शिवपुरी। शिवपुरी के माधव राष्ट्रीय उद्यान के सब रेंज पूर्व क्षेत्र अंतर्गत टाइगर रिजर्व इलाके में स्थित विस्थापित ग्राम गतवाया से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां स्थित प्राचीन और महाभारतकालीन बताए जा रहे हसनी माता मंदिर को जेसीबी मशीन से तोड़ दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के नीचे दबे कथित सोना-चांदी के जखीरे को निकालने के उद्देश्य से यह खुदाई कराई गई।
बता ग्रामीणों के अनुसार मंदिर विशाल पत्थर की मोटी-मोटी शिलाओं से निर्मित था और गांव के विस्थापन से पहले यहां नियमित पूजा-अर्चना होती थी। ग्रामीणों की आस्था इस मंदिर से गहराई से जुड़ी हुई थी। आरोप यह भी है कि क्षेत्र के बीट गार्ड श्री तोमर द्वारा जेसीबी मशीन बुलाकर मंदिर की संरचना को क्षतिग्रस्त कराया गया। मंदिर परिसर में गहरा गड्ढा खोदे जाने और बाद में उसे बंद किए जाने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि खुदाई के निशान आज भी मौके पर स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो प्राचीन धरोहर को नुकसान पहुंचाने और अवैध खुदाई से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं। लोगों ने प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की जांच कराने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले में अनिल उत्साही प्रदेश कांग्रेस सचिव सेवादल का कहना है कि जब यह गांव विस्थापित नही हुआ था तब इस गांव के लोग होली दीपावली और दशहरे पर हसनी माता के मंदिर की पूजा करने जाया करते थे। समय के साथ यह मंदिर धीरे धीरे क्षतिग्रस्त भी होने लगा था लेकिन मान्यता थी कि यह मंदिर पांडवों ने अपने वनवास के समय बनाया था। इस मंदिर के नीचे खजाने होने की किवदंती थी,यह कई बार खजाने को खोदने का प्रयास भी किया गया था लेकिन बडी बडी शिला होने के कारण यह संभव नहीं हो सका अब चूंकि यह प्रतिबंधित क्षेत्र हो गया और इसमें आमजन के आने की संभावना नहीं रही इसलिए इस जेबीसी मशीन के माध्यम से मंदिर की बडी बडी शिलाओ को तोड़कर हटाया गया और गहरा गड्ढा किया गया है।
इन शिलाओं को क्यों हटाया गया कह नहीं सकते लेकिन हो सकता है प्राचीन काल से आ रही किवदंती खजाने को लेकर इस मंदिर को क्षतिग्रस्त किया गया है और गड्ढा खोदा गया है,फोटो में शिलाए स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। इस मंदिर की इन प्राचीन शिलाओ को क्यों तोडा गया है इससे माधव रिजर्व टाइगर प्रबंधन को क्या लाभ है स्पष्ट जवाब नही मिल रहा है। पुरानी सभ्यता को तोड़ा गया यह सब खजाने की किवदंती के कारण ही हुआ है। इसमें दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्र में यदि पुरातात्विक और धार्मिक महत्व के स्थल सुरक्षित नहीं हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि वन विभाग और जिला प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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