शिवपुरी। फिल्मों में अक्सर ग्वाहो और पीड़ित के अपहरण होने के कई दृश्य आपने देखे होंगे,विलेन अपहरण इसलिए कराते थे कि अपहृत व्यक्ति न्यायालय तक नहीं पहुंच सके। ऐसा की कुछ घटना क्रम शिवपुरी जिले में देखने को मिला है। बेटो ने पिता को जमीन के लालच में अपहरण कर लिया और नशेडी का टैग लगाते हुए प्रतिज्ञा नशा मुक्ति केंद्र में कैद करवा दिया। यह बेटो की साजिश थी कि किसी भी प्रकार पिता न्यायालय में अपने अधिकार को प्राप्त करने के लिए अपने बयान दर्ज कराने ना पहुंच पाए,लेकिन एक भाई ने अपने बडे भाई का खोज निकाला और शिवपुरी पुलिस को इस पूरे मामले को लेकर आवेदन दिया। पुलिस के दबाव के कारण नशा मुक्ति केंद्र से अपहृत को मुक्त करना पडा।जानकारी के मुताबिक गुना जिले के श्यामपुर निवासी जगदीश रघुवंशी ने बताया कि उनके चचेरे भाई गंगाराम रघुवंशी को उनके ही बेटों ने साजिश के तहत नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करा दिया। बताया जा रहा है कि गंगाराम की पत्नी और उनके दो बेटे सतीश और विक्की करीब 20 साल पहले अलग रहने लगे थे। इसी दौरान उन्होंने चालाकी से गंगाराम के नाम की करीब 17 बीघा जमीन अपने नाम करा ली थी, जिसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपए बताई जा रही है।
अब जब जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया चल रही थी, तब गंगाराम ने इस पर आपत्ति दर्ज करा दी। यह मामला एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है। 16 अप्रैल को केस की तारीख लगी थी और अगली सुनवाई 30 अप्रैल को तय थी।
आरोप- बेटों ने अगवा करवाकर भर्ती किया
आरोप है कि 20 अप्रैल को जब गंगाराम एक शादी समारोह में शामिल होने गुना आए थे, तभी उनके बेटों ने उन्हें अगवा कर लिया और शिवपुरी के एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करा दिया। आरोप है कि बेटों का मकसद था कि गंगाराम 30 अप्रैल की कोर्ट तारीख पर उपस्थित न हो सकें, जिससे वे जमीन पर कब्जा कर सकें।
जगदीश रघुवंशी ने गंगाराम की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। जब वह तलाश करते हुए नशा मुक्ति केंद्र पहुंचे तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया, जिससे शक और गहरा गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
केंद्र मैनेजर बोले- नशे की हालत में लाए गए थे
मामले में प्रतिज्ञा नशा मुक्ति केंद्र प्रबंधन की लापरवाही भी सामने आई है। केंद्र के मैनेजर ब्रजेश पाठक का कहना है कि गंगाराम को उनके बेटे लेकर आए थे और वह नशे की हालत में थे। दस्तावेजों की जांच के बाद ही उन्हें भर्ती किया गया था। हालांकि बाद में परिजनों की आपत्ति पर गंगाराम को उनकी इच्छा अनुसार छोड़ दिया गया। वहीं नशा मुक्ति केंद्र से बाहर आने के बाद गंगाराम रघुवंशी ने आरोप लगाया कि उनके बेटे उनकी जमीन हड़पना चाहते हैं और इसी वजह से उन्हें जबरन वहां भर्ती कराया गया।
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