शिवपुरी। वर्तमान मे आषाढ माह चल रहा है। आषाढ माह की बारिश मानसून सीजन की फसलो की दशा और दिशा तय करती है। पिछले वर्ष आषाढ अर्थात जुलाई माह में लगातार बारिश हुई थी और 15 जुलाई तक नदी,नाले,तालाब,और डेम आवर फ्लो हो चुके थे,लेकिन इस बार सब प्यासे है। इस साल का आषाढ 30 जून से शुरू हुआ था और 29 जुलाई तक आषाढ का माह रहेगा। इसके बाद सावन माह लग जाऐगा। इस बार
इस बार बारिश की बेरुखी का सबसे बड़ा असर डैम के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। पिछले वर्ष जहां जुलाई के शुरुआती दिनों में डैम का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा था, वहीं इस साल आधा महीना गुजरने के बाद भी पानी महज 20 सेंटीमीटर ही बढ़ पाया है। शिवपुरी ही नहीं, डैम के कैचमेंट एरिया में भी पर्याप्त बारिश नहीं होने से सिंध नदी में अब तक तेज धार नहीं जुड़ सकी है।
पिछले साल 5 मीटर,इस साल सिर्फ 20 सेंटीमीटर
आंकड़े इस बार के कमजोर मानसून की पूरी कहानी बयां कर रहे हैं। 13 जुलाई 2025 को डैम का जलस्तर 339.30 मीटर था आज 15 जुलाई को डेम का जलस्तर 339.50 मीटर हैं यानी पिछले दो दिनों की तुलना नहीं, बल्कि इस वर्ष जुलाई के दौरान सिर्फ 20 सेंटीमीटर (0.20 मीटर) की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इसके उलट पिछले वर्ष जुलाई माह में जलस्तर करीब 5 मीटर बढ़ गया था, जबकि इस बार अब तक केवल 0.20 मीटर बढ़ा है।
फुल लेवल से अभी भी 6.75 मीटर नीचे
मड़ीखेड़ा डैम का पूर्ण जलभराव स्तर (FRL) 346.25 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 339.50 मीटर पर स्थिर है। इस हिसाब से डैम अभी भी 6.75 मीटर खाली है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो जलभराव की रफ्तार और धीमी पड़ सकती है।
कैचमेंट में बारिश नहीं, सिंध नदी भी शांत
विशेषज्ञों के अनुसार मड़ीखेड़ा डैम का जलस्तर बढ़ने के लिए सिर्फ शिवपुरी में ही नहीं, बल्कि सिंध नदी के पूरे कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी बारिश होना जरूरी है। इस बार कैचमेंट एरिया में भी पर्याप्त वर्षा नहीं होने से सिंध नदी में अपेक्षित प्रवाह नहीं बन पाया है। यही वजह है कि डैम में पानी की आवक बेहद कम बनी हुई है।
31 जुलाई तक 340 मीटर रखना है जलस्तर
मड़ीखेड़ा डैम संचालन को लेकर जारी निर्देशों के अनुसार 31 जुलाई तक जलस्तर 340 मीटर के आसपास बनाए रखना है। यदि इस दौरान भारी बारिश होती है और जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो पहले पावर जनरेशन यूनिट के लिए पानी छोड़ा जाएगा। इसके बाद भी जलस्तर नियंत्रित नहीं हुआ तो आवश्यकता पड़ने पर डैम के गेट खोलकर पानी की निकासी की जाएगी।
इस बार डैम पर पसरा सन्नाटा
पिछले वर्ष जुलाई के मध्य तक मड़ीखेड़ा डैम पर पानी की आवक बढ़ने के साथ ही सैलानियों की भी अच्छी-खासी भीड़ पहुंचने लगी थी। लेकिन इस बार न तो डैम लबालब है और न ही पर्यटकों की चहल-पहल दिखाई दे रही है। पानी कम होने से डैम क्षेत्र में वीरानी का माहौल बना हुआ है।
अब मोबाइल नेटवर्क की सुविधा
हालांकि डैम पर आने वाले लोगों के लिए एक राहत की खबर भी है। पहले यहां मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब लगभग सभी प्रमुख मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क उपलब्ध होने लगे हैं। इससे डैम क्षेत्र में आने वाले लोग अब मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े रह सकेंगे। फिलहाल सबकी नजरें आसमान पर टिकी हैं। यदि अगले कुछ दिनों में कैचमेंट एरिया में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो मड़ीखेड़ा डैम का जलस्तर बढ़ने की उम्मीदें और कमजोर पड़ सकती हैं।

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