शिवपुरी। शिवपुरी के सरकारी विभागो से जारी प्रेस नोटो को पढा जाए तो लगता है कि शिवपुरी मे अब राम राज्य की स्थापना हो चुकी है। शिवपुरी जिले में सब कुछ नियम कायदे और कानून से चलता है,लेकिन कुछ घटनाए ऐसी घटित होती है जहां प्रशासन कुछ लोगो के आगे नतमस्तक हो जाता है और सिंध नदी के पानी के पहरोदारो को बार बार हटा देना इस बात का जिंदा सबूत है कि यहां माफिया बडा है और प्रशासन छोटा
मामला कोलारस विधानसभा से निकलती सिंध नदी से मिल रहा है। शिवपुरी जिले की बदरवास तहसील क्षेत्र स्थित सिंध नदी के सढ़बूढ़ घाट पर बने स्टॉप डेम के गेट रविवार देर रात अज्ञात लोगों द्वारा खोल दिए गए। कुछ गेटों को क्षतिग्रस्त भी किया गया है, जिससे नदी का संचित पानी तेजी से मड़ीखेड़ा डैम की ओर बहने लगा। सोमवार सुबह जब ग्रामीणों ने पानी का स्तर घटता देखा तो क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना कोई सामान्य शरारत नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में सक्रिय रेत माफिया नदी का जल स्तर कम कर अवैध रेत उत्खनन को आसान बनाना चाहते हैं। सढ़बूढ़ घाट लंबे समय से अवैध रेत खनन का संवेदनशील केंद्र माना जाता रहा है और इससे पहले भी इसी प्रकार स्टॉप डेम के गेट खोले जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
24 अप्रैल को भी खुल चुके थे गेट
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले 24 अप्रैल की रात भी इसी स्टॉप डेम के चार गेट खोल दिए गए थे। उस समय प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने कार्रवाई करते हुए गेट बंद करवाए थे। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने घटना से कोई सबक नहीं लिया। न तो गेटों की स्थायी मरम्मत कराई गई और न ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। यही लापरवाही अब दोबारा सामने आई है।
जल संकट का खतरा गहराया
ग्रामीणों के मुताबिक यदि जल्द ही सभी गेट बंद नहीं किए गए तो सिंध नदी किनारे बसे कई गांवों में पानी का संकट गहरा सकता है। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण पहले ही जल स्रोतों पर दबाव है। ऐसे में नदी का जल स्तर गिरने से कुएं, हैंडपंप और तालाब सूखने की आशंका बढ़ गई है। पशुओं के लिए भी पानी की समस्या गंभीर हो सकती है।
सवाल खडा है
इस पूरे मामले को देखे तो यह मामला अवैध रेत खनन से जुडा हैं,सढ़बूढ़ घाट पर बने स्टॉप डेम के गेट तोडकर खोल जाते है जिससे सिंध का जलस्तर कम हो जाता है ओर आसानी से रेत निकाल ली जाती है। इस कारण इस घाट के गेटो का निशाना बनाया जाता है। इस साल ही दो बार इन गेटो की बलि दे दी गई है इससे पूर्व पिछले साल भी यह गेट तोड गए थे लेकिन अभी तक इस मामले मे किसी भी प्रकार की कार्यवाही नही की गई है।

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