचित नहीं लग रहा था तो उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाना चाहिए था। नाबालिग को आरोपी के साथ छोड़ना अपहरण और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध को बढ़ावा देने जैसा है और यह मानव तस्करी की ओर भी इशारा करता है।
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