पिछोर/शिवपुरी। शुक्रवार शाम से शुरू हुई रुक-रुककर बारिश ने शनिवार तक जिले के कई इलाकों में नदी-नालों का मिजाज बदल दिया। पिछोर क्षेत्र में शुक्रवार रात हुई तेज बारिश के बाद महुअर नदी अचानक उफान पर आ गई। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही आसपास के गांवों में पानी पहुंच गया और खेतों में खड़ी फसलों के डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई।
महुअर नदी का पानी गुरुकुदवाया गांव के स्कूल और कुछ घरों तक पहुंच गया। वहीं बूढ़ोन शाजापुर, उमरीकला और पायगा सहित आसपास के कई गांवों के खेत जलमग्न हो गए। खेतों में पानी भरने से सोयाबीन सहित अन्य फसलों को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। लगातार बारिश जारी रहने पर नुकसान और बढ़ने की चिंता किसानों को सताने लगी है।
पहली बार करैरा पुल पर दिखा तेज बहाव
पिछोर क्षेत्र में बारिश के बाद महुअर नदी में आया पानी तेजी से आगे बढ़ा और करैरा क्षेत्र तक पहुंच गया। करैरा पुल पर इस सीजन में पहली बार महुअर नदी को इतने तेज बहाव के साथ बहते हुए देखा गया। नदी के उफान का यह दृश्य देखने के लिए आसपास के लोग भी पहुंचते रहे। नदी में अचानक बढ़े पानी ने यह साफ कर दिया कि क्षेत्र में कुछ घंटों की तेज बारिश भी नदी-नालों के जलस्तर को तेजी से बढ़ा सकती है। निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता भी इसी वजह से बढ़ी हुई है।
खेत बने तालाब, फसल डूबने का खतरा
महुअर नदी के आसपास के गांवों में खेतों में पानी भरने से किसान परेशान हैं। कई जगह खेत पूरी तरह पानी में डूबे नजर आए। किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहा तो खड़ी फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। शुक्रवार रात हुई बारिश के बाद केवल महुअर नदी ही नहीं, बल्कि जिले के दूसरे नदी-नालों में भी जलस्तर बढ़ा है। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी है। शनिवार सुबह तक जिले के कई हिस्सों में बारिश रुक-रुककर जारी रही।
नदी उफनी, लेकिन बारिश का आंकड़ा अभी भी सूखा
बारिश के इस दौर ने भले ही नदी-नालों को उफान दे दिया हो, लेकिन पूरे मानसून सीजन के आंकड़े एक अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। जिले में इस साल अब तक बारिश पिछले वर्ष की तुलना में 729.72 मिमी कम दर्ज की गई है।
भू-अभिलेख शाखा के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून 2026 से अब तक शिवपुरी जिले में 313.82 मिमी औसत बारिश रिकॉर्ड हुई है। इसके मुकाबले पिछले वर्ष इसी अवधि तक जिले में 1043.54 मिमी औसत बारिश हो चुकी थी। यानी इस साल अब तक पिछले वर्ष की तुलना में करीब 70 प्रतिशत कम बारिश हुई है। यह अंतर बताता है कि शुक्रवार-शनिवार को हुई तेज बारिश के बावजूद जिले में मानसून की स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है।
सामान्य बारिश 816.3 मिमी, अब तक 313.82 मिमी
भू-अभिलेख विभाग के अनुसार शिवपुरी जिले की सामान्य औसत वर्षा 816.3 मिमी है। पिछले वर्ष पूरे मानसून सीजन में जिले में 1585.86 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इसके मुकाबले इस वर्ष अब तक हुई बारिश काफी कम है। यानी फिलहाल कुछ घंटों की तेज बारिश से नदी-नाले जरूर उफान पर आ गए हैं, लेकिन पूरे जिले के बारिश के आंकड़े अभी भी औसत से काफी पीछे हैं।
शिवपुरी में सबसे ज्यादा, खनियाधाना सबसे पीछे
1 जून से अब तक तहसीलवार बारिश के आंकड़ों में शिवपुरी तहसील सबसे आगे है, जबकि खनियाधाना में सबसे कम बारिश दर्ज हुई है।
शिवपुरी: 401.80 मिमी
पोहरी: 392 मिमी
करैरा: 357.60 मिमी
नरवर: 353 मिमी
कोलारस: 331 मिमी
पिछोर: 262 मिमी
बदरवास: 286.50 मिमी
बैराड़: 232 मिमी
खनियाधाना:208.50 मिमी
इन आंकड़ों से साफ है कि जिले में बारिश का वितरण भी एक समान नहीं रहा है। कहीं तेज बारिश से नदी उफन रही है तो कहीं बारिश की कमी अब भी बनी हुई है।
किसानों के लिए बारिश बनी दोहरी तस्वीर
इस मानसून की स्थिति किसानों के लिए दोहरी तस्वीर सामने ला रही है। एक तरफ लंबे समय से पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को बारिश से राहत मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ अचानक तेज बारिश होने पर खेतों में पानी भरने और फसल खराब होने का खतरा पैदा हो रहा है।
महुअर नदी के उफान ने फिलहाल पिछोर और करैरा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में इसी चिंता को बढ़ाया है। अब निगाहें आने वाले दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी हैं। यदि बारिश लगातार और संतुलित तरीके से होती है तो जलस्रोतों को फायदा मिलेगा, लेकिन कम समय में अत्यधिक बारिश हुई तो निचले इलाकों और खेतों में जलभराव से नुकसान बढ़ सकता है।

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