शिवपुरी। जिले में पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं के धीमे क्रियान्वयन पर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाया। समीक्षा बैठक में योजनाओं की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिलने पर उन्होंने उपसंचालक पशुपालन डॉ. एल.आर. शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही जिन विकासखंडों में योजनाओं का प्रदर्शन कमजोर पाया गया, वहां पदस्थ पशु चिकित्सा अधिकारियों को भी नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर कार्य में सुधार लाने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित समय में प्रगति नहीं दिखी तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में पशुपालन विभाग की प्रमुख योजनाओं क्षीरधारा ग्राम योजना, हिरण्यगर्भा अभियान, दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना तथा आचार्य विद्यासागर योजना की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए फील्ड स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्थानीय अमले की जवाबदेही तय करने और योजनाओं की प्रगति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।
गौशालाओं में गौ-सत्यापन की होगी निष्पक्ष जांच
समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने बदरवास, नरवर और खनियाधाना की गौशालाओं में गौ-सत्यापन की जांच को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। उन्होंने उपसंचालक को विशेष जांच दल गठित कर सत्यापन की प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी कराने के लिए कहा, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।
गांव-गांव पहुंचे दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार गांव-गांव तक किया जाए। अभियान के माध्यम से पशुपालकों को नियमित टीकाकरण, पशु रोगों की रोकथाम, कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना और वैज्ञानिक पशुपालन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना नहीं, बल्कि पशुपालकों की आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित करना है।
गोरस' ऐप देगा वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी
बैठक में उपसंचालक डॉ. एल.आर. शर्मा ने बताया कि गोरस' एक हिंदी मोबाइल ऐप है, जिसे पशुपालकों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह ऐप गाय और भैंस के लिए संतुलित आहार योजना बनाने में मदद करता है, जिससे कम लागत में अधिक दूध उत्पादन संभव हो सके। इसके अलावा ऐप पर विभिन्न नस्लों की जानकारी, उपयुक्त चारा संयोजन और वैज्ञानिक पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण सलाह भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि यह ऐप गूगल प्ले स्टो पर निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है।
कलेक्टर ने बैठक के अंत में अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचाना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कमजोर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

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