Shivpuri News: सिर से बहता रहा खून, अस्पताल ने इलाज से किया इनकार, पढिए पूरा मामला

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। एक तरफ गांव में मामूली विवाद ने ऐसा रूप लिया कि लाठी-डंडों से एक ही परिवार के कई लोगों को पीट दिया गया, वहीं दूसरी तरफ घायल जब इलाज और मेडिकल के लिए अस्पताल पहुंचे तो कथित तौर पर उन्हें वहां भी राहत नहीं मिली। आरोप है कि सिर में चोट लगने से खून बह रहा था, हाथ-पैर में गंभीर चोटें थीं, लेकिन बैराड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में टांके लगाने का सामान तक उपलब्ध नहीं था। 

पीड़ित परिवार का दावा है कि अस्पताल में इलाज नहीं होने के बाद वे मदद की उम्मीद लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और फिर शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में भी उपचार कराने की कोशिश की, लेकिन वहां भी उन्हें तत्काल उपचार नहीं मिल सका।

मामला बैराड़ थाना क्षेत्र के ग्राम ऐचबाड़ा का है। यहां 8 अगस्त की शाम दीवार पर गोबर फेंकने से मना करने की बात को लेकर शुरू हुआ विवाद कथित मारपीट में बदल गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कई लोग लाठी-डंडे लेकर पहुंचे और गाली-गलौज करने के बाद परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट शुरू कर दी। घटना में कई लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। अब पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले में कार्रवाई और घायलों का समुचित मेडिकल कराने की मांग की है।

दीवार पर गोबर फेंकने से मना करने पर विवाद का आरोप
ग्राम ऐचबाड़ा निवासी कीरत शाक्य पुत्र मांगी शाक्य ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 8 अगस्त 2026 की शाम करीब पांच बजे वह अपने घर के बाहर बैठा था। इसी दौरान गांव के कुछ लोग कथित तौर पर एक राय होकर लाठी-डंडे लेकर उसके घर पहुंचे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आते ही आरोपितों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। जब उसने गालियां देने से मना किया तो विवाद बढ़ गया और आरोपितों ने कथित तौर पर लाठी-डंडों से उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।

सिर में चोट लगी, खून निकलने का दावा
कीरत के मुताबिक, मारपीट के दौरान उसके पूरे शरीर पर चोटें आईं। आरोप है कि उसके सिर में भी डंडा लगने से चोट आई और खून निकलने लगा। स्थिति देखकर उसके भाई और परिवार के अन्य सदस्य बीच-बचाव करने पहुंचे, लेकिन शिकायत के अनुसार हमलावरों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा।

कीरत ने शिकायत में अरविंद, आशीष शर्मा, मनीष शर्मा, शुभम शर्मा और राज शर्मा के नाम बताए हैं। उसका आरोप है कि इन लोगों ने उसके भाई रवि, सुघर सिंह, पिता, मां तथा भाभियों बैजन्ती और भारती सहित परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी लात-घूंसों और डंडों से मारपीट की। परिवार का दावा है कि घटना में कई लोगों को चोटें आई हैं।

थाने पहुंचे तो मेडिकल को लेकर भी उठे सवाल
मारपीट के बाद पीड़ित परिवार बैराड़ थाने पहुंचा और घटना की शिकायत दर्ज कराई। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर मामला दर्ज किया, लेकिन मेडिकल की प्रक्रिया को लेकर गंभीर लापरवाही हुई। कीरत का कहना है कि उसके सिर में चोट थी और भाई रवि के हाथ-पैर में गंभीर चोटें आई थीं। परिवार को आशंका है कि उसके भाई के हाथ या पैर में फ्रैक्चर भी हो सकता है।

इसके बावजूद, शिकायतकर्ता के अनुसार, उसका और उसके भाई का मेडिकल नहीं कराया गया, जबकि उसके पिता और सुघर सिंह, जिन्हें अपेक्षाकृत मामूली चोटें थीं, उनका मेडिकल कराया गया।

अस्पताल पहुंचे तो मिला ‘टांके का सामान नहीं’ वाला जवाब
मामले में सबसे गंभीर आरोप बैराड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को लेकर सामने आया है। पीड़ित परिवार के मुताबिक, पुलिस द्वारा मेडिकल के लिए अस्पताल भेजे जाने के बाद वे घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचे। परिवार का आरोप है कि वहां डॉक्टर ने यह कहते हुए तत्काल उपचार करने में असमर्थता जताई कि अस्पताल में टांके लगाने का सामान उपलब्ध नहीं है।

सिर से खून निकलने और शरीर पर चोटों के साथ अस्पताल पहुंचे परिवार के लिए यह स्थिति बेहद परेशान करने वाली थी। परिजनों का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर घायल अवस्था में वे इलाज के लिए जाएं तो जाएं कहां।

डर और परेशानी के बीच एसपी कार्यालय पहुंचे
अस्पताल में कथित तौर पर इलाज नहीं मिलने के बाद परिवार के सदस्य शिवपुरी पहुंचे और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत की। परिवार ने एसपी से आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने के साथ ही घायलों का उचित मेडिकल और इलाज कराने की मांग भी की। पीड़ित परिवार का कहना है कि विवाद के बाद उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर भी डर बना हुआ है।

मेडिकल कॉलेज में भी उपचार नहीं मिलने का दावा
पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है कि एसपी कार्यालय पहुंचने के बाद वे उपचार की उम्मीद में शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचे, लेकिन वहां भी तत्काल उपचार नहीं हो सका। हालांकि, इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन या संबंधित चिकित्सकों का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि अस्पताल में उस समय टांके लगाने की सामग्री वास्तव में उपलब्ध नहीं थी या किसी अन्य चिकित्सकीय कारण से उपचार नहीं किया गया।


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