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पढ़िए भाजपा के विकास की अंतिम यात्रा, दावा: आयोग बैलगाड़ी पर चुनाव कराने जाएगा

ललित मुदगल अएक्सरे/शिवपुरी। खबर कोलारस के विधानसभा क्षेत्र से आ रही हैं। मध्यप्रदेश की सत्ता पर 15 वर्षों से भाजपा की सरकार थी, सरकार दावा करती है कि उन्होंने मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से एक उन्नत प्रदेश बना दिया है। भाजपा ने यहां इतना विकास कराया है कि विकास का ब्लडप्रेशर बढ जाने से उसका दम टूट गया। आईए तो हम आपको भाजपा की विकास की अंतिम यात्रा के दर्शन कराते है और भाजपा के विकास जैसे शब्द का एक्सरे करते हैं।

4 नालों से गुजरना पड़ता है
कोलारस जनपद मुख्यालय से महज 40km दूर ग्राम पंचायत धुंआ का छोटा सा ग्राम रसोई, इस गांव के दर्शन के लिए आपको दुर्गम तीर्थयात्राओं जैसी यात्रा करनी पडेंगी। कार पहुंचने की संभावना शून्य है, आपको पैदल या बाईक से जाना पडेगा। इस गांव तक मप्र सरकार की कोई सड़क नही जाती हैं, आपको इस गांव तक जाने के लिए 4 नालों से गुजरना होगा, तब जाकर आप इस गांव के दर्शन कर सकते हैं।

स्कूल क्या होता है किसी को पता नही नहीं
यह गांव गुर्जर समाज बहुल्य गांव है, इस गांव की करीब 400 की जनसंख्या है। इस गांव का शिक्षा का स्तर मप्र में सबसे कम हो सकता है, इस गांव की 80 प्रतिशत आबादी अनपढ हैं।बच्चों को यह पता नही है कि स्कूल कैसा होता हैं। यह स्कूल जैसी कोई चीज मप्र सरकार की नही हैं।

बच्चा पूछता है, मां क्या यहां रात नही होती ?
बिजली तो इस गांव के लिए भगवान हैं, आजादी के इतने सालों बाद तक इस गांव में ना तो भगवान आए और ना ही बिजली। जब इस गांव का बच्चा पहली बार कोलारस यह अन्य जगह जाता है तो अपनी मां से अवश्य पूछता होगा की मां यहां अंधेरा क्यों नही है? क्या यहां रात नही होती ? क्योंकि वह अपने गांव से बाहर निकल कर ही बिजली क्या होती है लाईट कैसे जलती है और सूरज के अतिरिक्त ओर किसी चीज से रोशनी होती है वह जीवन में पहली बार देखता होगा। इस गांव में आटा पिसाने के लिए या तो 10 किमी दूर जाना होता है, या फिर एक मात्र डीजल पंप से चलने वाली चक्की से आटा पिसता हैं। मोबाईल चार्ज कराने के लिए दूर गांव जाना होता हैं। 

मरीज स्वास्थ्य केंद्र तक जिंदा पहुंच जाए यह चुनौती है
इस गांव के निवासी राजकुमर केवट का कहना है कि मप्र सरकार की इस गांव में कोई सुविधा नही हैं। स्कूल, आंगनबॉडी, शासकीय राशन की दुकान, और चिकित्सा की सुविधा नही हैं। जननी एक्सप्रेस की सुविधा गांव से करीब 10 किमी पहले है, कोई बीमार हो जाती हैं तो सबसे पहले स्वास्थ्य केन्द्र तक मरीज को जिंदा पंहुचाना सबसे बडी चुनौती हैं। 

बच्चे दौड़ कर पहुंचते है कि शायद इस बार विकास आएगा
चुनावी बेला में नेता जैसे प्राणी देखे जाते है। हर पांच साल में चुनाव की गाड़ी आती है बच्चे दौड़ कर पहुंचते है कि शायद इस बार विकास आएगा, मगर आज तक कोई भी जनप्रतिनिधि यहां पर नारकीय जीवन जी रहे लोगों के लिए आशा की कारण नही बन पाया है, बिजली सड़क शिक्षा स्वास्थ्य सभी सुविधाओं से महरूम ये गांव है

ये गांव विकसित मप्र के माथे पर कलंक है
इसके बाद सपंर्क में नही आते है। विकास क्या होता है इस गांव का विकास ने मुंह नही देखा हैं। यह गांव भाजपा के उन्नत विकसित मप्र के माथे पर कंलक हैं। इस गांव में निवास करने वाले लोग बस जी रहे है। 

5 साल पहले एक सरकारी अधिकारी आया था
शिवपुरी समाचार डॉट कॉम के कोलारस विधानसभा के संवाददाता मुकेश रघुवंशी जो इस गांव में कवरेज के लिए गए थे, गांव के लोगों ने बताया कि पिछली बार चुनाव कराने वाले अधिकारी और उनका सामान बैलगाडी से इस गांव में आया था। 

कहने का सीधा-सीधा अर्थ है कि इस गांव को देखकर लगता नही है कि यह आजाद भारत का गांव है। और भाजपा क्या ऐसे गांवो को विकास की संज्ञा देती है। क्या भाजपा का यही उन्नत मप्र हैं। सवाल बड़ा हैं।