दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग, 26 साल बाद बनेगा शनिश्चरी अमावस्या का महायोग, अधिकमास से ठीक पहले बरसेगी कृपा

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भोपाल। पंचांग गणना और ग्रहों के गोचर ने इस वर्ष एक अत्यंत दुर्लभ और कल्याणकारी संयोग निर्मित किया है। पूरे 27 साल बाद, यानी वर्ष 1999 के बाद अब 16 मई 2026 को ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर 'शनिश्चरी अमावस्या' का महायोग बनने जा रहा है। विशेष बात यह है कि अगले ही दिन से अधिकमास का प्रारंभ हो रहा है, जिससे इस तिथि का महत्व कई गुना बढ़ गया है। बुधादित्य और गजछाया जैसे शुभ योगों के बीच पड़ने वाली यह अमावस्या साधना, पितृ तर्पण और शनि दोष निवारण के लिए श्रेष्ठतम मानी जा रही है।

नक्षत्र तथा सौभाग्य योग एवं चतुष्पद करण की साक्षी में बन रहा है। इस बार अलग-अलग ग्रह योग आ रहे हैं। बुधादित्य योग के साथ एक प्रकार का गजछाया योग भी है। शुक्र का स्वग्रही होना यह एक प्रकार की विशिष्ट स्थिति को दर्शाता है। ज्येष्ठ मास में अधिकमास का प्रथम शुद्ध पक्ष कृष्ण पक्ष की अमावस्या दान धर्म के साथ साथ साधना उपासना के मान से व शनि की प्रसन्नता के लिए श्रेष्ठतम है। साधना विशेष फल प्रदान करती है।

1999 में 15 मई को, 2026 में 16 को
अधिकमास के पूर्व में  ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या का विशेष महत्त्व है। इसके अलग-अलग महत्त्व भी है, लेकिन ज्येष्ठ में शनि के प्राकट्य दिवस की बात भी कही जाती है। मान्यतानुसार शनिश्चरी अमावस्या पर ही शनि जयंती की बात कही जाती है। मास, वर्ष गणना के आधार पर 1999 को 15 मई को ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या का योग था। अब इस वर्ष 2026 में 16 मई को यह महायोग बन रहा है।

विशेष परामर्श
जिन जातकों को शनि की साढ़ेसाती, डैया, महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतर दशा चल रही हो, उन्हें इस कालखंड में तनाव-चिंता से मुक्त होकर नए सिरे से स्वयं को बढाने का सकारात्मक प्रयास करना चाहिए। यह वह समय भी है, जहां से आपके जीवन में एक नया मार्ग तथा नया उद्देश्य भविष्य को एक नया आकार दे सकता है। इस दृष्टि से दूरदर्शी रहकर लक्ष्य को सफल बना सकते हैं, तो सकारात्मक परिवर्तन वैचारिक तथा बौद्धिक दृष्टि से होने की आवश्यकता है।

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