शिवपुरी। बिजली विभाग के कर्मचारियो का उचित कम्यूकेशन नही होने के कारण लगातार हादसे हो रहे है ओर इन हादसो मे एक जिंदा इंसान की बलि लग रही हैं। इस बलि मे सबसे अधिक बिजली विभाग की आउटसोर्स कर्मचारी ही शिकार हो रहे है,देश की इस बढती बेरोजगारी मे बिजली विभाग में आउट सोर्स की नौकरी करने वाले कर्मचारियो की जान 24 घंटे खतरे मे रहती है,जरा सी चूक मे जिंदा जिदंगी मौत मे बदल जाती है,सवाल यह उठता है कि विभाग के सबसे सस्ते कर्मचारी की जान इतनी सस्ती है क्या ? सवाल बडा है,ऐसा ही कुछ हुआ है बैराड के गाजीगढ फीडर की लाइन पर,पढिए अब आप मूल खबर।
जानकारी के अनुसार जोराई निवासी 35 वर्षीय हरी वल्लभ धाकड़ पुत्र रामस्वरूप बिजली कंपनी में आउटसोर्स कर्मचारी था। मंगलवार शाम करीब 4 बजे वह गाजीगढ़ फीडर पर खराब बिजली लाइन ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़ा था। परिजनों का कहना है कि हरी बल्लभ विभाग से परमिट लेने के बाद ही लाइन पर काम करने गया था। नियम के मुताबिक परमिट जारी होने के बाद बिजली सप्लाई बंद रहती है, लेकिन काम के दौरान अचानक लाइन में करंट दौड़ गया।
करंट लगते ही वह खंभे से नीचे गिर पड़ा। घटना के बाद परिजन उसे इलाज के लिए ग्वालियर लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में बैराड़ वितरण केंद्र द्वितीय के जेई राजीव सिंह रावत ने कहा कि परमिट के बाद कहां चूक हुई, इसकी जांच की जा रही है। जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हरी बल्लभ की मौत के बाद गाजीगढ़ सब-स्टेशन पर तैनात ऑपरेटर की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि जब लाइन पर काम के लिए परमिट जारी किया गया था, तो फिर बिजली सप्लाई किसने चालू की। हादसे के बाद बिजली कंपनी के अधिकारी केवल जांच की बात कह रहे हैं, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद ऑपरेटर का नाम सामने नहीं ला रहे। इससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हादसे में चली गई जान सेफ्टी किट के बिना लाइन सुधारने
मृतक के परिजनों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हरी बल्लभ को लाइन सुधारने के लिए खंभे पर भेजा गया, लेकिन उसके पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं थे। परिजनों के मुताबिक उसे न तो पूरी सेफ्टी किट दी गई थी और न ही सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए गए थे। आरोप है कि बिना सुरक्षा बेल्ट और अन्य उपकरणों के ही उसे लाइन पर चढ़ा दिया गया। ऐसे में करंट लगने के बाद वह सीधे नीचे जमीन पर गिर पड़ा। परिजनों ने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मामले की जांच डीई बघेल से कराई जा रही है
हम सभी कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराते हैं। यदि कर्मचारी ने सुरक्षा उपकरण नहीं पहने थे तो यह गंभीर लापरवाही है। मामले की जांच डीई बघेल से कराई जा रही है। घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की जांच की जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। दिनेश सुखीजा, एसई, विद्युत वितरण कंपनी, शिवपुरी
हादसे, नहीं सुधरे हालात
3 मई को इंदार थाना क्षेत्र के अम्हारा गांव में ट्रांसफार्मर सुधारने के दौरान रविंद्र यादव की करंट लगने से मौत हो गई थी, जबकि उसका भाई राजपाल घायल हो गया था। राजपाल ने बताया था कि गांव में तीन दिन से बिजली बंद थी। लाइनमैन से बात होने के बाद दोनों ट्रांसफार्मर ठीक करने चढ़े थे, तभी अचानक करंट दौड़ गया।
23 मार्च को दिनारा के सेंवड़ी गांव निवासी 26 वर्षीय हरज्ञान उर्फ राजा कुशवाह उपभोक्ता की लाइन सुधारने गया था। लाइन बंद कराने के बाद काम के दौरान उसे 11 केवी लाइन से करंट लग गया। इलाज के दौरान 7 अप्रैल को झांसी में उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बिजली विभाग के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की थी।
25 जनवरी को नौहरीकलां निवासी दीपक कुशवाह बदरवास फोरलेन पर बिजली ठेकेदार के साथ काम कर रहा था। ठेकेदार ने लाइन बंद होने की बात कहकर उसे खंभे पर चढ़ा दिया। ऊपर पहुंचते ही दीपक को करंट लग गया और वह नीचे गिर पड़ा। हादसे के बाद से दीपक अब तक कोमा में है।

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