शिवपुरी। शहर सहित पूरे जिले में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि हर दिन 25 से 30 लोग डॉग बाइट का शिकार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। बीते दो माह में ही करीब 820 लोगों को कुत्ते काट चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर पालिका और जिला प्रशासन की ओर से समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब लोगों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। मोहल्लों, बाजारों और कॉलोनियों में झुंड बनाकर घूम रहे कुत्ते राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं। अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च 2026 में डॉग बाइट के 469 मामले सामने आए, अप्रैल में 355 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए, जबकि मई माह में 15 तारीख तक ही 167 मामले दर्ज हो चुके हैं। इससे साफ है कि समस्या तेजी से बढ़ रही है।
तीन माह पहले नगर पालिका ने शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी और देखरेख का काम जबलपुर की मां दुर्गे ह्यूमन एवं एनिमल वेलफेयर सोसायटी को सौंपा था। इसके लिए वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया गया था और मार्च के आखिर तक अभियान शुरू होना था, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हो सका।
बताया जा रहा है कि फर्म की ओर से भेजे गए डॉक्टर ने फतेहपुर स्थित डॉग शेल्टर होम का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान शेल्टर में कई कमियां बताई गईं, जिन्हें सुधारने के निर्देश दिए गए। लेकिन नगर पालिका अब तक वे कमियां दूर नहीं कर सकी है। यही वजह है कि नसबंदी अभियान अटका हुआ है।
नगर पालिका ने फतेहपुर स्थित पुराने कांजी हाउस को डॉग शेल्टर होम में बदला है। यहां करीब 100 कुत्तों को रखने की व्यवस्था की गई है। योजना के अनुसार शहर से पकड़े गए आवारा कुत्तों की नसबंदी कर उन्हें 5 से 7 दिन तक निगरानी में रखा जाएगा और बाद में उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
नपा अधिकारियों के अनुसार कुत्तों को पकड़ने और छोड़ने का काम नगर पालिका करेगी, जबकि नसबंदी और देखरेख का जिम्मा संबंधित फर्म के पास रहेगा। इसके बदले नगर पालिका प्रति कुत्ता 305 रुपए खर्च करेगी।
इधर, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए राज्यों और स्थानीय निकायों को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि रेबीज से संक्रमित, हिंसक और खतरनाक आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही प्रत्येक जिले में पशु जन्म नियंत्रण केंद्र स्थापित करने और अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बावजूद शिवपुरी में हालात जस के तस बने हुए हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते नसबंदी अभियान शुरू नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में डॉग बाइट के मामले और बढ़ सकते हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा लगातार गंभीर होता जा रहा है।
नगर पालिका सीएमओ इशांक धाकड़ का कहना है कि डॉग शेल्टर होम में कुछ काम बाकी था, जिसे पूरा कराया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि एक माह के भीतर आवारा कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू कर दिया जाएगा।

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