Shivpuri News - राजस्व विभाग में वर्किंग पर ब्रेक, मांगों को लेकर पटवारी संघ की हड़ताल शुरू

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शिवपुरी।
मध्य प्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर शिवपुरी जिले के सभी पटवारी अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार, 15 जुलाई से तीन दिन के सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। इसके बाद शनिवार और रविवार की सरकारी छुट्टियां होने के कारण जिले में लगातार पांच दिनों तक राजस्व संबंधी अधिकांश काम पूरी तरह ठप रहेंगे। इसका सीधा असर किसानों, विद्यार्थियों, बैंकिंग सेवाओं और आम नागरिकों पर पड़ेगा।

पटवारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा है। संघ का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं ले रही है, जिसके कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

पहले से स्टाफ की भारी कमी, अब बढ़ेगी परेशानी
शिवपुरी जिले में पटवारियों के 600 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 490 पटवारी ही कार्यरत हैं। यानी जिले में 110 पद खाली हैं। इस कारण एक-एक पटवारी को दो से तीन अतिरिक्त हलकों का प्रभार संभालना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में भी किसानों और ग्रामीणों को छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। अब पांच दिन तक काम बंद रहने से लंबित फाइलों का अंबार लगने की आशंका है।

नामांतरण और बंटवारा 
जमीन की खरीद-बिक्री और पारिवारिक बंटवारे से जुड़ी फाइलों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
जमीन का सीमांकन 
बोनी के समय खेतों की नाप-जोख और सीमांकन का कार्य पूरी तरह रुक जाएगा।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना: नए पंजीयन और सत्यापन का काम प्रभावित रहेगा।
फार्मर रजिस्ट्री
किसानों की अनिवार्य फार्मर रजिस्ट्री का काम बंद रहेगा, जिससे भविष्य में खाद-बीज और सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित हो सकता है।
जाति, आय और मूल निवासी प्रमाण पत्र 
पटवारी की रिपोर्ट के बिना इन प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी, जिससे छात्रों और युवाओं को परेशानी होगी।
फसल बीमा और नुकसान का सर्वे
यदि इस दौरान बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से फसल को नुकसान होता है तो उसका सर्वे नहीं हो पाएगा।
कृषि ऋण और केसीसी ,बैंक से कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड के लिए जरूरी भू-अभिलेखों का सत्यापन भी रुक जाएगा।

ये हैं पटवारियों की प्रमुख मांगें
पटवारी संघ ने सरकार के सामने कई लंबित मांगें रखी हैं। इनमें कैडर रिव्यू लागू करना, पदोन्नति, समयमान वेतनमान, नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा नियमित कराना, वित्तीय विसंगतियों का समाधान तथा जज प्रोटेक्शन एक्ट के दायरे में पटवारियों को शामिल करना प्रमुख हैं। संघ का कहना है कि पिछले 25 वर्षों में केवल वर्ष 2018 में एक बार नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा आयोजित की गई, जबकि पदोन्नति और कैरियर ग्रोथ के अवसर लगातार प्रभावित हो रहे हैं।

संघ ने दी आगे आंदोलन की चेतावनी
पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष बलराम सिंह धाकड़ ने बताया कि मांगों से संबंधित ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से शासन को भेज दिया गया है। फिलहाल तीन दिन तक जिले का कोई भी पटवारी काम पर नहीं जाएगा। यदि शासन ने जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो प्रदेश स्तर पर जो भी निर्णय लिया जाएगा, जिले के पटवारी उसका पालन करेंगे।

बढ़ सकती हैं किसानों और आम लोगों की मुश्किलें
राजस्व विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो जिले की राजस्व व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ेगा। किसानों के खेती-किसानी से जुड़े काम, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया और ग्रामीण प्रशासन की दैनिक कार्यप्रणाली गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। वहीं, पांच दिन बाद जब कार्यालय खुलेंगे तो लंबित प्रकरणों का बोझ अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ा होगा।

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