निशांत प्रजापति @ नरवर। नरवर स्थित राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) कार्यालय इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। दमयंती महिला सामुदायिक समिति से जुड़ी महिलाओं ने सहायक विकासखंड प्रबंधक जितेंद्र श्रीवास्तव पर लाखों रुपये के गबन, फर्जी हस्ताक्षर कर राशि निकालने, चेक बुक अपने कब्जे में रखने तथा महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर महिला समूहों में भारी आक्रोश व्याप्त है और पूरे क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
समिति की अध्यक्ष सीता कुशवाहा ने आरोप लगाते हुए बताया कि समूह की महिलाओं को बिना जानकारी दिए समिति की चेकबुक कार्यालय में रख ली गई थी। महिलाओं का कहना है कि कई चेकों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए और बैंक खाते से लाखों रुपये की राशि निकाली गई। महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें खाते के लेनदेन और बैठकों की सही जानकारी तक नहीं दी जाती थी।
महिलाओं के अनुसार, दमयंती महिला सामुदायिक समिति में करीब 15 लाख रुपये के घोटाले की आशंका है। उनका कहना है कि गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के हित में आने वाली राशि का दुरुपयोग किया गया है। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाए कि किसी भी कार्य को कराने के लिए अवैध रूप से पैसों की मांग की जाती थी और विरोध करने पर धमकियां दी जाती थीं।
वीडियो में भी महिलाएं खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करती दिखाई दे रही हैं। महिलाओं का कहना है कि कई प्रस्ताव और दस्तावेज बिना बैठक आयोजित किए तैयार कर दिए गए, जबकि समिति की नियमित बैठकें तक नहीं कराई जाती थीं। समूह की सदस्याओं ने आरोप लगाया कि सीएलएफ का रिकॉर्ड भी महिलाओं को उपलब्ध नहीं कराया जाता था और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को उनसे छिपाकर रखा गया।
वहीं दूसरी ओर, विकासखंड कार्यालय और समिति की ओर से जारी पत्र में कुछ पदाधिकारियों पर लापरवाही और प्रशिक्षण में शामिल न होने के आरोप लगाए गए हैं। विभागीय स्तर पर यह भी कहा गया कि कई बार सूचना दिए जाने के बावजूद जिम्मेदार लोगों ने कार्य में सहयोग नहीं किया, जिसके चलते प्रशासनिक कार्रवाई की गई।
मामले में जब सहायक विकासखंड प्रबंधक जितेंद्र श्रीवास्तव से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो पहले उनका फोन व्यस्त गया। इसके बाद दोबारा संपर्क करने पर मोबाइल फोन बंद मिला, जिससे उनका पक्ष नहीं मिल सका। हालांकि महिलाओं का सवाल है कि यदि कार्रवाई की गई तो क्या उससे पहले निष्पक्ष जांच हुई? क्या बिना हस्ताक्षर सत्यापन और बैठक की पुष्टि के निर्णय लेना उचित था? महिलाओं ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है।
अब यह मामला केवल महिला समूहों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गरीब महिलाओं के भरोसे और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल होगा।
महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित समितियों के खातों, बैठकों, भुगतान और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।