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सत्ता परिवर्तन और media से तनातनी के कारण हुई कलेक्टर शिल्पा गुप्ता की विदाई | Shivpuri News

शिवपुरी। 2008 बैच की आईएएस शिल्पा गुप्ता ने 21 मई 2018 को ही शिवपुरी कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किया। लेकिन 6 माह बाद ही प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की गाज उनपर गिरी है और उन्हें हटाकर मंत्रालय भोपाल भेजा गया है। जबकि उनके स्थान पर 2011 बैच की अनूपपुर कलेक्टर सुश्री अनुग्रह पी अब शिवपुरी की नई कलेक्टर होंगी। मूल रूप से तमिलनाडु निवासी सुश्री अनुग्रह पी इसके पूर्व बैरासिया एसडीएम और डिंडौरी में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के पद पर भी पदस्थ रह चुकी हैं। 

चुनाव आयोग की गाज जब शिवपुरी कलेक्टर तरूण राठी पर गिरी तो उनके स्थान पर शिल्पा गुप्ता को शिवपुरी कलेक्टर बनाकर भेजा गया। उनका कार्यकाल बेहद संक्षिप्त रहा। लेकिन वह अपने कार्यकाल की कोई छाप नहीं छोड सकी। बल्कि उनकी विवादास्पद और कथित रूप से असंवेदनशील कार्यप्रणाली चर्चा में रही। मीडिया से भी रिश्ते उनके बेहद तनावपूर्ण रहे। राजनैतिज्ञों में भी वह सिर्फ शिवपुरी विधायक और तत्कालीन कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया की चहेती रहीं। 6 माह में कलेक्टर शिल्पा गुप्ता कई बार विवादों में घिरी। 

कलेक्ट्रेट में होने के बाद भी ज्ञापन देने आने वाले लोग उनके दर्शनों के लिए तरसते रहे। पब्लिक पार्लियामेंट ने सिंध जलावर्धन योजना में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाते हुए शिवपुरी में बड़ा आंदोलन किया। जिसमेें 55 दिन तक आंदोलनकारियों ने क्रमिक भूख हड़ताल की। इसके बाद पब्लिक पार्लियामेंट ने बडी रैली निकाली और ज्ञापन देने के लिए आंदोलनकारी कलेक्ट्रेट पर पहुंचे। लेकिन कलेक्टर शिल्पा गुप्ता ने हठधर्मिता का परिचय देते हुए स्वयं ज्ञापन लेने के लिए आने से इंकार कर दिया। 

जिस पर आंदोलनकारी उन्हें ज्ञापन दिए बिना वापिस लौट गए। किसानों ने भी बडी संख्या में रैली निकालकर उन्हें ज्ञापन देना चाहा। लेकिन तब भी शिल्पा गुप्ता ज्ञापन लेने के लिए नहीं आई। जबकि आंदोलनकारियों के साथ स्वयं उस समय के पोहरी विधायक प्रहलाद भारती भी थे। जो कलेक्टर शिल्पा गुप्ता के समक्ष बेवश नजर आए। 


शिल्पा गुप्ता ने प्रशासन के ढर्रे को बदलने का प्रयास नहीं किया और जो सेट अप पूर्ववर्ती कलेक्टरों ने जमाया था उसी पर वह चलती रहीं। जनसुनवाई के दौरान उनकी कई बार शिकायतकर्ताओं से झडप हुई तथा शिकायतकर्ताओं को बेईज्जत कर जनसुनवाई से निकाल दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता अभिनंदन जैन को तो बुरी तरह बेईज्जत कर जनसुनवाई से बाहर किया गया। 

मतगणना के दौरान मीडिया से कलेक्टर शिल्पा गुप्ता की खूब ठनी और भारत निर्वाचन आयोग का परिचय पत्र होने के बाद भी मतगणना कक्षों में पत्रकारों को जाने की इजाजत नहीं दी गई। जिससे मतगणना की पारदर्शिता पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सकी। मतगणना के बाद कलेक्टर शिल्पा गुप्ता ने पत्रकारों को पार्टी देने की इच्छा जाहिर की लेकिन उनके व्यवहार से आहत पत्रकारों ने उनकी पार्टी में शिरकत करने से साफ तौर पर इंकार कर दिया।