शिवपुरी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शिवपुरी दौरे से ठीक 24 घंटे पहले भाजपा में खुली बगावत सामने आ गई। नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को हटाने की मांग को लेकर भाजपा के पार्षद सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां लेकर शहर के प्रमुख मार्गों पर नारेबाजी करते हुए पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शन के कुछ ही देर बाद भाजपा संगठन ने सख्त रुख अपनाते हुए 12 पार्षदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए। इससे शिवपुरी की राजनीति अचानक गरमा गई है।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा पार्षदों ने नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार, विकास कार्यों में अनियमितताओं और अध्यक्ष को संरक्षण दिए जाने के आरोप लगाए। वार्ड क्रमांक-20 के पार्षद विजय बिदांस ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनता अब जवाब चाहती है कि नगर पालिका अध्यक्ष को बचाने के लिए बताए जा रहे 1.64 करोड़ रुपये आखिर कौन खा गया? यह सच जनता के सामने आना चाहिए। हम लंबे समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई करने की बजाय हमें नोटिस देकर डराने की कोशिश की जा रही है। अब हम डरने वाले नहीं हैं।
मनाने पहुंचे जिलाध्यक्ष, लेकिन नहीं माने पार्षद
जैसे ही प्रदर्शन की जानकारी भाजपा संगठन को मिली, जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव सहित कई पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पार्षदों को समझाने और प्रदर्शन समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन विरोध कर रहे पार्षद अपनी मांगों पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब तक नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
CM को बताना चाहते हैं नगर पालिका की हकीकत
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वार्ड क्रमांक-5 के पार्षद ओमप्रकाश जैन ओमी' ने कहा कि मुख्यमंत्री को शिवपुरी नगर पालिका की वास्तविक स्थिति से अवगत कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नगर पालिका अध्यक्ष को हटाने की मांग लंबे समय से की जा रही है और जनता भी इस मांग के साथ खड़ी है। ओमी जैन ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का विरोध नहीं है, लेकिन विरोध स्वरूप कोई भी असंतुष्ट पार्षद कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा।
पुराना विवाद फिर आया सामने
ओमप्रकाश जैन ने बताया कि 11 जून 2025 को करैरा स्थित बगीचा सरकार हनुमान मंदिर में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों ने एकजुट होकर नगर पालिका अध्यक्ष को हटाने का संकल्प लिया था। इसके बाद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। बाद में 28 अगस्त 2025 को 18 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफे भी सौंपे थे। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष आज भी जारी है और यदि इस आंदोलन के कारण पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखाती है तो भी उन्हें इसकी चिंता नहीं है।
भ्रष्टाचार के आरोप, कार्रवाई नहीं होने का दावा
वार्ड क्रमांक-21 के पार्षद राजू गुर्जर ने कहा कि पिछले डेढ़-दो वर्षों से पार्षद लगातार नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतें कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तक शिकायत पहुंचाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण मुख्यमंत्री के दौरे से पहले विरोध प्रदर्शन कर अपनी बात शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
भाजपा ने दिखाई सख्ती, 12 पार्षदों को नोटिस
भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव ने कहा कि पार्षदों द्वारा उठाए गए कई मामले न्यायालय और विधिक प्रक्रिया के अधीन हैं। ऐसे मामलों को लेकर सार्वजनिक रूप से पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इसी कारण 12 पार्षदों को तीन दिन के भीतर जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पार्टी संविधान के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इन पार्षदों को मिला नोटिस
भाजपा ने वार्ड क्रमांक-5 के ओमप्रकाश जैन, वार्ड-8 की रीना कुलदीप शर्मा, वार्ड-9 की रितु रत्नेश जैन, वार्ड-10 की प्रतिभा गोपी शर्मा, वार्ड-11 की नीलम अनिल बघेल, वार्ड-12 की सरोज धाकड़, वार्ड-17 के राजा यादव, वार्ड-20 के विजय शर्मा, वार्ड-21 के रघुराज सिंह गुर्जर (राजू), वार्ड-31 की मीणा पंकज शर्मा, वार्ड-37 के गौरव सिंगला तथा वार्ड-39 की कृष्णा नगर को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
राजनीतिक माहौल गरमाया
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले भाजपा के भीतर खुलकर सामने आई यह नाराजगी अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। एक ओर संगठन अनुशासन का हवाला देकर कार्रवाई की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर असंतुष्ट पार्षद अपने आंदोलन को जनता की लड़ाई बताते हुए पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब सबकी निगाहें पार्षदों के जवाब, भाजपा संगठन के अगले कदम और मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान इस पूरे घटनाक्रम के राजनीतिक असर पर टिकी हुई हैं।

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