शिवपुरी। जिले में पैथोलॉजी जांच से जुड़े एक कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसने मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करैरा नगर में संचालित एक पंजीकृत डायग्नोस्टिक लैब के संचालक ने आरोप लगाया है कि खोड़ क्षेत्र में संचालित एक पैथोलॉजी सेंटर उनकी कंपनी के नाम, लेटरहेड और दस्तावेजों का कथित रूप से अवैध इस्तेमाल कर मरीजों को जांच रिपोर्ट सौंप रहा है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
एनकेबीएस डायग्नोस्टिक लेबोरेट्री प्राइवेट लिमिटेड, करैरा के डायरेक्टर देवाशीष श्रीवास्तव ने खोड़ चौकी में दर्ज शिकायत में बताया है कि बस स्टैंड के पास संचालित श्री श्याम पैथोलॉजी द्वारा उनकी कंपनी की पहचान का कथित रूप से दुरुपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि मरीजों को जो जांच रिपोर्ट दी जा रही हैं, वे उनकी अधिकृत लैब से जारी नहीं हुई हैं, बावजूद इसके उन पर उनकी संस्था से जुड़े दस्तावेज और लेटरहेड का उपयोग किया जा रहा है।
शिकायत में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि संबंधित रिपोर्टों पर अधिकृत पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर तक मौजूद नहीं हैं। इतना ही नहीं, लेटरहेड पर मुद्रित क्यूआर कोड को स्कैन करने पर भी कथित रूप से श्री श्याम पैथोलॉजी की रिपोर्ट खुल रही है। इससे मरीजों, चिकित्सकों और आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
लैब संचालक का कहना है कि इस कथित फर्जीवाड़े से उनकी संस्था की साख प्रभावित हो रही है। इससे भी अधिक गंभीर चिंता यह है कि यदि बिना अधिकृत जांच या सत्यापन के रिपोर्ट मरीजों को दी जा रही हैं, तो गलत रिपोर्ट के आधार पर उपचार होने की आशंका से मरीजों के स्वास्थ्य के साथ बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि करैरा स्थित एनकेबीएस डायग्नोस्टिक लेबोरेट्री विधिवत पंजीकृत संस्था है, जबकि दूसरी ओर समान नाम और दस्तावेजों का कथित रूप से उपयोग कर रिपोर्ट जारी की जा रही हैं। पीड़ित पक्ष ने पुलिस से निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तथा नाम और दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
खोड़ चौकी प्रभारी कुसुम गोयल ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत में जिस पक्ष का उल्लेख किया गया है, उसे दस्तावेजों सहित बुलाया गया है। सभी अभिलेखों और तथ्यों की जांच की जाएगी। यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो संबंधित पक्ष के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला फिलहाल जांच के अधीन है। पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा, लेकिन इस घटना ने निजी पैथोलॉजी लैबों की कार्यप्रणाली और मरीजों को दी जाने वाली जांच रिपोर्टों की प्रमाणिकता पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
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