अवैध रेत खनन और भ्रष्टाचार की बलि चढे मासूम भाई-बहन, महुअर नदी मे डूबकर मौत

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Uploaded Imageकरैरा। भ्रष्टाचार और अवैध रेत खनन की काली कमाई ने आज दो मासूम जिंदगियों को लील लिया। करैरा थाना क्षेत्र के भैंसा सुनारी गांव में महुअर नदी के लमकना घाट पर अवैध उत्खनन से बने गहरे गड्ढों में डूबने से दो सगे भाई-बहन की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के समय माता-पिता रिश्तेदारी में शादी का सामान लेने बाजार गए थे, पीछे से खेलते हुए 7 वर्षीय सुमित और 5 वर्षीय ज्योत्सना नदी के उस काल रूपी गड्ढे में समा गए जिसे रेत माफियाओं ने अपनी लालच से खोदा था। इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को ताउम्र का मातम दे दिया है।

दोनों बच्चे महेश केवट के बच्चे थे, जो कि अंदौरा के सिद्धपुरा मोहल्ले में रहते थे। रविवार सुबह दोनों बच्चे घर के पास खेलते-खेलते नदी किनारे पहुंच गए। ऊपर से पानी कम दिख रात्र था, लेकिन अंदर गहराई ज्यादा थी। खेलते समय दोनों पानी में उतरे और सीधे गहरे गड्ढे में चले गाए। देखते ही देखते दोनों डूबने लगे। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बच्चों को बाहर निकाला और परिजन उन्हें लेकर दतिया जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल में बच्चों के शव देखकर मां और दादी बिलख पड़ीं। यह मंजर देख वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। करैरा टीआई विनोद छाई का कहना है अंदौरा गांव के दो बच्चे रोज की तरह नदी में नहाने गए थे, जहां डूब गए। परिजन उन्हें दतिया जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, नहीं डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। फिलहाल हमारी ओर नदी में अवैध उत्खनन की कोई सूचना नहीं है।
सुमित और ज्योत्सना केवट।

भांजी की शादी के लिए भात लेने गए थे माता-पिता
हादसे के समय बच्चों के पिता महेश केवट घर पर नहीं थे। उन्होंने बताया परिवार में शादी होने के कारण वे पत्नी के साथ बड़ौनी भात का सामान लेने बाजार गए थे। घर से निकलते समय बच्चों के लिए खाना रखकर गए थे, ताकि वे घर पर ही खा लें। इसी दौरान गांव से फोन आया दोनों बच्चे नदी में डूब गए हैं। यह खबर सुनते वे सामान छोड़कर तुरंत गांव लौटे, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी।

लमकना घाट पर खनन से नदी में गड्डे, बढ़ा खतरा
गांव के लोगों का कहना है कि लमकना घाट पर लगातार हो रहे अवैध रेत खनन से नदी में जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं। ऊपर से पानी कम दिखाई देता है, जिससे बच्चों और ग्रामीणों को गहराई का सही अंदाजा नहीं लग पाता। नदी के दूसरी ओर शिवपुरी जिले का भैसा सुनारी गांव स्थित है। नदी पास होने के कारण बच्चे अक्सर यहां पहुंच जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना रहता है।

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